क्यों महत्वपूर्ण है देव दीपावली? शिव की नगरी काशी से है गहरा नाता

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क्यों महत्वपूर्ण है देव दीपावली? शिव की नगरी काशी से है गहरा नाता
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इस साल कार्तिक पूर्णिमा जिसे देव दीपावली भी कहते है, 27 नवंबर को है। कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 26 नवंबर 2023 की दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से है। तिथि का समापन 27 नवंबर को 2 बजकर 45 मिनट पर है। लेकिन उदयतिथि को देखते हुए कार्तिक पूर्णिमा 27 नवंबर को मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को गंगा नदी में स्नान करने से 1000 बार गंगा स्नान का फल मिलता है। इसी के साथ ही जन्मों के पाप धुल जाते हैं, आरोग्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा नदी के किनारे अन्न, धन, वस्त्र का दान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं। मान्यता तो ये भी कहती है कि इस पावन दिन पर देवतागण भी धरतीलोक पर आते हैं और भक्त उनके निमित्त शाम को दीपदान करते हैं।

क्यों मनाते हैं देव दीपावली?

शिवपुराण के अनुसार, एक समय पर वरदान के मद में चूर त्रिपुरासुर राक्षस का आतंक पृथ्वी पर फैल गया था। तब देवताओं ने भगवान शिव से एक राक्षस के संहार की गुहार लगाई, जिसे स्वीकार करके भगवान ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध कर दिया।  इससे खुश होकर देवता काशी आए और भगवान शिव की उपासना की।

तब से उस दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा मनाई जाती है। देवताओं ने काशी में अनेकों दीए जलाकर दिवाली मनाई थी, इसी के चलते हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा पर काशी में दिवाली मनाई जाती है और चूंकि ये दीवाली देवों ने मनाई थी इसीलिए इसे देव दिवाली या देव दीपावली कहा जाता है।

 

 

 

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