मोदी की गारंटी- इंडिया आखिर कैसे बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी?

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प्रधानमंत्री मोदी ने एक सम्मेलन में कहा कि देश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था 10 सालों में किए गए सुधार का नतीजा ही है। पीएम मोदी ने गारंटी दी कि उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा। फिलहाल भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में अगर पीएम मोदी साल 2024 में होने वाले आम चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनते हैं तो उनकी सरकार के पास ऐसा करने के लिए साल 2029 तक का वक्त होगा। हालांकि कांग्रेस पार्टी पीएम मोदी की इस गारंटी पर उन्हें आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि सरकार बहुत चालाकी से वो रिकॉर्ड बनाने की गारंटी देती है जिनका बनना पहले से ही तय है। 

दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने जिस भविष्यवाणी की बात की है, वैसी ही भविष्यवाणी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने दस महीने पहले की थी। लाइव मिंट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने भी पिछले साल अक्टूबर में अनुमान लगाया था कि भारत साल 2027-28 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। IMF के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय फर्म मॉर्गन स्टेनली ने भी पिछले साल अनुमान लगाया था कि साल 2027 तक भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इस समय जापान की अर्थव्यवस्था तीसरे नंबर पर है। पीएम मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की दस10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में सफल रही है। लेकिन इसकी वजह क्या है उस पर एक नजर डाल लेते हैं ? किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के आकार का मानक उस देश की GDP होती है और पिछले नौ सालों में भारत की GDP में तेज उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, कांग्रेस के कार्यकाल में GDP की अधिकतम विकास दर 2010 में 8.5 परर्सेंट दर्ज की गई थी, जबकि कोविड काल में दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं की तरह भारत में भी गिरावट दर्ज की गई। 

भारत की GDP कैसे बढ़ रही है?

 साल 2014 से 2023 के बीच भारत की GDP ग्रोथ में कुल 8.3 परर्सेंट की बढ़त दर्ज की गई है। नौ साल में विकास दर के मामले में चीन की GDP ग्रोथ में 8.4 परर्सेंट की तेजी दर्ज की गई है। वहीं, इन नौ सालों में अमेरिकी GDP ग्रोथ में 5.4 परर्सेंट बढ़त की दर रही। अगर इन तीन अर्थव्यवस्थाओं को छोड़ दिया जाए तो GDP के मामले में शीर्ष दस देशों में शामिल कुछ देशों की GDP में बढ़त की दर कम हुई है या बढ़ी नहीं है। इस दौर में भारत पांच देशों को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इनमें से ब्रिटेन, फ्रांस और रूस की GDP ग्रोथ में बढ़त की दर तीन, दो और एक प्रतिशत रही। वहीं, इटली की GDP बढ़त दर में तेजी नहीं हुई। ब्राजील की GDP ग्रोथ में 1.5 फीसदी की गिरावट देखी गई है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था में जो तेजी देखी जा रही है। वो इन देशों की तुलना में ही दिख रही है तो फिर इन विकसित देशों की अर्थव्यवस्था में विकास की कमी का कारण क्या है। तो इसकी एक वजह साल 2008-09 का वैश्विक आर्थिक संकट है क्योंकि एक तरफ ये आर्थिक संकट पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए नुकसान पहुंचाने वाला रहा। वहीं, भारत पर इस संकट का प्रभाव कम पड़ा। 

अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 

अमेरिका वर्तमान में 25.5 ट्रिलियन डॉलर GDP के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके बाद चीन 18 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरी और जापान 4.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहीं इस लिस्ट में चौथे नंबर पर 3.8 ट्रिलियन डॉलर के साथ जर्मनी बना हुआ है। वहीं भारतीय GDP का आकार 2022 तक ब्रिटेन और फ्रांस की GDP से भी बड़ा हो चुका था। भारत की GDP अभी 3.4 ट्रिलियन डॉलर के साथ 5वें नंबर पर है। अगर भारतीय GDP मौजूदा औसत छह से सात प्रतिशत की दर से बढ़ती रहती है तो साल 2027 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी, क्योंकि इन देशों के लिए छह से सात प्रतिशत की बढ़ोतरी तकरीबन असंभव है। क्योंकि जर्मनी और जापान की विकास दर ढाई और डेढ़ प्रतिशत ही है।

अर्थव्यवस्था के बढ़ने से आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था बढ़ने का मतलब उसकी जीडीपी बढ़ने से है और जीडीपी का मतलब उस देश में एक साल में तैयार किए गए माल और सेवाओं की कुल वैल्यू से है। देश की अर्थव्यवस्था का बढ़ना एक सकारात्मक बात है लेकिन जीडीपी देश के आम नागरिकों की समृद्धि का पैमाना नहीं है, जिस पैमाने से देश के आम लोगों की समृद्धि मापी जाती है उसे प्रति व्यक्ति आय कहा जाता है। प्रति व्यक्ति आय का मतलब है देश की कुल आबादी से जीडीपी को भाग देने पर जो रकम मिलती है वो देश के एक व्यक्ति की एक साल की औसत आय है। इसमें दिहाड़ी मजदूरों, कामकाजी मेल और फीमेल से लेकर अंबानी-अडानी की कमाई सब शामिल है, जिसका ये औसत है, कई लोग इस औसत से ज्यादा कमाते हैं और कई लोग बहुत कम कमाते हैं, इस तरह ये आम आदमी की आर्थिक हालत का संकेत है। 

सबसे कम प्रति व्यक्ति आय भारतीयों की 

भारत ने प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर लंबी छलांग लगाई है। वर्तमान सरकार के 9 सालों में ये लगभग दोगुनी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 2014 में पहली बार शपथ ली थी, तब भारत की प्रति व्यक्ति आय 86,467 रुपए थी, जो अब बढ़कर 1.72 लाख रुपए हो गई है, लेकिन क्या आप जानते हैं, दुनिया की जितनी भी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हैं उनमें सबसे कम प्रति व्यक्ति आय भारतीयों की ही है। अमेरिका की प्रति व्यक्ति इनकम सालाना 80,035 डॉलर है जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय केवल 2601 डॉलर है यानि अमेरिका की प्रति व्यक्ति औसत आय भारत के मुकाबले 31 गुना ज्यादा है। जबकि चीन की प्रति व्यक्ति आय भारत के मुकाबले पांच गुना ज्यादा है। इसी तरह ब्राजील की प्रति व्यक्ति आय भारत से चार गुना, जापान की 14 गुना, फ्रांस की 17 गुना और जर्मनी की 20 गुना ज्यादा है। यानी विकसित देशों के मुकाबले भारत कहीं नहीं ठहरता है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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