दुनिया के सबसे महंगे लोकसभा चुनाव के लिए तैयार देश

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चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के खर्च की तो एक लिमिट तय कर रखी है, लेकिन पार्टियों पर कोई पाबंदी नहीं है। यही वजह है कि 18वां लोकसभा चुनाव देश और दुनिया का सबसे महंगा चुनाव बनने की राह पर है।

देश में चुनाव का मौसम गुलजार हो गया है। अब चुनाव हैं तो नेताजी गली-गली घूमेंगे ही और हर वोटर पर हर पार्टी की नजर रहेगी। गली- मोहल्ले, चौक-चौराहे बैनर, पोस्टर और बड़े-बड़े होर्डिंग्स से पट गए हैं। वोटर्स को लुभाने के लिए छोटे- बड़े पर्दे के सितारों को भी चुनाव प्रचार के लिए बुलाया जाता है। चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक पार्टियां और उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहाते हैं। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के खर्च की तो एक लिमिट तय कर रखी है, लेकिन पार्टियों पर कोई पाबंदी नहीं है। यही वजह है कि 18वां लोकसभा चुनाव देश और दुनिया का सबसे महंगा चुनाव बनने की राह पर है। देश में राजनीतिक खर्च पर नजर रखने वाले सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज का अनुमान है कि इस बार आम चुनाव में 1.20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। अमेरिका में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए। आइए समझते आखिर कैसे ये दुनिया का अब तक का सबसे महंगा चुनाव होने जा रहा है। 

हर पांच साल में चुनावी खर्च दोगुना होता जा रहा है। साल 2019 के आम चुनाव में घोषित-अघोषित मिलाकर 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जबकि, इससे पहले 2014 में लगभग 30 हजार करोड़ के खर्च की बात कही जाती है। हैरानी की बात ये है कि चुनाव आयोग ने एक उम्मीदवार के लिए अधिकतम खर्च सीमा 95 लाख रुपये तय की है। जबकि एक कैंडिडेट का 20 दिन के प्रचार अभियान का औसत खर्च करीब 6 करोड़ रुपये है यानी बाकी पैसा राजनीतिक दलों या अज्ञात स्रोतों से खर्च किया जाता है। इस बार एक लोकसभा सीट पर 220 करोड़ रुपये खर्च होंगे। देश में 97 करोड़ वोटर हैं यानी प्रति वोटर करीब 1240 रुपये खर्च होंगे।

साल 2019 में किसका कितना खर्च

प्रत्याशी   40 प्रतिशत

पार्टी     35 प्रतिशत

सरकार   15 प्रतिशत

मीडिया/प्रायोजक    5 प्रतिशत

अन्य  5 प्रतिशत

कुल  60 हजार करोड़ रुपये

विज्ञापन और प्रमोशन पर सबसे ज्यादा खर्च

पार्टियों के सालाना ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-2020 के दौरान बीजेपी ने प्रचार पर 2000 करोड़ रुपये खर्च किए। ये पार्टी के कुल चुनाव खर्च का 54.87 प्रतिशत था। बीजेपी का यात्रा खर्च 15.29 प्रतिशत और उम्मीदवारों को वित्तीय मदद 11.25 प्रतिशत रही। मोर्चा, रैली और आंदोलनों पर लगभग 260 (7.2 प्रतिशत) करोड़ रुपये खर्च किये गये। कांग्रेस ने 560 करोड़ रुपये यानी करीब 40.08 प्रतिशत) खर्च किये। वहीं, कांग्रेस ने यात्राओं पर 250 करोड़ रुपये (17.47 प्रतिशत) खर्च किए।

मद                      संख्या/लोग     रोज खर्च                 कुल खर्च

कार                     5                    5 हजार                    5 लाख

ऑफिस                5                    10 हजार                  10 लाख

पर्ची बांटना            3 हजार           1 हजार  (5 दिन)       1.5 करोड़

बस                      200                10 हजार (4 दिन)       80 लाख

खाना                   200                 250                         10 लाख

माइक-मंच            -                    1 लाख                      20 लाख

बूथ पर टेबल        15 हजार          2 हजार रुपये /टेबल    3 करोड़

विमान और हेलिकॉप्टर पर भी बढ़ेगा खर्च

पिछले चुनाव के मुकाबले में विशेष विमानों और हेलीकॉप्टरों की मांग 40 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। विशेष विमान का किराया 4.5 लाख रुपये से 5.25 लाख रुपये/घंटा तक हो सकता है। जबकि हेलीकॉप्टर के लिए ये 1.5 लाख रुपये/घंटे होगा। 2019-20 के ऑडिट के मुताबिक, सत्तारूढ़ बीजेपी ने इन पर 250 करोड़ रुपये खर्च से ज्यादा खर्च कर दिया था।

नेताओं की गतिविधियों पर नजरें

लोकसभा चुनाव के दौरान अगर किसी के पास 50 हजार रुपये से ज्यादा का कैश मिलता है तो उसका स्रोत और मकसद बताना होता है। स्रोत या उद्देश्य नहीं बताने पर राशि जब्त की जा सकती है। इतना ही नहीं, अगर किसी व्यक्ति के पास 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा की रकम मिलती है तो इसकी सूचना तुरंत आयकर विभाग को दी जाती है। 10 हजार रुपये से अधिक कीमत के पोस्टर, चुनाव सामग्री, ड्रग्स, शराब, हथियार या गिफ्ट मिलते हैं, जिनका इस्तेमाल प्रलोभन देने के लिए किया जा सकता है। इन्हें जब्त भी किया जा सकता है। अभी तक 2 लाख रुपये तक की रकम लेकर चलने पर उसके कागजात, बैंक रिकॉर्ड या रुपये के लेनदेन का ब्योरा साथ लेकर चलना पड़ता था, लेकिन अब इस रकम का दायरा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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