Savings Account में मिनिमम बैलेंस नहीं मेंटेन करने पर मनमाने चार्जेस लगा प्रॉफिट कमा रहे Bank, जानिये RBI के नियम

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आपका खाता प्राइवेट बैंक में हो या सरकारी बैंक में ज्यादातर जगहों पर आपको अपने सेविंग अकाउंट (Savings Account) में मिनिमम बैलेंस रखना पड़ता है। हालांकि किस बैंक के सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रहेगा ये बैंक पॉलिसी के आधार पर तय होता है। हर बैंकों की अपनी अलग-अलग पॉलिसी होती है, लेकिन कुछ बैंक आप से इसके नाम पर अनुचित शुल्क वसूल रहे हैं। वो क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के डिफॉल्ट पर सालाना 40 % पेनाल्टी लगाते हैं, लेकिन बचत खातों में मिनिमम बैलेंस न मेंटेन करने पर सालाना 103 % पेनाल्टी लगा रहे हैं। ये खुलासा फाइनेंशियल व्हिसिल ब्लोअर सुचेता दलाल के मनीलाइफ फाउंडेशन और आईआईटी बॉम्बे के एक्सपर्ट्स ने किया है।

इन एक्सपर्ट्स ने 25 सरकारी और प्राइवेट बैंकों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर पेनाल्टी की स्टडी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, शॉर्टफॉल यानी (न्यूनतम बैलेंस से कम रकम) पर बैंक सालाना 103 प्रतिशत पेनाल्टी वसूल रहे हैं। जबकि नियम ये है कि शॉर्टफॉल रकम पर 3 स्लैब में प्रतिशत के आधार पर पेनाल्टी लगाई जानी चाहिए और स्लैब बढ़ने पर प्रतिशत घटता जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिनिमम बैलेंस न रखने पर प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा चार्ज वसूलते हैं। लेकिन बाकी सभी सर्विस के लिए औसत चार्ज सरकारी बैंकों का सबसे ज्यादा है। तकनीकी वजहों से चेक रिटर्न होने पर यस बैंक सबसे ज्यादा चार्ज ले रहा है। कुछ दिन पहले मनमाने तरीके से मिनिमम बैलेंस न रखने पर यस बैंक ने ज्यादा चार्ज वसूला था। जिस पर RBI ने बैंक पर 91 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। घर पहुंच बैंक सेवा पर फेडरल बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड और इंडियन ओवरसीज बैंक एटीएम पर नॉन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, केनरा बैंक डीडी कैंसिलेशन और एटीएम पिन जनरेशन के लिए सबसे ज्यादा चार्ज ले रहे हैं। जबकि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक SMS अलर्ट के लिए पैसे नहीं लेता है। इसका ऑनलाइन IMPS चार्ज बैंक में लगने वाले IMPS चार्ज से भी कम है। इसके खाताधारकों को पेनल्टी से बचने के लिए बैंक खाते में सबसे कम पैसा रखना जरूरी है।

बैंक ने कितना पर्सेंट चार्ज वसूला 

बैंक                           मासिक       सालाना    

यूनियन                         5 %            60 %

आईडीबीआई                5 %            60 %

कैनरा                          5 %            60 %

बैंक ऑफ बड़ौदा           6 %            72 %

महाराष्ट्र                        6 %            72 %

एचडीएफसी                  07 %         84 %

आईसीआईसीआई          07 %         84 %

कोटक                          07 %         84 %

एक्सिस                         07 %          84 %

बैंक ऑफ इंडिया            11 %          121 %

आईओबी                       11 %         121 %

फेडरल                          8 %            96 %

पीएनबी                          8 %            96 %

सेंट्रल                             8 %             96 %

इस आधार पर बैंकों ने करीब 8.6 % मासिक और 103 % सालाना वसूली की है।

 क्या होना चाहिए स्लैब  

रिजर्व बैंक ने शॉर्टफॉल के लिए 1000 रुपये तक के तीन स्लैब तय किए हैं। रिजर्व बैंक की मंशा है कि ज्यादा शॉर्टफॉल होने पर कस्टमर को ज्यादा पेनाल्टी न देनी पड़े, लेकिन बैंक मनमानी कर रहे हैं।

 

स्लैब    शॉर्टफॉल (रु.)   औसत     तय पेनाल्टी       प्रतिशत

1         1-500                 250         100                40

2         501-750             625         160               25.6

3         751-1000           875         200               22.9

(तीनों का औसत 32.1% है। अगर कोई बैंक तिमाही आधार पर मिनिमम बैलेंस पेनाल्टी लगाता है, तो उसे 10.7 % होना चाहिए। लेकिन बैंक 3.22 गुना तक पेनाल्टी लगा रहे हैं।)

25 में से 14 बैंकों में शॉर्टफॉल के कई स्लैब हैं। अगले 12 बैंकों ने प्रतिशत के बजाय फिक्स्ड अमाउंट की पेनाल्टी लगाई। 9 बैंकों में स्लैब ही नहीं था। चार्ज 4.3 % मासिक (52 प्रतिशत सालाना) था। 14 बैंकों में स्लैब स्ट्रक्चर था। लेकिन चार्ज प्रतिशत में न लेकर तय राशि रुपए में ली जा रही थी। ये राशि अलग-अलग स्लैब में थी। लेकिन ये हर स्लैब के लिए समान प्रतिशत में थी। नियमों के मुताबिक, राशि बढ़ने पर प्रतिशत कम होना चाहिए।

RBI के नियम

मिनिमम बैलेंस न रखने पर बचत खाते में बैंक में रखे शून्य होने तक ही काटे जा सकते हैं, उसे माइनस बैलेंस में नहीं बदला जा सकता है। मिनिमम बैलेंस न रखने पर फाइन लगाने के बजाय, बैंक ऐसे खातों पर उपलब्ध सेवाओं को बंद कर सकते है। वहीं जब बैलेंस वापस आ जाए तो सेवाएं बहाल कर सकते हैं। साथ ही अगर कोई अपना बैंक खाता बंद करवाना चाहता है तो बैंकों को उसे बिल्कुल फ्री में बंद करना पड़ेगा यानी बैंक इसके लिए आपसे कोई भी चार्ज नहीं ले सकते हैं। अगर कोई बैंक आपके खाते को माइनस में डालता है और अकाउंट बंद करने के लिए माइनस बैलेंस चुकाने के लिए कहता है तो आप bankingombudsman.rbi.org.in पर अपनी शिकायत RBI को कर सकते हैं। 

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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