Lok Sabha Election : उत्तर प्रदेश का कौन बाहुबली किस खेमे में है?

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यूपी की सियासत में मजबूत प्रभाव रखने वाले धनंजय सिंह बीजेपी के सपोर्ट में आ गए हैं तो राजा भैया न्यूट्रल हो गए हैं।

लोकसभा चुनाव के चार चरणों की वोटिंग पूरी होने के साथ ही उत्तर प्रदेश में अब चुनावी कारवां अवध और पूर्वांचल की सियासी रणभूमि की तरफ बढ़ चला है। इन इलाकों की सीटों पर क्षत्रिय बिरादरी अहम भूमिका निभाता है, जिसके चलते बीजेपी हाईकमान अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। ताकि पश्चिमी यूपी वाली कमी पूर्वांचल और अवध में न रह जाए, लेकिन इस बीच यूपी की सियासत में मजबूत प्रभाव रखने वाले धनंजय सिंह बीजेपी के सपोर्ट में आ गए हैं तो राजा भैया न्यूट्रल हो गए हैं। ऐसे में बात इसे लेकर भी हो रही है कि यूपी का कौन बाहुबली किस खेमे में है?  

देश में 543 लोकसभा सीट हैं और यूपी में सबसे ज्यादा 80 सीट हैं, इस लिहाज से किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश सबसे अहम हो जाता है। इस बार के चुनाव में बीजेपी ने मिशन-80 का टारगेट यूपी में सेट किया है, लेकिन टिकट बंटवारे के चलते ठाकुर समाज की नाराजगी पार्टी के लिए बढ़ गई है। पश्चिमी यूपी में कई जगहों पर ठाकुरों ने महापंचायतें करके बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और सहारनपुर के ननौत गांव, मेरठ के कपसेड़ा, गाजियाबाद के धौलाना और नोएडा के जेवर में ठाकुरों की पंचायतें हुईं थी। ऐसे में ठाकुर समुदाय की नाराजगी ने बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ा दी है। इसलिए बीजेपी नेता अपनी रणनीति पर काम करते हुए ठाकुर समुदाय को मैनेज करने में जुट गए हैं। 

ठाकुर वोटर्स बीजेपी से नाराज !

यही वजह है कि पूर्व सांसद और बाहुबली धनंजय सिंह ने बीजेपी के समर्थन का ऐलान कर दिया है। ठाकुर वोटर्स जो बीजेपी से नाराज चल रहे थे। अब उन्हें मनाने की जिम्मेदारी खुद ठाकुर बिरादरी से आने वाले धनंजय सिंह के कंधों पर है। धनंजय सिंह के खुले तौर पर साथ आ जाने से जौनपुर में बीजेपी उम्मीदवार कृपाशंकर सिंह की राह अब और आसान हो गई है। जौनपुर में 2 लाख से ज्यादा ठाकुर वोटर हैं। धनंजय सिंह का रिश्ता वाराणसी में बृजेश सिंह से लेकर मिर्जापुर में विनीत सिंह और कुंडा में रघुराज प्रताप सिंह जैसे ठाकुर बाहुबलियों के साथ रहा है। पूर्वांचल में इन ठाकुर बाहुबली की तूती बोलती है। खासकर ठाकुर वोटरों में इन बाहुबलियों को अच्छी पकड़ रही है। जौनपुर सीट से लेकर प्रतापगढ़, गाजीपुर, बलिया, अयोध्या, भदोही, चंदौली, मछलीशहर, घोसी, सोनभद्र और वाराणसी जैसी सीटों पर ठाकुर मतदाता ठीक-ठाक हैं।

राजा भैया

अब बात प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की करें तो उन्होंने बीजेपी को मायूस कर दिया है। राजा भैया ने ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में किसी भी दल का समर्थन नहीं करेगी। पिछले दिनों राजा भैया की गृह मंत्री अमित शाह से बेंगलुरु में हुई मुलाकात के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि वो बीजेपी को सपोर्ट कर सकते हैं। लेकिन राजा भैया ने अब अपने प्रभाव वाली सीटों पर योग्य उम्मीदवार को वोट करने की अपील कर दी है। राजा भैया के ना की वजह से बीजेपी को कौशांबी और प्रतापगढ़ की लोकसभा सीट पर कड़ी टक्कर मिलेगी। जबकि बीजेपी इसी उम्मीद में थी कि अगर राजा भैया उनके साथ आ जाते हैं तो उनकी राह आसान तो होगी ही साथ में बीजेपी को लेकर ठाकुरों के बीच में जो नाराजगी है काफी हद तक उससे भी पार पाया जा सकता है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। राजा भैया यूपी में ठाकुर समुदाय के बड़े नेता के तौर पर जाने जाते हैं और उनकी पकड़ न सिर्फ प्रतापगढ़ सीट बल्कि सुल्तानपुर से लेकर अमेठी, रायबरेली, अयोध्या, प्रयागराज और कौशांबी इलाके तक है। 

बृजेश सिंह

वहीं, पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने खुलकर किसी के समर्थन या विरोध का ऐलान नहीं किया है। लेकिन, एनडीए के साथ उनकी करीबी भी समय-समय पर दिखती रही है। बृजेश के एनडीए के घटक सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के टिकट पर गाजीपुर सीट से चुनाव लड़ने की भी चर्चा थी। चंदौली के सैयदराजा से बीजेपी विधायक सुशील सिंह भी रिश्ते में बृजेश के भतीजे लगते हैं।   

बृजभूषण शरण सिंह 

उत्तर प्रदेश में अगर बीजेपी ने सबसे देर में किसी लोकसभा सीट पर टिकट का ऐलान किया तो वो थी बृजभूषण शरण सिंह की कैसरगंज सीट। बृजभूषण शरण सिंह दबंग नेता हैं। महिला पहलवानों के आरोप में फंसे बृजभूषण की गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, अयोध्या इलाके की राजनीति में तूती बोलती है। विजय रूपाला के बयान को आधार बनाकर ठाकुरों ने प्रेशर पॉलिटिक्स बनाने का दांव चला, जिसका असर ये हुआ कि बीजेपी ने बृजभूषण शरण का टिकट तो काट दिया, लेकिन ठाकुर वोटों के चलते उसने बीच का रास्ता निकाला और उनके बेटे करण बृजभूषण सिंह को टिकट दे दिया। बृजभूषण सिंह का एक बेटा विधायक है और अब दूसरा बेटा लोकसभा चुनाव मैदान में है। बीजेपी ने उनके जरिए अवध के साथ-साथ पूर्वांचल के इलाके में ठाकुरों को जोड़ने का दांव चला है।

दिनेश प्रताप सिंह 

वहीं, गांधी परिवार का गढ़ और देश की हाई प्रोफाइल मानी जाने वाली रायबरेली लोकसभा सीट पर बीजेपी ने राहुल गांधी के खिलाफ ठाकुर समुदाय से आने वाले दिनेश प्रताप सिंह को मैदान में उतारा है। दिनेश प्रताप सिंह फिलहाल योगी सरकार में मंत्री हैं।  

राज किशोर सिंह 

मुलायम सिंह यादव के करीबी और पूर्वांचल के बाहुबली पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं। राज किशोर सिंह ने हाल ही में अमित शाह की मौजूदगी में अपने भाई पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बृज किशोर सिंह डिंपल के साथ बीजेपी की सदस्यता ले ली। ख़ास तौर पर क्षत्रिय वोटरों पर प्रभाव की वजह से इसे बीजेपी की रणनीतिक पहल माना जा रहा है। राज किशोर सिंह बीजेपी में शामिल को लेकर कहा जाता है कि उनका बस्ती और आसपास की सीटों पर अच्छा प्रभाव है। 

अभय सिंह

वहीं एसपी विधायक होकर बीजेपी खेमे में आ गए अभय सिंह अपने ननिहाल जौनपुर में बीजेपी प्रत्याशी कृपा शंकर सिंह के लिए प्रचार में जुटे हुए हैं। उनकी अपने समाज में अच्छी पैठ मानी जाती है। कभी एक साथ छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले अभय सिंह और धनंजय सिंह कभी एक ही सिक्के के दो पहलू थे, लेकिन आज नदी के दो अलग-अलग किनारे हैं। 90 के दशक में अभय सिंह और धनंजय सिंह दोस्त से दुश्मन बन गए।

बीजेपी ने यूपी से कितने ठाकुर उतारे

बता दें कि यूपी में करीब 7 फीसदी ठाकुरों की आबादी है। ऐसे में प्रदेश में बीजेपी 75 और उसके सहयोगी दल 5 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी ने अपने कोटे की सीटों में 17 प्रतिशत ठाकुर प्रत्याशी दिए हैं। राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 20 सीट पर ठाकुर समाज का खासा प्रभाव है। राज्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी ठाकुर समुदाय से आते हैं। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में 63 राजपूत विधायक जीतने में सफल रहे, जबकि 2022 में 49 ठाकुर विधायक बने। सूबे में ठाकुर वोटों की सियासत को देखते हुए बीजेपी ने राजा भैया से लेकर बृजभूषण शरण सिंह और अब धनंजय सिंह से डील की है। बीजेपी जानती है कि अवध और पूर्वांचल में ठाकुर वोटर निर्णायक हैं, जिसके चलते हर संभव कोशिश की जा रही है।   

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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