पहली बार भरने जा रहे हैं ITR ? इन बातों का रखें ध्यान

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अगर आप पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने जा रहे हैं तो हम आपको इस खबर में बता रहे हैं कि घर बैठे आसानी से ITR कैसे फाइल करें और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई है। ऐसे में अब आपके पास टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए बहुत कम दिन बचे हैं। नौकरी करने वालों से लेकर बिजनेसमैन तक को ITR दाखिल करना जरूरी है। अगर आप पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने जा रहे हैं तो हम आपको इस खबर में बता रहे हैं कि घर बैठे आसानी से ITR कैसे फाइल करें और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?  

ITR फाइल करने के लिए आधार, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल, इनवेस्टमेंट प्रूफ, फॉर्म 16, TDS सर्टिफिकेट, बैंकों और डाकघरों से मिले ब्याज का प्रूफ, छूट क्लेम करने के लिए डोनेशन किया है तो उसकी रसीद, स्टॉक ट्रेडिंग स्टेटमेंट, इंश्योरेंस पॉलिसी की रसीद, आधार से वैलिडेट बैंक अकाउंट, बैंक से लिया ब्याज सर्टिफिकेट सहित निवेश के डॉक्यूमेंट जरूरी हैं। इसमें गलती होने की वजह से फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है या रिफंड में देरी हो सकती है, इसके अलावा गलत जानकारी देने के कारण कई दिक्कतों का सामना भी करना कर पड़ सकता है। 31 जुलाई, 2024 तक वित्त वर्ष 2023-24 और असेसमेंट ईयर 2024-25 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। इसके बाद आपको रिटर्न फाइल करने पर जुर्माना देना पड़ेगा। 

दो तरह के हैं टैक्स रिजीम  

फिलहाल ITR दाखिल करने के लिए 2 तरह की टैक्स रिजीम हैं। पहला ओल्ड टैक्स रिजीम है और दूसरा न्यू टैक्स रिजीम। ऐसे में ITR दाखिल करते समय आपको नया या पुराना टैक्स रिजीम में से किसी एक को चुनना होगा। न्यू टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट के तौर पर रखा गया है। इसमें 7 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है।  अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत ITR फाइल करना चाहते हैं, तो आपको खुद से बदलना होगा। दोनों के लिए टैक्स स्लैब रेट्स अलग-अलग हैं। ओल्ड टैक्स रिजीम एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत 5 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर टैक्स छूट मिलती है। आप इसमें हाउस रेंट अलाउंस, लीव ट्रैवल अलाउंस, सेक्शन 80C, 80D, 80CCD (1B), 80 CCD (2) और अन्य के तहत ज्यादा से ज्यादा टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। 

फॉर्म 16    

अगर आप किसी कंपनी या संस्थान में नौकरी कर रहे हैं, तो आपको अब तक फॉर्म 16 मिल गया होगा। ये आपके नियोक्ता की ओर से दिया जाने वाला एक जरूरी TDS सर्टिफिकेट है। इसमें आपकी सैलरी, क्लेम की गई कटौतियों और प्राप्त छूटों की डिटेल दी गई होती है, जो आपके ITR दाखिल करने के लिए जरूरी है।

फॉर्म 26 AS   

फॉर्म 26 AS को टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट फॉर्म भी कहा जाता है। इंनकम टैक्स रिर्टन भरने के लिए फॉर्म 26 AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट दोनों की आवश्यकता पड़ती है। फॉर्म 26 AS में ब्याज, सैलरी, डिविडेंड पर TDS कटौती के साथ TDS से जुड़ी सभी जानकारी देनी होती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन  

स्टैंडर्ड डिडक्शन वो कटौती या छूट है जो आपके निवेश और खर्च पर व्यक्तिगत तौर पर होती है। ये वो रकम है जो आपकी आमदनी से सीधे काटकर अलग कर दी जाती है और बची हुई आमदनी पर ही टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स की गणना की जाती है।

AIS

एनुअल इनकम स्टेटमेंट फॉर्म 26 AS की जगह ले चुका है। इसमें टैसपेयर्स को वित्तीय वर्ष में अपनी पूरी आय की जानकारी एक ही जगह मिल जाती है। इसमें आपकी अचल संपत्ति की जानकारी भी होती है। अगर आपने म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में कोई निवेश किया है तो उसकी जानकारी भी इस फॉर्म से मिल जाती है। आप इनकम टैक्स की वेबसाइट पर फॉर्म 26 AS और AIS डाउनलोड कर सकते हैं।

ITR वेरिफिकेशन जरूर करें 

ITR फाइल करने के बाद टैक्सपेयर्स को अपने रिटर्न को वेरिफाई करना होता है। आप अपने रिटर्न को ऑनलाइन या ऑफलाइन भी वेरिफाई कर सकते हैं। 

 

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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