Budget 2024 : बजट में आम आदमी को निर्मला सीतारमण से क्या हैं उम्मीदें ?

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Budget 2024 : बजट में आम आदमी को निर्मला सीतारमण से क्या हैं उम्मीदें ?
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मोदी सरकार 3.0 का पहला आम बजट इसी महीने 23 जुलाई को आने वाला है। बजट सत्र 22 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा। इस बजट में अभी सबसे ज्यादा चर्चा और उम्मीद इनकम टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी को लेकर है। जबकि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में सिर्फ 2.79 करोड़ यानी 1.97 प्रतिशत लोग ही टैक्स देते हैं। ऐसे में बार-बार यही सवाल उठता है कि आखिर टैक्स का 100 प्रतिशत बोझ इन्हीं 2 प्रतिशत लोगों पर ही क्यों? जबकि पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि साल 2022 में देश के 2.16 करोड़ लोगों ने विदेश यात्रा की। सियाम की रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में ही 24 लाख लोगों ने 10 लाख रुपये से महंगी कारें खरीदीं और करीब 25 लाख लोगों ने पिछले साल 50 लाख रुपये से ज्यादा कीमत के मकान खरीदे। फिर भी देश का टैक्स कलेक्शन जीडीपी के आकार की तुलना में सिर्फ 11.7 प्रतिशत ही है।

जानकारों का मानना है कि इस बार बजट में कई ऐसी घोषणाएं हो सकती हैं, जिनका आम लोगों को कई सालों से इंतजार है। ये बजट मिडिल क्लास को टैक्स में छूट देने, महिला सशक्तिकरण, किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार पर फोकस रह सकता है। बजट में सरकार किसानों को पीएम किसान योजना के तहत दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को भी बढ़ाने पर विचार कर रही है। सालाना 6000 रुपये की राशि को बढ़ाकर 8,000 रुपये तक कर सकती है। वहीं इंटरिम बजट में 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया था। माना जा रहा है कि इसे लेकर इस बजट में कुछ खास ऐलान किए जा सकते हैं। बजट 2024-25 में स्टैंडर्ड डिडक्शन यानी मानक कटौती की लिमिट 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये की जा सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन वो रकम होती है, जिसे वेतनभोगी करदाता अपनी कर योग्य आय में से बिना कोई सबूत दिए घटा सकते हैं। साल 2018 में ये सीमा 40 हजार रुपये थी। साल 2019 में इसे बढ़ाकर 50 हजार किया गया, लेकिन तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। 

वहीं डिफेंस, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भी कई घोषणाएं हो सकती हैं। इसके अलावा सरकार स्टार्टअप पर लगने वाले एंजल टैक्स को कम करने पर विचार कर सकती है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स सब-असेंबली और कंपोनेंट के लिए 40,000 करोड़ रुपये की PLI स्कीम की संभावना है। इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) 2.0 में संशोधन लाया जा सकता है। जबकि आंध्र प्रदेश को 1 लाख करोड़ और बिहार को भी स्पेशल पैकज का प्रवाधान करने की चर्चा है। 2014 से धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की निवेश सीमा नहीं बढ़ाई गई है। जानकारों का कहना है कि कई संगठनों ने सरकार से इस सीमा को बढ़ाकर 2.5 से 3 लाख रुपये करने की मांग की है। इस बार देश के कुछ टियर 2 शहरों के करदाताओं को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की छूट के मामले में राहत मिल सकती है। अभी तक देश के चार मेट्रो शहरों दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई के करदाताओं को उनके मूल वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर HRA छूट मिलती है। टियर-2 के शहरों के लिए छूट की सीमा मूल वेतन के 40 फीसदी तक ही है। लेकिन इस बजट में बेंगलुरु, हैदराबाद, गुरुग्राम, पुणे जैसे नॉन मेट्रो शहरों के लिए एचआरए की छूट सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का ऐलान हो सकता है।

 कैपिटल गेन टैक्स में राहत की उम्मीद नहीं !

हालांकि कैपिटल गेन टैक्स में राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को इस बार भी निराशा हाथ लग सकती है। बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था की समीक्षा और सरलीकरण की संभावना फिलहाल नहीं है। केंद्रीय बजट 2024-25 में इस प्रस्ताव को शामिल नहीं किया जा सकता है। इस बार बजट में अनिवार्य रूप से पीएफ कटवाने के लिए वेतन सीमा को 15 हजार रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 21 हजार रुपये किया जा सकता है। जानकारों की मानें तो देश में करीब 10 प्रतिशत लोग आयकर योग्य कमाई कर रहे हैं। लेकिन वो कई अलग-अलग वजहों से टैक्स देने से बचते हैं। इसके बावजूद कोविड के बाद सिर्फ 4 साल में आयकर कलेक्शन दोगुना से ज्यादा हो गया है। साल 2020-21 में आयकर कलेक्शन 9.47 लाख करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 19.58 लाख करोड़ रुपये हो गया। 

डिजिटल पेमेंट की पहचान  

अब आपको बताते हैं हर देश का जीडीपी के मुकाबले टैक्स कलेक्शन क्या है। तो अमेरिका का टैक्स कलेशन 24.5 प्रतिशत है। इसी तरह चीन का 18 प्रतिशत, जापान का 30.6 प्रतिशत, जर्मनी का 38.2 भारत का 11.7, ब्रिटेन का 24.9, फ्रांस और इटली का 24.6 प्रतिशत और द. कोरिया 28.7 टैक्स कलेक्शन है।अमेरिका की आबादी 33.99 करोड़ है और करीब 20 करोड़ लोग यानी 60 प्रतिशत अबादी आयकर चुकाती है। इसी तरह ब्रिटेन की जनसंख्या 6.78 करोड़ है। इनमें से 3.7 करोड़ यानी 55 प्रतिशत आबादी टैक्सपेयर है और फ्रांस की 58 प्रतिशत अबादी टैक्स भरती है। जबकि भारत में वित्त वर्ष 2022-23 में 7 करोड़ 40 लाख टैक्स रिटर्न दाखिल किए गए। इनमे से 5 करोड़ 16 लाख लोगों पर कोई टैक्स देनदारी नहीं थी। अब यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। आयकर विभाग अगर एआई के जरिए ऐसे ट्रांजेक्शन की रियल टाइम पहचान करे तो वो उन लोगों तक पहुंच सकता है जो आयकर नहीं देते हैं।

ऐसे बढ़ रहा है टैक्स कलेक्शन 

देश में कुल टैक्स कलेक्शन पिछले 4 साल से लगातार बढ़ रहा है। 2019-20 में ये 10.5 लाख करोड़ रुपये था, जो 2020-21 में घटकर 9.47 लाख करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, 2021-22 में ये बढ़कर 14.08 लाख करोड़, 2022-23 में 16.64 लाख करोड़ और 2023-24 में 19.58 लाख करोड़ हो गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 7वीं बार बजट पेश करेंगी। वो ऐसा करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी। इससे पहले मोरारजी देसाई ने लगातार छह बजट पेश किए थे। तो मोदी सरकार के इस बजट से आम आदमी को काफी उम्मीदें हैं। अब देखना ये होगा कि मोदी सरकार का ये बजट आम लोगों को राहत देने वाला होगा या फिर उन्हें और इंतजार करना होगा।  

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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