पानी के अंदर कैसे होती है फिल्मों की शूटिंग, पहले और अब में कितना कुछ बदला ?

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एक्वामैन-2, अवतार-2, रामसेतू ये फिल्में तो आपने देखी होंगी, इसकी तारीफ भी खूब की होगी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ये स्पेशल इफेक्ट्स जो फिल्मों में कैसे दर्शाए गए. वो कैसे शूट किए गए होंगे. इसके लिए कितना भारी भरकम खर्च आया होगा. कैसे ये VFX तैयार किए जाते है. अगर नहीं जानते को आज आपको इस बारे में बताते है. दरअसल पहले के जमाने में जहां समुद्र या नदी में पानी के अंदर शूटिंग होती थी तो अब शूटिंग के लिए ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ती. अब तो सबकुछ काफी बदल गया है. आज का जमाना AI, VFX और स्पेशल इफेक्ट का है और ऐसे में किसी भी स्टूडियो में 'अंडरवाटर शूटिंग' आसानी से हो जाती है.

एक्वामैन-2, अवतार-2, रामसेतू, केदारनाथ समेत कई फिल्में है जिनमें VFX का इस्तेमाल कर अंडरवाटर शूटिंग को दिखाया गया है. इसके लिए दुनियाभर में कई स्टूडियो भी बनाए गए है. जिसमें एक सेटअप तैयार करके या स्वीमिंग पूल में पानी के अंदर सभी सीन फिल्माए जाते हैं. इससे समय की भी बचत होती है और काफी आसानी होती है कहा जाता है स्टूडियो में शूटिंग करने से न केवल फिल्म की पूरी टीम को सुविधा मिलती है, बल्कि सितारों के लिए भी आसानी हो जाती है. हालांकि खर्चा थोड़ा ज्यादा आता है लेकिन पहले की अपेक्षा समय की काफी बचत होती है. रिपोर्ट्स की मानें तो एक्वामैन-2 को बनाने में 215 मिलियन के आस-पास खर्चा आया था. जिसमें सबसे ज्यादा खर्च VFX को लेकर हुआ, इसके साथ बॉलीवुड की फिल्म रामसेतु को तैयार करने में 150 करोड़ का भारी भरकम खर्च किया गया. जिसमें ज्यादातर खर्च VFX और स्पेशल इफेक्ट्स का आया. 

 

 

अब स्टूडियो में किसी भी सीन में जरूरत पड़ने पर लहर आसानी से लाई जा सकती है, वहीं पहले के दौर में समुद्र में लहर के आने का इंतजार किया जाता था.इस दौरान पूरे टीम को काफी समय तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे समय की बहुत बर्बादी होती थी. हालांकि अब किसी भी स्टूडियो में समुद्र में तूफान और सुनामी तक के दृश्य को आसानी से फिल्माया जा सकता है. साथ ही जब जरूरत हो बारिश की जा सकती है, लेकिन असली लोकेशन पर लहरों का सामना करना किसी के लिए भी आसान नहीं होता. कई बार खतरनाक लहरे लोगों के लिए खतरा भी बन जाती थीं. लेकिन अब स्पेशल इफेक्ट्स की मदद से पानी के अंदर शूटिंग करना निर्देशक के लिए काफी आसान हो गया है.

पहले पानी के अंदर शूटिंग के लिए न तो स्टूडियो हुआ करते थे और न ही क्रू और सितारों के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम. हालांकि, अब हालात बदल चुके हैं और शूटिंग के दौरान हर बात का ख्याल रखा जाता है. अब सोलर पैनल या हीट पंप से पानी को गर्म किया जाता है ताकि ज्यादा समय तक पानी में रहने से किसी सितारे की तबीयत न बिगड़े. इसके अलावा सेट पर एंबुलेंस और डॉक्टर भी मौजूद रहते हैं. इन सबके अलावा शूटिंग से पहले सितारों को ट्रेनिंग दी जाती है ताकि सीन को फिल्माना आसान हो.

दरअसल, शूटिंग शुरू करने से पहले देखा जाता है कि किन सितारों को तैरना आता है और अगर किसी को नहीं आता है तो उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. इसके बाद पानी में सांस रोकने, रेगुलेटर से सांस लेने और स्‍कूबा डाइविंग की थोड़ी बहुत जानकारी सितारों को दी जाती है. पानी के अंदर शूटिंग करने के दौरान एक अच्छे कैमरे के साथ ही लाइटिंग का भी खास ध्यान रखा जाता है ताकि सीन को अच्छी तरह से फिल्माया जा सके. इसके लिए स्ट्रोब और LED लाइटें आमतौर पर सबसे अच्छा विकल्प साबित होती हैं क्योंकि ये दिन के उजाले जैसी ही रोशनी देती हैं.

 

रिपोर्ट्स की मानें तो सबसे पहली अंडरवाटर फिल्म 40 के दशक में आई थी.

इटली की 'पनारिया फिल्म्स' ने 40 के दशक में पहली बार एक अंटरवाटर फिल्म 'अंडरवाटर हंटर्स' बनाई थी.

1946 में एओलियन द्वीप समूह के पास इस फिल्म की शूटिंग पानी के अंदर करना किसी अजूबे से कम नहीं था. इसकी शूटिंग के दौरान पूरी टीम को 2 महीने तक इस द्वीप पर रहना पड़ा था.

इसे शूट करने के लिए ही पहली बार पेशेवर कैमरे का इस्तेमाल हुआ, जिसे लेकर फिल्मकार फ्रांसेस्को एलियाटा को समुद्र में कूदना पड़ा था.

हॉलीवुड के मशहूर निर्देशक जेम्स कैमरून की फिल्म 'अवतार: द वे ऑफ वॉटर' तो आपकी याद ही होगी, जिसमें पानी के नीचे की दुनिया दिखाई गई थी.

इसके लिए निर्देशक ने 'मैनहटन बीच स्टूडियोज' में विशाल सेट तैयार किया था, जिसे बनाने में उन्हें और उनकी टीम को कई महीने लगे थे.

ये एक कृत्रिम कुंड था, जिसकी क्षमता 10 लाख लीटर पानी की थी. पानी के अंदर ही कैमरे लगाए गए थे ताकि किरदारों के हाव-भाव शूट हो सके.

इसके अलावा दुनिया के सबसे आधुनिक अंडरवाटर फिल्म स्टूडियो की बात करें तो वो बेल्जियम के वेलबोल्‍डे में है, जिसका नाम 'लाइट्स स्टूडियो' है. इस स्टूडियो को विम मिशिल्स ने बनाया है, जो गोताखोर होने के साथ एक सिनेमैटोग्राफर भी हैं.

आपको बता दें भारत के पहले अंडरवाटर सिनेमैटोग्राफर सुमेर वर्मा हैं, जिन्होंने एसएस राजामौली के साथ काम किया है. इनके अलावा प्रिया सेठ एक ट्रेंड स्कूबा डाइवर और अंडरवाटर सिनेमैटोग्राफर हैं, जिन्होंने रानी मुखर्जी अभिनीत 'मर्दानी 2' में काम किया था. सारा अली खान की फिल्म 'केदारनाथ' में पानी के अंदर सीन फिल्माए गए तो अक्षय कुमार ने फिल्म 'राम सेतु' के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रू की मदद ली. 'ब्लू', 'द गाजी अटैक' सहित कई फिल्मों में भी पानी में शूटिंग हुई थी.

 

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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