Lok Sabha Election 2024: पूर्वांचल की जनता को बाहरी चेहरे ही क्यों पसंद?

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पूर्वांचल की सियासत कुछ मायनों में दूसरे क्षेत्रों से अलग है। पिछले कुछ सालों में लोकसभा चुनाव में यहां के वोटर्स का नजरिया बदला है। उन्होंने स्थानीय से कई ज्यादा भरोसा बाहरी प्रत्याशियों पर जताया है।

लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है। पूरा चुनाव 7 फेज में होगा और पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी। जनसंख्या के आधार पर देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं। इसी वजह से यूपी की सियासत का सीधा असर केंद्र में देखने को मिलता है। भौगोलिक लिहाज से तो प्रदेश को अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चमी यूपी में बांटा गया है। पूर्वांचल में 27 लोकसभा सीटें हैं। लेकिन, पूर्वांचल की सियासत कुछ मायनों में दूसरे क्षेत्रों से अलग है। पिछले कुछ सालों में लोकसभा चुनाव में यहां के वोटर्स का नजरिया बदला है। उन्होंने स्थानीय से कई ज्यादा भरोसा बाहरी प्रत्याशियों पर जताया है। मौजूदा लोकसभा सीट पर गौर करें तो वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, आजमगढ़ और घोसी के सांसद बाहरी हैं।

सबसे पहले हाई प्रोफाइल सीट वाराणसी की बात करें तो यहां 2004 से ही बाहर से आने वाले प्रत्याशी सांसद चुने जा रहे हैं। साल 2004 में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. राजेश मिश्रा सांसद बने। जिनका जन्म स्थान देवरिया जिला है। इसके बाद साल 2009 में बीजेपी के डॉ. मुरली मनोहर जोशी सांसद बने। जो कि मूल रूप से उत्तराखंड के हैं। इसी तरह 2014 से अब तक बीजेपी सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद हैं। जिनका जन्म गुजरात के वडनगर में हुआ है। वाराणसी लोकसभा सीट पर पूरे देश की नजर टिकी है। यहां से बीजेपी ने पीएम मोदी को तीसरी बार प्रत्याशी बनाया है। वाराणसी में 7वें चरण यानी 1 जून को मतदान होना है। इसके बाद बात करते हैं चंदौली लोकसभा सीट की, तो यहां साल 2014 से डॉ. महेंद्र नाथ पांडे बीजेपी के सांसद हैं। डॉ. पांडे मूल रूप से गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं और उनका आवास वाराणसी में है। इस बार चंदौली से केंद्रीय मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडेय को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा गया है। उधर, समाजवादी पार्टी ने वीरेंद्र सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। चंदौली में भी 7वें चरण में यानी 1 जून को मतदान होना है।

मिर्जापुर

पूर्वांचल की चर्चित सीटों में से एक मिर्जापुर में साल 2009 से बाहरी प्रत्याशी ही लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। 2009 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद चुने गए बालकुमार पटेल का जन्म स्थान चित्रकूट जिला है। वहीं, साल 2014 और 2019 में अपना दल-एस के टिकट पर जीतने वालीं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल मूल रूप से कानपुर की रहने वाली हैं। मिर्जापुर में भी 7वें चरण यानी 1 जून को मतदान होना है।

रॉबर्ट्सगंज

वहीं, सोनभद्र जिले की रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से भी 2009 से बाहर से आए नेता ही सांसद चुने जा रहे हैं। मिर्ज़ापुर के रहने वाले पकौड़ी लाल कोल साल 2009 में सपा से और 2019 में अपना दल-एस से रॉबर्ट्सगंज लोकसभा से सांसद चुने गए थे। साल 2014 में चंदौली जिले के रहने वाले छोटेलाल खरवार बीजेपी से सांसद चुने गए थे। रॉबर्ट्सगंज में भी 7वें चरण यानी 1 जून को मतदान होना है।

भदोही 

पूर्वांचल की बहुचर्चित भदोही लोकसभा सीट की तो 2009 से अस्तित्व में आए भदोही लोकसभा क्षेत्र से 2019 में मिर्ज़ापुर के रहने वाले रमेश चंद बिंद बीजेपी के सांसद चुने गए। इस बार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तृणमूल कांग्रेस के खाते में ये सीट दे दी है। जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने यहां से ललितेश पति त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है। भदोही में भी 6वें चरण यानी 25 मई को मतदान होना है।

 आज़मगढ़ 

आज़मगढ़ लोकसभा क्षेत्र में 2014 से केवल बाहरी प्रत्याशी ही सांसद चुने जा रहे हैं। साल 2014 में इटावा के रहने वाले तत्कालीन सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और 2019 में उनके बेटे अखिलेश यादव सांसद चुने गए थे। वहीं, 2022 में हुए उपचुनाव में गाजीपुर जिले के रहने वाले दिनेश लाल यादव निरहुआ आज़मगढ़ से बीजेपी सांसद हैं  । इस बार फिर आजमगढ़ से निरहुआ पर बीजेपी ने भरोसा जताया है, तो वहीं सपा ने धर्मेंद्र यादव को चुनावी मैदान में उतारा है। आजमगढ़ में भी 6वें चरण यानी 25 मई को मतदान होना है।

घोसी

यूपी की 80 लोकसभा सीटों में एक सीट घोसी सीट की बात करें तो यहां साल 2009 से ही बाहर से आए नेता ही सांसद चुने जा रहे हैं। साल 2009 में बसपा की टिकट से आज़मगढ़ के रहने वाले दारा सिंह चौहान बड़े अंतर से चुनाव जीते थे। इसके बाद मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने 2014 में ये सीट अपने नाम की और बलिया के रहने वाले हरिनारायण की जीत हुई। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने जबरदस्त वापसी करते हुए सभी को चौका दिया। घोसी सीट पर गाजीपुर के रहने वाले अतुल राय ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। हालांकि इस बार बीजेपी ने राजभर वोट को ध्यान में रखते हुए अरविंद राजभर पर दांव चला है। जो कि ओम प्रकाश राजभर के बेटे हैं। पार्टी को भरोसा है कि तमाम जातीय समीकरण साध इस सीट को बीजेपी निकाल सकती है। इस बार घोसी लोकसभा सीट पर लड़ाई कांटे की है। यहां सातवें चरण में 1 जून को वोटिंग होगी।

पूर्वाचल की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि यहां के वोटर्स प्रत्याशी का जन्म और निवास स्थान नहीं देखते हैं। वो सिर्फ ये देखते हैं कि प्रत्याशी कितना ताकतवर है और उनकी आवाज को कितनी मजबूती से संसद में रख सकता है।  

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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