कमलनाथ से हार के बाद बीजेपी प्रत्याशी विवेक बंटी साहू अब नकुलनाथ को दे पाएंगे टक्कर?

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कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व सीएम कमलनाथ छिंदवाड़ा से 9 बार चुनाव जीते। फिलहाल कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ यहां से सांसद हैं। वहीं बीजेपी ने कमलनाथ के सामने दो बार विधानसभा चुनाव हार चुके विवेक बंटी साहू को फिर मौका देकर नया गेम खेला है।

देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में इस बार बीजेपी ने कांग्रेस और कमलनाथ (Kamalnath) के गढ़ छिंदवाड़ा (Chhindwara) को छीनने की पूरी तैयारी कर ली है। साल 2019 में एमपी की 29 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने 28 सीटें जीती थीं, लेकिन छिंदवाड़ा में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। इस सीट पर कई सालों से कांग्रेस का कब्ज़ा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व सीएम कमलनाथ यहां से 9 बार चुनाव जीते। फिलहाल कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ यहां से सांसद हैं। वहीं बीजेपी ने कमलनाथ के सामने दो बार विधानसभा चुनाव हार चुके विवेक बंटी साहू (Vivek Bunty Sahu) को फिर मौका देकर नया गेम खेला है। छिंदवाड़ा ऐसी लोकसभा सीट है, जिसे कांग्रेस किसी कीमत पर हाथ से नहीं जाने देना चाहेगी। तो वहीं बीजेपी इसे जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगा रही है। 

फरवरी में ये चर्चा चल रही थी कि कमलनाथ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं और ऐसे में नकुलनाथ बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि कांग्रेस में कमलनाथ को लेकर संशय के बादल तो छंट गए हैं, लेकिन तीन महीने पहले राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत से बीजेपी के हौसले बुलंद हैं। बीजेपी को भरोसा है कि पीएम मोदी का जादू और रामलला के मंदिर का लोगों में उत्साह चुनावी राह आसान कर रहा है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस साल 1951 के पहले चुनाव से ही छिंदवाड़ा सीट जीतती आई है। छिंदवाड़ा में कमलनाथ 1980 से 2014 तक नौ बार सांसद रहे। सिर्फ अपवाद स्वरूप साल 1997 का उपचुनाव छोड़कर कांग्रेस यहां से कभी नहीं हारी है। आपातकाल के दौरान जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ लहर थी, तब भी छिंदवाड़ा की जनता ने कांग्रेस का हाथ नहीं छोड़ा। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में देश में मोदी लहर थी, जिसमें बीजेपी ने मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 27 सीटें जीतीं, लेकिन छिंदवाड़ा सीट पर कमल नाथ की जीत हुई। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पूरे एमपी में एक मात्र सिर्फ छिंदवाड़ा सीट में जीत मिली। उनके बेटे नकुलनाथ यहां से चुनाव लड़ते हैं और जनता उन्हें भी जीत का सेहरा पहनाती है।

कमलनाथ का सियासी सफर

छिंदवाड़ा में 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2019 में कांग्रेस का वोट शेयर 3.48 पर्सेट घटा था, जबकि बीजेपी का वोट शेयर 4 पर्सेट बढ़ा। 2014 में कांग्रेस नेता कमलनाथ ने चंद्रभान सिंह को 1 लाख 16 हजार 537 वोटों से हराया था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का ये मार्जिन 37 हजार 536 ही रह गया था। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को 5 लाख 87 हजार 305 वोट मिले थे। जबकि बीजेपी कैंडिडेट नत्थन शाह को 5 लाख 49 हजार 769 वोट मिले थे। ये स्थिति तब थी, जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी। इस गणित के चलते बीजेपी हाईकमान को उम्मीद है कि इस बार सफलता जरूर मिल सकती है।

छिंदवाड़ा सीट पर जातीय समीकरण

दरअसल, छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर अनुसूचित जाति वर्ग के वोटर्स की संख्या करीब 1 लाख सड़सठ हजार 085 है, जो 2011 की जनगणना के मुताबिक, लगभग 11 पर्सेट है। वहीं अनुसूचित जनजाति वर्ग के वोटर्स की संख्या करीब 5 लाख 44 हजार 907 है, जो 2011 की जनगणना के मुताबिक, करीब 36 पर्सेंट है। भले ही हर लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बढ़त बनाई हो, लेकिन हाल ही में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने छिंदवाड़ा जिले की कुल 7 विधानसभा सीटें जीती थीं। पार्टी की हर रणनीति पर कमल नाथ भारी पड़े थे। ये भी एक बड़ी वजह है कि अब तक बीजेपी की पहली लिस्ट में छिंदवाड़ा सीट से प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं होने को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ देश के सबसे अमीर सांसद हैं। उनके पास 660 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है। वहीं, उनके पिता कमलनाथ के पास 134 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

बीजेपी की नजर छिंदवाड़ा सीट पर

2019 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी हाईकमान की खास नजर छिंदवाड़ा सीट पर रही है। यही वजह है कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को छिंदवाड़ा का प्रभारी बनाया गया था। इन पांच सालों में बीजेपी ने कार्यकर्ताओं से लेकर बूथ सशक्तिकरण और संगठन विस्तार समेत जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत किया। गिरिराज सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी छिंदवाड़ा के दौरे किए। हालांकि, इन कोशिशों के बावजूद बीजेपी विधानसभा चुनाव में बेहतर नतीजे नहीं दे पाई। बीजेपी ने विवेक बंटी साहू के मार्फत कांग्रेस को मैसेज भी दिया है कि नाथ परिवार का मुकाबला बीजेपी का जमीनी कार्यकर्ता भी कर सकता है। विवेक 2019 में विधानसभा उप चुनाव में छिंदवाड़ा सीट पर कमलनाथ के सामने तब लड़े थे। जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे। उन्होंने उपचुनाव में हारकर भी बेहतर प्रदर्शन किया। हार का अंतर 25,837 वोट था। 2023 के विधानसभा चुनाव में विवेक फिर कमलनाथ के सामने थे। इस बार 36,594 वोट से हारे। कमलनाथ को भी इतने कम वोट से जीत की उम्मीद नहीं थी।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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