मोदी सरकार में देश पर ₹155 लाख करोड़ कर्ज, कहां खर्च हो रहा है ये पैसा?

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26 मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की कमान संभाली थी। पीएम मोदी को सत्ता में आए 9 साल हो चुके हैं। बीजेपी इन दिनों मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने का जश्न मना रही है। वहीं एनडीए सरकार ने महज 9 साल में 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज ले लिया, साल 2014 में सरकार पर कुल कर्ज 55 लाख करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 155 लाख करोड़ हो गया है, जबकि देश के 14 प्रधानमंत्रियों ने मिलकर 67 साल में कुल 55 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया। तो आइए समझते हैं मोदी सरकार ने 100 लाख करोड़ रुपये का कर्ज क्यों लिया है और भारत सरकार कर्ज लेकर इतना पैसा कहां खर्च करती है?

केंद्र सरकार के मुताबिक, 31 मार्च 2023 तक भारत सरकार पर 155 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। अगले साल मार्च तक ये बढ़कर 172 लाख करोड़ रुपए हो सकता है। इसके अलावा 20 मार्च 2023 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 31 मार्च 2023 तक भारत सरकार पर 155 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इस हिसाब से पिछले 9 सालों में देश का कर्ज 181 प्रतिशत बढ़ गया है। साल 2014 में भारत की जीडीपी की बात की जाए तो ये 2.04 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर पर थी और तब विश्व की 10वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी थी, वहीं आज भारत की जीडीपी बढ़कर 3.75 लाख अमेरिकी डॉलर पर आ गई है और भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी है।

किन वजहों से सरकार पर कर्ज बढ़ता है?

इकोनॉमिस्ट का कहना है कि सरकार का कर्ज दो बातों पर निर्भर करता है। 1. सरकार की आमदनी कितनी है और 2. सरकार का खर्च कितना है। अगर खर्चा आमदनी से ज्यादा हो तो सरकार को कर्ज लेना ही पड़ता है। जैसे ही सरकार कर्ज लेती है, इससे राजस्व घाटा बढ़ जाता है। इसका मतलब ये है कि सरकार का खर्च राजस्व से होने वाली कमाई से ज्यादा है। आमतौर पर राजस्व घाटा तब ज्यादा होता है जब सरकार कर्ज के पैसे को वहां खर्च करती है जहां रिटर्न नहीं मिलता है।

विदेश से कर्ज लेने में कौन आगे ?

साल 2014 में सरकार बनाने से पहले बीजेपी ने जनता से वादा किया था कि वो भारत सरकार का कर्ज कम करेगी, लेकिन पिछले 9 सालों में देश का कर्ज घटने के बजाय बढ़ गया है। 2014 से अब तक मोदी सरकार ने विदेश से कुल 19 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जबकि 2005 से 2013 के बीच यूपीए सरकार ने करीब 21 लाख करोड़ रुपये विदेशी कर्ज लिया, जबकि 2005 में देश पर विदेशी कर्ज 10 लाख करोड़ था, जो 2013 में बढ़कर 31 लाख करोड़ हो गया। इसी तरह 2014 से 2022 तक विदेशी कर्ज 33 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 50 लाख करोड़ रुपये हो गया यानी इस बीच 19 लाख करोड़ रुपये विदेशी कर्ज बढ़ा। इससे एक बात तो साफ है कि 2014 के बाद एनडीए सरकार पर देश का कर्ज कम नहीं हुआ है।

 साल-दर-साल कैसे बढ़ा कर्ज ?

2004 में जब मनमोहन सिंह की सरकार बनी तो भारत सरकार पर कुल कर्ज 17 लाख करोड़ रुपए था। 2014 तक ये तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 55 लाख करोड़ रुपये हो गया। अगर 2014 में देश की कुल आबादी 130 करोड़ मान ली जाए तो उस समय हर भारतीय पर औसत कर्ज करीब 42 हजार रुपये था। वहीं, अब 2023 में भारत सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 155 लाख करोड़ रुपए हो गया है। भारत की कुल आबादी 140 करोड़ मान लें तो आज के समय में हर भारतीय पर 1 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है। इसी तरह अब अगर विदेशी कर्ज की बात करें तो 2014-15 में भारत पर विदेशी कर्ज 31 लाख करोड़ रुपए था। अब 2023 में भारत पर विदेशी कर्ज बढ़कर 50 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

भारत सरकार कर्ज लेकर पैसा कहां खर्च करती है?

1. हर महीने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज

2. उज्ज्वला योजना के तहत करीब 10 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर

3. करीब 9 करोड़ किसानों को 6 हजार रुपये सालाना

4. पीएम आवास योजना के तहत दो करोड़ लोगों के लिए घर बनाने में आर्थिक सहायता

5- नई संसद बनाने में भी सरकारी कर्ज का इस्तेमाल हुआ है

6- सब्सिडी, डिफेंस और इसी तरह के दूसरे सरकारी खर्चों की वजह से देश का वित्तीय घाटा बढ़ता है

7- कोरोना महामारी के समय भी भारत सरकार ने कई तरह की सब्सिडी दी

क्या देश का कर्ज बढ़ने से महंगाई बढ़ती है?

इस पर इकोनॉमिस्ट का कहना है कि देश पर बढ़ते कर्ज का महंगाई से कोई सीधा संबंध नहीं है। सरकार आय बढ़ाने के लिए कर्ज के पैसे का इस्तेमाल करती है। कर्ज का पैसा जब बाजार में आता है तो इससे सरकार का रेवेन्यू बढ़ता है। हालांकि अगर कर्ज के पैसे का गलत इस्तेमाल हो तो महंगाई भी बढ़ सकती है। जैसे अगर कर्ज लेकर पैसे आम लोगों में बांट दिए जाएं तो लोग ज्यादा चीजें खरीदने लगेंगे। इससे बाजार में चीजों की मांग बढ़ेगी और मांग बढ़ने के बाद अगर आपूर्ति सही नहीं होगी तो चीजों के दाम बढ़ेंगे। उनका मानना है कि कर्ज लेना हमेशा किसी देश के लिए खराब नहीं होता है। भारत की इकोनॉमी 3 ट्रिलियन से ज्यादा हो गई है। इस हिसाब से 155 लाख करोड़ रुपए का कर्ज ज्यादा नहीं है। सरकार इस पैसे को वंदे भारत जैसी ट्रेन चलाने, रोड और एयरपोर्ट बनाने पर खर्च करती है, जो देश के विकास के लिए जरूरी है।

दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले देश कौन से हैं?

जापान जैसे देश दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले देशों में हैं। दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका भी कर्ज लेने के मामले में भारत से आगे है। वहीं, कर्ज में डूबा अमेरिका कंगाल होने से कुछ ही दिन दूर है। पाकिस्तान की इकोनॉमी पर पहले से ही संकट के बादल छाए हुए हैं।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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