Ajmer 92 का सिर्फ पोस्टर आया और विवाद हो गया, मेकर्स बोले- 'जब ट्रेलर आएगा तब क्या होगा'

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11 मार्च 2022 को एक फिल्म आई द कश्मीर फाइल्स कुछ लोगों के लिए ये फिल्म कश्मीरी पंडितों के दर्द की दास्ता थी, तो कुछ के लिए सिर्फ एक प्रोपेगेंडा विवाद हुआ लेकिन फिल्म रिलीज हुई, फिर करीब एक साल बाद फिल्म द केरल स्टोरी आई, जिसपर भी द कश्मीर फाइल्स की तरह ही विवाद छिड़ा। हालांकि इसके बीच भी कई फिल्में और भी आईं जिसपर विवाद उठा, जैसे कि शाहरुख खान की कमबैक फिल्म पठान के लिए तो थियेटर्स के बाहर मिलिट्री तक तैनात कर दी गई थी। लेकिन कुछ फिल्मों जिसे प्रोपेगेंडा कहा जाता है, लगातार विवाद का कारण रहीं। जैसे कि प्रेजेंट टाइम में 72 हूरें और अजमेर 92 पर विवाद हो रहा है

जिसमें अजमेर 92 पर विवाद लोगों की क्युरिऑसिटी की वजह बनी हुई है, इसके साथ ही ये जानना होगा कि आखिर क्या वजह रही जो अपनी मेहमान नवाजी के पहचाने जाने वाले शहर राजस्थान में मेकर्स फिल्म की शूटिंग करने में असमर्थ रहे, फिल्म अजमेर 92 को लेकर विवाद शुरू हो गया है, जबकि ये रियल इवेंट से इंस्पायर्ड फिल्म है, जोकि अजमेर गैंगरेप कांड या अजमेर ब्लैकमेल कांड कही जाने वाली घटना पर आधारित बताई गई है। अब बताते हैं कि आखिर फिल्म के पोस्टर को लेकर विवाद क्यों हो रहा है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1992 में अजमेर रेप कांड का खुलासा नवज्योति अखबार के क्राइम रिपोर्टर रहे संतोष गुप्ता ने किया था, इस कांड के ज्यादातर आरोपी मुस्लिम हैं, जबकि पीड़ित लड़कियां हिन्दू थी और कांड था...अपने रुत्बे के प्रभाव से स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों का यौन शोषण करना। लड़कियों की विवादित तस्वीरें भी न्यूजपेपर में आईं, लेकिन आखिर में कांड के आरोपी आज भी पूरी शान से अजमेर में रहते हैं।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है और इसके अध्यक्ष महमूद मदनी ने कहा कि इस फिल्म से समाज में दरार पैदा होगी। उन्होंने कहा कि अजमेर की घटना का जो रूप बताया जा रहा है, वो पूरे समाज के लिए बहुत ही पीड़ादायक है। इसके विरुद्ध बिना किसी धर्म और संप्रदाय के सामूहिक कार्रवाई करने की आवश्यकता है, लेकिन हमारे समाज को इस दुखद घटना को सांप्रदायिक रंग देकर इसकी गंभीरता को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं केंद्र सरकार से इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग करता हूं।

वहीं फिल्म के डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें राजस्थान में फिल्म की शूटिंग नहीं करने दी गई थी। लोगों ने सेट को घेर लिया था और धमकी भी दी।डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि विरोध करने वाले पहले फिल्म देख लें। हमारी फिल्म किसी धर्म और जाति के विरोध में नहीं है, बल्कि उन लड़कियों पर आधारित है, जिनके साथ सालों साल जुर्म हुआ है। अभी तो सिर्फ पोस्टर रिलीज हुआ है, तो लोग विरोध कर रहे है, जबकि टीजर और ट्रेलर आना बाकी है। मैने खुद पीड़ितों से मुलाकात की है, उनकी बातें सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हुए। मुझे लगा ये कहानी बाहर आनी ही चाहिए।

साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने अजमेर 92 ‘द केरल स्टोरी’ और ‘कश्मीर फाइल्स’ के पहले बनाई थी। इसलिए ये कोई प्रोपगेंडा फिल्म नहीं है, जिन लड़कियों पर ये बीती है उनके बारे में कोई जानता ही नहीं है। लोगों को समझना होगा की इस फिल्म में 250 लड़कियों के साथ हुए बलात्कार की जानकारी हमने शेयर की है।

फिल्म की लीड एक्ट्रेस सुमित सिंह ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए कहा कि इस फिल्म का विरोध तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए, ये सच्चाई सबके सामने आनी ही चाहिए। पहले फिल्म देखिए ये हिंदू-मुस्लिम पर नहीं है। ये फिल्म बहुत बड़े हादसे को दिखाती है।

इस फिल्म के लीड एक्टर करन वर्मा ने कहा पहले फिल्म देखें फिर निर्णय लें। इसमें किसी धर्म के विरोध में कुछ नहीं है। वैसे बता दें, फिल्म के जारी किए गए पोस्टर में 250 लड़कियों की ब्लैकमेलिंग की खबर की कटिंग दिख रही है, पुष्पेंद्र सिंह के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म 14 जुलाई को रिलीज के लिए स्कैड्यूल है।

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