KCR के सामने सरकार बचाने की चुनौती, जानें Telangana में क्या है चुनावी रणनीति!

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तेलंगाना में 30 नवंबर को वोटिंग होनी है। ऐसे में सियासी हलचल भी तेज है। प्रदेश में भारत राष्ट्र समिति (BRS), कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला है। जहां मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव (K.Chandrashekhar Rao) की नजर जीत की हैट्रिक पर है। वहीं, बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की लोकप्रियता का फायदा उठाया है। इस बीच, कांग्रेस वोटर्स के कुछ वर्गों में सत्ता विरोधी भावना और बीआरएस से अल्पसंख्यक वोटों के संभावित बदलाव को भुनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आइए विस्तार से समझते हैं इस बार 2018 के मुकाबले समीकरण कितने अलग हैं? 

तेलंगाना चुनाव (Telangana Elections) में बीआरएस के सामने सरकार बचाने की चुनौती होगी। वहीं, राज्य की सत्ता में काबिज होने के लिए बीजेपी और कांग्रेस जोर-अजमाइश लगा रहे हैं। बीआरएस ने 119 सदस्यीय तेलंगाना विधानसभा की 115 सीटों के लिए 114 नामों की घोषणा की थी। दरअसल, मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव कामारेड्डी और गजवेल दोनों विधानसभा क्षेत्रों से अपनी किस्मत आजमाएंगे। जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 55 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है और बीजेपी, टीडीपी समेत एआईएमआईएम ने अभी तक कोई लिस्ट जारी नहीं की है। आने वाले दिनों में तेलंगाना में नेताओं के दलबदल की संभावना ज्यादा है, खासकर उन उम्मीदवारों के बीच जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। मौजूदा समय में तेलंगाना के सियासी समीकरण की बात करें तो बीआरएस के 101, AIMIM के सात, कांग्रेस के पांच, बीजेपी के तीन और अन्य तीन हैं। 

BRS, कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला

वहीं राज्य में सत्ता से दूर रही कांग्रेस ने अपनी सियासी पिच को मजबूत करने की पूरी फील्डिंग सजाई है तो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी भी सियासी मैदान में ताल ठोक कर बीजेपी को बढ़त दिलाने की पूरी तैयारी में लगे हैं। इन सभी सियासी समीकरणों के बीच एआईएमआईएम के चीफ ओवैसी की भी राज्य में मजबूत पकड़ सियासत को एक नए नजरिए से देखने का बड़ा आयाम भी दे रही है। सियासी जानकारों का कहना है कि बीजेपी ने अगर राज्य में हिंदुत्व की पिच पर मजबूत बैटिंग करने के लिहाज से फील्डिंग सजाई है तो इसका फायदा ओवैसी मजबूती से राज्य में लेने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस वक्त ओवैसी की पार्टी लगातार राज्य में अपनी सियासी जमीन को अपने ही राजनीतिक एजेंडे से मजबूत करने की कोशिश में बनी हुई है।

मुख्यमंत्री पद के चेहरे कौन हैं?

राज्य की राजनीति को समझने के लिए वहां के जातीय समीकरण को भी जानना बेहद जरूरी होता है। तो यहां की सियासी धुरी रेड्डी और दलित-आदिवासी समाजों के इर्द-गिर्द घूमती है। राज्य की आबादी में दलित 15 प्रतिशत, आदिवासी नौ प्रतिशत और सामाजिक रूप से प्रभावशाली रेड्डी की आबादी करीब सात प्रतिशत है। राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव. के चेहरे के साथ इस बार भी बीआरएस चुनाव में जाएगी। जबकि बीजेपी के रुख की बात करें तो वो इस चुनाव में सामूहिक नेतृत्व के जरिए जनता के सामने जा रही है। वहीं, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री पद की रेस में कई चेहरों की चर्चा है। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी, सांसद कैप्टन एन उत्तमकुमार रेड्डी और कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी, खम्मम जिले से तीन बार के विधायक मल्लू भट्टी विक्रमार्क और आदिवासी नेता सीताक्का शामिल हैं। मैदान में पांच उम्मीदवारों के साथ, तीन रेड्डी, दलित नेता भट्टी और आदिवासी नेता सीताक्का कांग्रेस के लिए बहुत सारे विकल्प हैं। 

कांग्रेस को बढ़त मिलती नजर आ रही

सी-वोटर पोल के मुताबिक इस साल तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी बढ़त मिलती नजर आ रही है। कांग्रेस को 48 से 60 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। वहीं, बीआरएस के खाते में 43 से 55 सीटें आने की संभावना जताई गई है। जबकि बीजेपी और अन्य को 5 से 11 सीटें मिल सकती हैं।

चुनाव के बड़े मुद्दे क्या हैं?

राज्य में बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे केसीआर सरकार के लिए मुसीबत बन सकते हैं। भर्तियों के मुद्दे पर बेरोजगार आए दिन प्रदेश में विरोध प्रदर्शन करते रहे। पिछले विधानसभा चुनाव में बेरोजगारों को भत्ता देने का ऐलान किया गया था। जिसको लागू नहीं करने से युवाओं में नाराजगी है। हालांकि, युवाओं को लुभाने के लिए बीआरएस ने विद्यार्थी और युवजन जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। मंत्री केटीआर रामाराव का दावा है कि राज्य सरकार ने दो लाख युवाओं को नौकरी दी हैं। इस चुनाव में राज्य में महिलाओं, आदिवासियों और किसानों से जुड़े मुद्दे भी हैं। विपक्षी दल जहां इन मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं सरकार का दावा है कि उसने सभी वर्गों के लिए काम किया है।

हाल ही में तेलंगाना दौरे पर आए पीएम मोदी ने बीआरएस पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए कहा था कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रजा का महत्व होना चाहिए, परिवारवादियों का नहीं और इन्होंने तो लोकतंत्र को लूट-तंत्र बना दिया है, प्रजातंत्र को परिवार-तंत्र बना दिया है। कर्नाटक की तरह तेलंगाना में भी कांग्रेस महिला वोटर्स को साधने के लिए गारंटी की बात कर रही है। लेकिन ये बात तय है कि इस साल होने वाला विधानसभा का चुनाव केसीआर के लिए बिल्कुल आसान होगा ये कहना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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