Ameen Sayani : 'जी हां बहनों और भाइयों, मैं हूं आपका दोस्त... '

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एक दौर में रेडियो शो बिनाका गीतमाला में सुनाई देने वाली अमीन सयानी की आवाज अब थम गई है। 91 साल की उम्र में जिंदगी को अलव‍िदा कह दिया है। वो एक अधूरा ख्वाब छोड़ गए हैं। जब तक जिंदा रहे उन्हें एक मलाल भी रहा।

'मेरी भाषा कई तूफानों और पथरीली राहों से होकर गुजरी' 

'मेरी भाषा कई तूफानों और पथरीली राहों से होकर यहां तक पहुंची है। मैं एक ऐसे घर में पैदा हुआ जहां कई भाषाओं का मिश्रण था। पिताजी ने बचपन में कभी पारसी सीखी थी और मेरी मां गुजरातीअंग्रेजी और हिंदी बोलती थी। मैं बचपन में गुजराती बोलता था। गांधीजी जी ने मेरी मां को हिंदीगुजराती और उर्दू में पत्रिका निकालने की सलाह दी। मां ने ये काम मुझे सौंपा। मुझे अपनी भाषाओं के विस्तार में काफी मदद मिली। शुरुआत में घबराहट होती थी। मैं सोचता था कि मुझे हिंदी और उर्दू तो आती है, लेकिन अब यही मुझे रेडियो पर बोलनी होगी। मैंने अपने आपको तैयार किया। वक्त के साथ मैं अपनी भाषा में और सुधार लाया।'

91 साल की उम्र में जिंदगी को अलव‍िदा कहा

'जी हां बहनों और भाइयोंमैं हूं आपका दोस्त अमीन सयानी और आप सुन रहे हैं बिनाका गीतमाला।' एक दौर में रेडियो में सुनाई देने वाली ये आवाज अब थम गई है आवाज के जादूगर रेडियो एनाउंसर अमीन सयानी ने 91 साल की उम्र में जिंदगी को अलव‍िदा कह दिया है। 21 दिसंबर, साल 1932 मुंबई में जन्में अमीन सयानी ने रेडियो प्रेजेंटर के तौर पर करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो से की थी। 10 साल तक वो इंग्लिश प्रोग्राम्स का हिस्सा रहे।

वो ह‍िट शो जो मील का पत्थर बन गया

साल था 1952 रेडियो प्रोग्राम का नाम था बिनाका गीतमाला इस शो में आवाज देने के लिए वो पूरे देश में पॉपुलर हुए। अगले अगले 42 साल यानी 1994 तक प्रसारित होता रहा। करीब 54,000 रेडियो शो और 19,000 जिंगल्स के लिए आवाज़ दी इस वजह से इनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। रेडियो पर आने वाला शो 'एस कुमार का फिल्मी मुकदमा' भी काफी लोकप्रिय हुआ। बतौर एनाउंसर भूत बंगलातीन देवियांकत्ल जैसी फिल्मों में भी काम किया। ऐसे कई लोग आए जिन्होंने इनके अंदाज को कॉपी करने की कोशिश कीलेकिन कोई अमीन सयानी नहीं बन पाया। 

एक अधूरा ख्वाब और एक मलाल

उन्होंने अपने एक इंटरव्यू बताया था कि 'बचपन से मैं गाया करता था और एक सिंगर बनना चाहता था। लेकिन बड़ा होने के बाद मेरी आवाज़ फट गई और मेरी गायक बनने की तमन्ना अधूरी रह गई।' ये तो उनका अधूरा ख्वाब था, उन्हें जिंदगी भर एक मलाल भी रहा। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की अवाज़ को रिजेक्ट करने का। अपने करियर की शुरुआती दिनों में जब अमिताभ बच्चन रेडियो में बतौर एनाउंसर टेस्ट देने गए थे तो उनका टेस्ट अमीन सयानी ने ही लिया है। लेकिन उन्होंने अमिताभ बच्चन को रिजेक्ट कर दिया। एक इंटरव्यू में अमीन सयानी बताते हैं कि 'ऑल इंडिया रेडियो के मुंबई स्टूडियो में अमिताभ बच्चन बिना अपॉइंटमेंट ही ऑडिशन देने के लिए आए। जिसकी वजह से मैंने उनसे मिलने से मना कर दिया और बिना उनकी आवाज़ सुने ही उन्हें रिजेक्ट कर दिया। जब कुछ समय बाद मैंने अमिताभ बच्चन की फिल्म आनंद देखीतब मुझे उनकी बेमिसाल आवाज़ का अंदाजा और अपनी गलती का एहसास हुआ।'

'जो हुआवो अच्छा ही हुआ'

इतना ही नहींअमिताभ बच्चन ने समीन सयानी से तीन बार मिलने की कोशिश की और तीनों ही बार वो नाकाम रहे। आखिर में अमिताभ बच्चन ऑडिशन देने का इरादा छोड़ दिया और एक्टिंग की तरफ मुड़ गए। अमीन सयानी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'जो हुआवो अच्छा ही हुआ। उस दौर में यदि मेरी व्यस्तता नहीं बढ़ी होती तो शायद देश एक बड़े कलाकार से वंचित रह जाता।' देश न अमिताभ बच्चन की कला से वंचित हुआ और न ही अमीन सयानी की आवाज के जादू से। साल 2009 पद्मश्री से सम्मानित अमीन सयानी तो दुनिया से चले गए पर उनकी आवाज हमेशा जिंदा रहेगी। इस वक्त अमीन असानी पर गुलजार की लिखी लाइनें बिल्कुल सटीक बैठती हैं। 'नाम गुम जाएगाचेहरा ये बदल जाएगा मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे।'

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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