ऐसा क्‍या हुआ कि नॉन-वेज खाने के घटे दाम, वेज थाली हो गई महंगी ?

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देश में चल रहे आम चुनाव के बीच महंगाई का तड़का अब वेज थाली पर भी दिखने लगा है यानी अगर आप भी नॉनवेज लवर्स की लिस्ट में हैं तो आपके लिए ये अच्छी खबर होने वाली है। लेकिन वेज खाना खाने वाले लोगों को ये खबर देखने के बाद झटका लग सकता है। क्योंकि प्याज और टमाटर की कीमतों ने वेज थाली के दाम 8 फीसदी तक बढ़ा दिए। वहीं, चिकन के घटे दाम से नॉन वेज थाली 4 फीसदी सस्ती हुई है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिसिस ने रोटी राइस रेट नाम से एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें ये जानकारी मिली है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में एक थाली की कीमत कितनी है? तो आइए हम आपको बताते हैं...

देश में महंगाई अलग ही राह पर चल रही है। वेज खाना महंगा होता जा रहा है तो वहीं, नॉन वेज खाने के रेट घटते जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, घर में बनी वेज थाली, जिसमें रोटी, सब्जी (प्याज, टमाटर और आलू), दाल, चावल, दही और सलाद शामिल है, की कीमत बढ़कर अप्रैल में 27.3 रुपये प्रति थाली हो गई यानी पिछले साल जिस थाली के लिए लोगों को 25.4 रुपये देने पड़ते थे, अब उसी थाली पर 27.3 रुपये खर्च करने होंगे। इस थाली की औसतन कीमत उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में इनपुट कीमतों के आधार पर तय की गई है। हालांकि नॉन वेज थाली 4 फीसदी सस्ती हुई है। अब इसकी कीमत 58.9 से घटकर 56.3 रुपये हो गई है। दरअसल, मासिक आधार पर कीमतों में बदलाव का असर आम आदमी के बजट पर भी पड़ता है। इस डेटा में अनाज, दालें, चिकन, सब्जियां, मसाले, तेल और रसोई गैस में बदलाव भी शामिल हैं। क्रिसिल के चेयरमैन पूशन शर्मा का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में हरी सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं।

 वेज थाली महंगी क्यों हुई ?

तो दाल, आलू और प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों के स्वाद पर असर डाला है। इस बार प्याज की फसल भी मौसम की मार का शिकार हो गई। उत्पादन कम हुआ तो इसका सीधा असर बाजार पर दिखने लगा और इस साल फरवरी में कीमतें अचानक 40 फीसदी तक बढ़ गईं। पिछले दो दिनों में भी इसकी कीमतों में 3 से 4 रुपये का इजाफा हुआ है। पिछले साल के मुकाबले में प्याज में 41 प्रतिशत और टमाटर में 40 प्रतिशत का उछाल आया है, जिसकी वजह से वेज थाली की कीमतें बढ़ी हैं। यही बात आलू के साथ भी हुई, पैदावार कम हुआ तो इसका असर बाजार पर भी पड़ा और इसकी कीमत बढ़कर दिल्ली में 30 रुपये किलो हो गई है। पिछले साल के मुकाबले में इस साल आलू में 38 प्रतिशत का उछाल आया है। प्रोटीन और कई विटामिन का अच्छा स्रोत कही जाने वाली दाल की कीमत लगातार आसमान छू रही है। दिल्ली में अरहर दाल की कीमत इस महीने करीब 14 रुपये बढ़कर 170 रुपये किलो तक पहुंच गई है। चावल में 14 प्रतिशत और दालों में 20 प्रतिशत की तेजी आई है। हालांकि इस समय चुनाव हो रहे हैं तो सरकार ने अपना चुनावी वादा पूरा करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर चावल खरीदा। इसके अलावा इस साल चावल के पैदावार में 4 फीसदी की कमी आई है। कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह ये भी है।  

नॉन-वेज थाली की कीमत

नॉन-वेज थाली के लिए, दाल से जुड़े सभी इंग्रीडिएंट्स को चिकन के इंग्रीडिएंट्स से बदल दिया गया है। अप्रैल में इसकी कीमत गिरकर 56.3 रुपये पर आ गई, जबकि एक साल पहले 58.9 रुपये थी। मार्च में नॉनवेज थाली की कीमत 54.9 रुपये थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चिकन की कीमतों में 12 फीसदी की गिरावट आई है। नॉनवेज थाली में चिकन 50 फीसदी का कंट्रीब्यूशन रखता है। सालाना आधार पर नॉनवेज थाली की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। मार्च की तुलना में नॉनवेज थाली की कीमत में 3 फीसदी का इजाफा हुआ है। चिकन की कीमत बढ़ने और इनपुट कॉस्ट बढ़ने से थाली की कीमतों में उछाल आया है।  

बर्ड फ्लू की वजह से चिकन खरीदना हुआ था कम 

दरअसल, फरवरी 2024 में मुर्गियों में बर्ड फ्लू जैसी बीमारी फैलने की वजह से लोगों ने चिकन खरीदना कम कर दिया था। जिससे इसके दामों में 12 फीसदी तक की कमी आ गई। इसी वजह से इन थालियों की कीमत कम हो गई। हालांकि इसका असर दक्षिण भारत के राज्यों में ज्यादा पड़ा। जहां 190 रुपये किलो बिकने वाला चिकन 100 रुपये किलो पर आ गया। हालांकि, मार्च महीने में जब डिमांड बढ़ी तो इसकी कीमतें 3 फीसदी तक बढ़ गईं। 

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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