तमिलनाडु में AIADMK दोबारा उबर पाएगी?

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तमिलनाडु में बिना MGR और जयललिता जैसी करिश्माई लीडरशिप के AIADMK दोबारा उबर पाएगी ?

दुष्यंत कुमार ने लिखा है कि

कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए

कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए

 

2024 के चुनाव में सियासी पार्टियों ने खूब बड़े बड़े वादे किए। जोर शोर से चुनाव लड़ा]लेकिन जब नतीजे आए तो कुछ तख्तनशीं हुए तो कुछ नेस्तानाबूद।

नतीजों ने कुछ क्षेत्रीय पार्टियों को किंग मेकर बना दिया तो कुछ क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन इस तरह का रहा कि वो सियासी तौर पर खत्म हो गए। इन दलों में नेशनल पार्टी का दर्जा रखने वाली बीएसपीबीजू जनता दल और एआईएडीएमके मुख्य हैं। जोकि लोकसभा में एक भी सीट जीतने में नाकामयाब रही। 52 साल पुरानी तमिलनाडु की पार्टी एआईएडीएमके का भविष्य अब अधर में नजर आ रहा है। उसे कहीं कोई उम्मीद है तो सिर्फ 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से। हालाकि आम चुनाव ने तमिलनाडु में भाजपा के लिए रास्ते खोल दिए हैं। भले ही बीजेपी को तमिलनाडु में एक भी सीट न मिली हो लेकिन वोट शेयर के मामले में वह तीसरे नंबर पर है। लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं AIADMK की। जिसे एमजीआर ने बनाया। फिर जयललिता ने दक्षिण में बड़ी ताकत बनाया। इस आम चुनाव में गारंटी शब्द का इस्तेमाल खूब हुआ]लेकिन राजनीति में गारंटी देने की शुरुआत एक तरह से एआईएडीएमके ने ही की थी।  

 

 गठबंधन टूटा बीजेपी को मौका 

आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनैत्र कड़गम यानि एआईएडीएमके 2024 के आम चुनाव से पहले बीजेपी के साथ थी]लेकिन सितंबर 2023 को तमिलनाडु में बीजेपी के उभार और उसके प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई के कुछ बयानों को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए एआईएडीएमके ने गठबंधन खत्म करने का फैसला किया। 4 मई को जब नतीजे आए तो तमिलनाडु की 39 सीटों में से एआईएडीएमके को एक भी सीट हासिल नहीं मिली। जबकि 10 साल पहले 2014 के आम चुनाव में अन्नाद्रमुक ने 39 में से 37 सीटें जीत कर बाकी सभी पार्टियों को किनारे कर दिया था।

लेकिन इन 10 सालों में ऐसा क्या कुछ हुआ कि दक्षिण की सबसे मजबूत पार्टी को 2024 के चुनाव में जीरो पर लाकर खड़ा कर दिया। इसमें से 12 सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे और 7 सीटों पर प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई। इसके लिए हमें अन्नाद्रमुक के इतिहास के पन्नों को भी पलटना पड़ेगा।

 

एमजीआर तीन बार जयललिता 6 बार बनी सीएम

मारुदुर गोपालन रामचन्द्रन यानि एमजीआरतमिल फिल्मों के अभिनेता और राजनीतिज्ञ थे। 1972 में उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया और एआईएडीएमके की स्थापना की। इसके बाद वह तीन बार तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर बनें।

 दिसंबर 1987 को उनका निधन हुआ तो उनकी पत्नी जानकी तमिलनाडु की पहली महिला सीएम बनी] लेकिन सिर्फ 24 दिन के लिए। बहुमत साबित नहीं कर पाने के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति खासकर एआईएडीएमके में उदय हुआ जयललिता का। उन्होंने पार्टी पर पूरा एकाधिकार बनाया। करीब तीन दशकों में वह 6 बार तमिलनाडु की सीएम बनी और कई बार तो दिल्ली की सत्ता को भी परेशान किया। दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री रहते हुए ही उनकी हालत बिगड़ी। जिसके बाद उनका निधन हो गया। ये वो दौर था जब राज्य और केंद्र की राजनीति में उनकी पार्टी की सीटें अच्छी खासी थीं। जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक में उत्तराधिकार को लेकर काफी विवाद हुये। और तमिलनाडु की सत्ता हाथ लगी पार्टी के दूसरे बड़े नेता माने जाने वाले पनीरसेल्वम यानी ओपीएस के। हालांकि दिसंबर 2017 को उन्हें सीएम पद से हटना पड़ा इसके बाद सीएम बने पार्टी के ही एक और बड़े नेता पलानी स्वामी यानी ईपीएस। फिर आया साल 2019 लोकसभा चुनाव हुए तो सत्ता पर काबिज एआईएडीएमके महज 9 सीटें ही जीत पाई। दो साल बाद विधानसभा चुनाव हुये तो तमिलनाडु की 234 सीटों में से अन्ना द्रमुक महज 65 सीटें ही जीत सकी और सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद से ही पार्टी के सितारे गर्दिश में आ गए। इस दौरान अन्नाद्रमुक और बीजेपी केंद्र के स्तर पर साथ तो रहीं]लेकिन बीजेपी ने अन्नाद्रमुक के कमजोर पड़ते जनाधार को देखते हुए तमिलनाडु में अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया। आईपीएस से वीआरएस लेकर राजनीति में आए तेजतर्रार के अन्नामलाई को बीजेपी ने तमिलनाडु की कमान सौंपी और जमीनी स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाती रही। आखिरकार सितंबर 2023 में दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया। अब तक चुनाव के नतीजे सामने आए हैं तो एआईएडीएमके लोकसभा सीटों के मामले में शून्य पर है। 

 

तमिलनाडु की राजनीति के बरक्स अगर एआईएडीएमके के हालात को समझे तो उसके लिए 2024 के चुनाव में कुछ भी अच्छा नहीं रहा। सिवाये एक बात के,वो है उसका वोटिंग प्रतिशत

 2024 के चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 

2024 के आम चुनाव में DMK को 26.93प्रतिशत AIADMK को 20.46प्रतिशत BJP को 11.24प्रतिशत और कांग्रेस को 10.67प्रतिशत वोट मिले थे

 

AIADMK का वोटिंग  परसेंटेज कितना घटा ?

बीते 10 सालों में AIADMK के वोट शेयर की बात करें तो 2014 के आम चुनाव में पार्टी को तमिलनाडु में 40 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 39 में से 37 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं 2019 में वोट शेयर घट कर19.39फीसदी रह गया वही इस बार पार्टी का वोट शेयर फीसदी के करीब बढ़ कर 20.46फीसदी हुआ है]लेकिन उसे सीट एक भी नहीं मिली है.

 

 विधानसभा चुनाव से उम्मीदें

 आम चुनाव के नतीजों पर अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी का कहना है कि पार्टी को 2019 के मुकाबले एक फीसदी ज्यादा वोट मिला है। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी से समझौता होने की संभावना से भी इंकार किया है। सत्ता में आने का दावा किया है। साथ ही दक्षिण तमिलनाडु में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर भी उन्होंने जल्द उबरने की बात कही है।

 

 करिश्माई ने लीडरशिप की कमी 

तमिलनाडु की राजनीति के जानकार मानते हैं कि मौजूदा समय में AIADMK के पास एमजीआर और जयललिता के कद का कोई दूसरा करिश्माई नेता नहीं है। इसके अलावा पार्टी में धड़ेबाजी ने उसे बड़ा नुकसान पहुंचाया है। अगर मौजूदा हालात से उबरना है तो पार्टी को सामूहिक नेतृत्व स्वीकार करना होगा।

 अब आने वाला समय बताएगा कि देश की राजनीति में अन्नाद्रमुक अपने आस्तित्व को बचाए रख पाएगी या फिर उसका हाल ओडिसा की बीजू जनता दल के जैसा होगा। जोकि इस बार केंद्र में तो सीटें हारी ही राज्य की सत्ता में भी उसके दो दशक से ज्यादा के सफर पर ब्रेक लग गया।

 और आखिर में राहत इंदौरी की दो लाइनें जरुर सियासी मझधार में फंसी इन पार्टियों के लिए

न हम सफर न  किसी हम नशीं से निकलेगा

हमारे  पांव का कांटा हमीं से निकलेगा।

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