अयोध्या की फैजाबाद सीट पर बीजेपी की हार ने सबको चौंका दिया, आखिर क्यों हारी बीजेपी?

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लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण का चुनाव प्रचार खत्म होने के कुछ घंटे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव फैजाबाद लोकसभा सीट पर पार्टी के प्रत्याशी अवधेश प्रसाद के समर्थन में जनसभा करने पहुंचे थे। इस दौरान अवधेश प्रसाद का परिचय देते हुए अखिलेश ने उन्हें पूर्व विधायक कह दिया। तभी अवधेश प्रसाद ने कहा पूर्व नहीं वर्तमान विधायक हूं। इस पर अखिलेश यादव ने कहा, आप अब सांसद बनने जा रहे हो, इसलिए पूर्व विधायक कहा. उस समय ये बात सुनकर मंच पर मौजूद नेता मुस्कुराने लगे और युवा नारेबाजी करने लगे थे. नारेबाजी को रोकते हुए अखिलेश ने कहा कि अब सांसद बनाने की जिम्मेदारी आपकी है, जुबान खाली मत जाने देना.


4 जून को जब चुनाव का रिजल्ट आया तो अखिलेश यादव की बात सच साबित हुई और फैजाबाद लोकसभा सीट पर सपा के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने बीजेपी प्रत्याशी लल्लू सिंह को 54 हजार पांच सौ 67 वोटों से हरा दिया. सिर्फ फैजाबाद लोकसभा ही नहीं बल्कि पूरे अयोध्या मंडल की पांच सीटों में से किसी एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई. अयोध्या मंडल में फैजाबाद के अलावा अंबेडकरनगर में बीजेपी को 4 लाख 7 हजार 712 वोट मिले, जबकि इंडिया गठबंधन को 5 लाख 44 हजार 959 वोट ही हासिल हुए. इसी तरह अमेठी में बीजेपी को 3 लाख 72 हजार 32 वोट मिले, जबकि इंडिया गठबंधन को 5 लाख 39 हजार 228 वोट मिले. सुलतानपुर में बीजेपी को 4 लाख 1हजार 156 वोट हासिल हुए. जबकि गठबंधन को 4 लाख 44 हजार 330 वोट मिले. इसके साथ ही बाराबंकी में भी बीजेपी को 5 लाख 4 हजार 223 वोट और इंडिया गठबंधन को 7 लाख 19 हजार 927 वोट हासिल हुए.


बीजेपी ने राममंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और निर्माण को जिस तरह से जनता से बीच उठाया, उसका फायदा उसे नहीं मिला। राममंदिर के इर्द-गिर्द की सभी लोकसभा सीटें बीजेपी हार गई। अयोध्या मंडल में उसका रिपोर्ट कार्ड जीरो रहा। इतना ही नहीं साल 2019 के चुनाव में बीजेपी ने मध्य यूपी की 24 में से 22 सीटें जीती थीं। लेकिन, इस बार उसे इस क्षेत्र में 13 सीटों का नुकसान हुआ। वहीं, कांग्रेस को 3 और सपा को 11 सीटों का फायदा हुआ।


सियासी जानकारों का मानना है कि फैजाबाद सीट पर बीजेपी के लल्लू सिंह के हार की बड़ी वजह उनका संविधान बदलने वाला बयान भी रहा, क्योंकि इससे एससी और ओबीसी वोटर्स उनसे नाराज़ हो गया. जिसके चलते सपा का पीडीए दांव बीजेपी पर भारी पड़ गया.


फैजाबाद लोकसभा सीट के इतिहास में ये दूसरा मौका है, जब सपा को इस सीट पर जीत मिली है. अवधेश से पहले साल 1998 में फैजाबाद के दिग्गज नेता रहे मित्रसेन यादव ने सपा के सिम्बल पर जीत हासिल की थी. अवधेश प्रसाद को पांच लाख 54 हजार 289 वोट और बीजेपी के लल्लू सिंह को चार लाख 99 हजार 722 वोट मिले थे. अवधेश प्रसाद छह बार राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं. उनकी गिनती सपा के अनुभवी नेताओं में होती है. चुनाव के दौरान सपा का एक नारा खूब चर्चा में रहा, 'मथुरा न काशी, अबकी बार अवधेश पासी.' इस नारे के बदौलत सपा ने एक साथ कई समीकरण साधे. इसने पूरी चुनावी बाजी ही पलट कर रख दी.
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ये नारा फैजाबाद लोकसभा सीट पर मौजूद दलित बिरादरी को छू गया. अवधेश प्रसाद पासी बिरादरी से आते हैं और इस लोकसभा सीट पर लगभग 3.5 लाख वोटर्स पासी हैं. जो पिछले कई चुनाव से बीजेपी के पक्ष में वोट करते रहे हैं.


जानकारों का ये भी मानना है कि राम मंदिर तक जाने वाली सड़कों के चौड़ीकरण के काम के दौरान, कई स्थानीय लोगों के मकान और दुकानें तोड़ी गई और तब स्थानीय लोगों से वादा किया गया था कि उन्हें दुकानें आवंटित की जाएंगी पर ऐसा नहीं हुआ. जिसके चलते उनकी जीविका प्रभावित हुई. राम मंदिर की भव्यता ने बाहरी लोगों को प्रभावित किया है, लेकिन शहर के निवासी यहां होने वाली असुविधा से नाखुश थे.


ये सारी छोटी-बड़ी नाराजगी एक साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ एक बड़ा वोट बैंक बनकर उभरीं और चुनावी बाजी पलटकर 25 साल बाद सपा को फैजाबाद लोकसभा सीट पर जीत दिलाई.

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