Actor Vijay Anand : रिश्तेदार से शादी की तो विवादों में आए

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सुपस्टार देव आनंद के भाई विजय आनंद ने बतौर एक्टर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर तमाम फिल्मों में किया। अपनी प्रतिभा से चौंकाया। इन्होंने रियल लाइफ में भी ऐसा फैसला किया जिसके बाद लोग हैरान हुए बिना नहीं रहे।

 

सिर्फ 23 साल की उम्र में बने डायरेक्टर 

साल 1957। सिर्फ 23 साल की उम्र। जिस उम्र में नौजवान फिल्म की बारीकियां सीखते- समझते हैं। उस उम्र में पहली फिल्म 'नौ दो ग्यारह' को डायरेक्ट किया। ये कोई और नहीं सुपरस्टार देव आनंद के भाई विजय आनंद थे। इस लीजेंड फिल्ममेकर के बारे में अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि मात्र 40 दिन के अंदर फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली। ये सब बचपन की संगत का नतीजा था कि फिल्म को लेकर इतनी कम उम्र में समझ पैदा हो गई।

महान कलाकारों के साथ बीता बचपन 

एक इंटरव्यू में विजय आनंद ने कहा था कि 'मैंने जोहरा सहगलकामेश्वर सहगलमोहन सहगल और गुरुदत्त जैसे लोगों के साथ बचपन बिताया। जोहरा और कामेश्वर ने हमारे पाली हिल होम में एक डांस स्कूल शुरू किया था। बलराज और दमयंती साहनी लगभग हमारे घर में ही रह रहे थे। मेरे भाई चेतन आनंद उन्हें बॉम्बे ले आए और जब तक उन्हें रहने के लिए जगह नहीं मिली। वो हमारे साथ ही रहे।'

तीनों भाइयों ने रखी 'नवकेतन फिल्म्स' की नींव 

22 जनवरी साल 1934, पंजाब के गुरदासपुर में पैदा हुए विजय आनंद को प्यार से भाई देव आनंद गोल्डी आनंद कहते थे। देव आनंद के एक और भाई थे चेतन आनंद। इन तीनों भाइयों ने मिलकर 'नवकेतन फिल्म्स' के बैनर तले 'गाइड', 'ज्वेल थीफ' और 'जॉनी मेरा नाम' जैसी फिल्म बनाई।

शादी की तो विवादों में आए  

जिस तरह से कम उम्र में फिल्म बना कर सबको विजय आनंद ने चौंकाया थाउसी तरह अपनी ही एक छोटी उम्र की रिश्ते में भतीजी लगने वाली सुषमा आनंद से शादी की थी। इस शादी के बाद वो बेहद विवादों में आ गए थे। सुषमा आनंद से शादी करने के बाद उन्हें एक बेटा वैभव आनंद हुआ था।

'उन्हें मेरी सादगी पसंद आई'

एक बार सुषमा आनंद ने एक इंटरव्यू में अपनी शादी को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि 'गोल्डी (विजय आनंद) और मेरी शादी साल 1978 में हुई थी। जब हमारी शादी हुई थीतब फिल्म 'राम बलरामकी शूटिंग चल रही थी। उन्हें मेरे सादगी पसंद आई थी। मैं उनका टेम्परामेंट समझ गई थी। मैं समझ गई थी कि उन्हें बहुत जल्दी गुस्सा नहीं आता है। वो मैं थीजिसे जल्दी गुस्सा आता था। मैं ज्यादा पागल थी। मैं कुछ चीजें जान बूझकर उन्हें तंग करने के लिए किया करती थी। कभी उन्होंने मुझे संभालातो कभी मैंने उन्हें संभाला।'

जब ओशो से हुआ मोह भंग

विजय आनंद ने बतौर हीरो 'हकीकत', 'कोरा कागज', 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' जैसी फिल्मों में काम किया। एक समय ऐसा भी आया थाजब विजय आनंद तनाव का शिकार हो गए। अपने इस तनाव से छुटकारा पाने के लिए विजय आनंद आचार्य रजनीश की शरण में चले गए। पर एक दिन ओशो से उनका मोह भंग हो गया। 23 फरवरी साल 2004, 70 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से विजय आनंद का निधन हो गया। अपने भाई के निधन पर देव आनंद ने कहा था कि 'आज मैं रोउंगा नहीं।' लेकिन ऐसा कहा जाता वो अगले दो दिनों तक लगातार रोते रहे।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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