पार्ट टाइम एक्टर राजनीति के लिए क्यों हैं मिसफिट?

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तृणमूल नेता मिमी चक्रवर्ती ने खुद को पॉलिटिक्स से अलग कर लिया, जाधवपुर सीट से वो 2019 में सांसद बनी थीं। उन्होंने कहा कि वो राजनीति में मिसफिट हैं, इसलिए उन्होंने इसे छोड़ने का फैसला किया है।

बॉलीवुड के कई स्टार्स सिनेमा के पर्दे पर हिट होने के बाद, पॉलिटिक्स में भी एंट्री कर गए। लेकिन वो पॉलिटिक्स में कितने सफल हुए, इसको लेकर सवाल उठता रहता है। और हाल ही में पीआरएस लेजिस्लेटिव के आंकडे सामने आए, तो इसको सवाल उठना और भी जरुरी हो गया। आज की स्टोरी से हम कुछ फैक्ट्स, जैसे कि सदन में स्टार्स की मौजूदगी कितनी होती है, विकास के कामों में कितनी भागीदारी के हिसाब से देखते हैं और सदन में जो डिबेट्स होती है, उनमें वो कितनी परसेंट भागीदारी रखते हैं, इसके हिसाब से जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर एक्टर्स, पालिटिक्स में सक्सेसफुल क्यों नहीं हो पाते, या मिमी चक्रवर्ती के शब्दों में कहे, तो मिसफिट क्यों हो जाते हैं। दरअसल, हाल ही में फिल्म एक्ट्रेस और तृणमूल नेता मिमी चक्रवर्ती ने खुद को पॉलिटिक्स से अलग कर लिया, जाधवपुर सीट से वो 2019 में सांसद बनी थीं। लेकिन उन्होंने जर्नलिस्ट्स से बात करते हुए कहा है कि वो राजनीति में मिसफिट हैं, इसलिए उन्होंने इसे छोड़ने का फैसला किया है। 

वैसे भारतीय राजनीति में फिल्मी स्टार्स की एंट्री और फिर सन्यास की बात नई नहीं है। अमिताभ बच्चन, गोविंदा, विनोद खन्ना और धर्मेंद्र जैसे कई सुपरस्टार राजनीति में आकर चले गए हैं। भले ही पार्टियों को इससे खास नुकसान न हो, लेकिन जनता का नुकसान जरूर होता है। पीआरएस लेजिस्लेटिव के आंकडों के बाद से ये बात और भी साफ हो गई है। 17वीं लोकसभा के दौरान कई फिल्मी फिल्मी स्टार्स की संसद में गैरमौजूदगी चर्चा में रही थी, और अब पीआरएस लेजेस्लेटिव की अटेंडेंस लिस्ट आई है, तो इसके मुताबिक फिल्मी दुनिया से आए ज्यादातर सांसदों की उपस्थिति 20-50 प्रतिशत के बीच ही है। पीआरएस लेजेस्लेटिव के मुताबिक 2019 से 2024 तक लोकसभा में हेमा मालिनी की अटेंडेंस 50 प्रतिशत, चंडीगढ़ से सांसद किरण खेर की अटेंडेंस 47 प्रतिशत, सनी देओल जोकि गुरुदासपुर से सांसद हैं और उनकी अटेंडेंस सिर्फ 17 प्रतिशत, दिल्ली से सांसद हंसराज हंस की अटेंडेंस 39 प्रतिशत और तृणमूल की नुसरत जहां की अटेंडेंस 23, मिमी चक्रवर्ती की संसद में अटेंडेंस 21 प्रतिशत और दीपक अधिकारी देव की अटेंडेंस 12 प्रतिशत है।

वहीं अगर परफॉर्मेस की बात करें, तो इन नेताओं की परफॉर्मेंस भी काफी खराब है। बीते 5 साल में हेमा मालिनी ने संसद की सिर्फ 20 डिबेट्स में भाग लिया हैं। हेमा की तुलना में किरण सिर्फ 9 डिबेट्स में शामिल हुई हैं। मिमी चक्रवर्ती 7, नुसरत जहां 12 और दीपक अधिकारी 2 डिबेट्स में ही शामिल हुए हैं। तृणमूल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा अपने फेमस डायलॉग खामोश की तरह पूरे कार्यकाल में खामोश ही रहे है। डिबेट्स तो दूर की कौड़ी हो गई, उन्होंने बीते 2 साल में लोकसभा में एक सवाल तक नहीं पूछा। लोकसभा में सनी देओल की परफॉर्मेंस भी काफी खराब है। पिछले 5 साल में सनी देओल ने एक भी बहस में भाग नहीं लिया। पीआरएस लेजेस्लेटिव के मुताबिक 2019 से 2024 तक लोकसभा के 6 सत्र से सनी देओल तो बिल्कुल ही गायब रहे। इसी के साथ अगर काम की बात करें, तो एमपी लैड के आंकड़े इन एक्टर्स कम पॉलिटिशिनंस के काम को साफ-साफ दिखाते हैं। 

पहले हम आपको ये बता दें कि एमपी लैड (MPLAD), को 1993 में इंट्रोड्यस किया गया है। ये सांसदों को मिलने वाला एक तरह का फंड होता है। भारत सरकार के मुताबिक इस फंड का मकसद स्थानीय स्तर पर, महसूस की गई जरूरतों जैसे कि पीने का पानी, प्राथमिक शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सड़कों वगैराह के आधार पर टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण पर जोर देने के साथ विकास के कामों में सांसद को सक्षम बनाना है। MPs को हर साल 2.5 करोड़ रुपए की दो किश्तों में 5 करोड़ रुपए की राशि वितरण की जाती है। ये राशि नॉन-लैप्सेबल होती है, यानी कि अगर इसे उसी साल इस्तेमाल नहीं किया गया, तो ये अगले साल यूज नहीं की जा सकती है। तो अब बात करते हैं इसके आंकड़ो कि...एमपी लैड के मुताबिक 2019 से 2024 के दौरान मथुरा सांसद हेमा मालिनी 5 साल के दौरान सिर्फ 6.55 करोड़ रुपए एमपी लैड फंड से खर्च कर पाई हैं। जबकि उन्हें कुल 17 करोड़ रुपए का बजट आवंटन था। हेमा मालिनी फंड के आधा से ज्यादा पैसा निकालने में ही असफल रही। किरण खेर 17 करोड़ में से सिर्फ 6.83 करोड़ रुपए अपने क्षेत्र में खर्च कर पाई हैं। दिल्ली उत्तर-पश्चिम से सांसद हंस राज हंस की हालत और भी ज्यादा खराब है, वो 5 साल में एमपी लैड से सिर्फ 4.80 करोड़ रुपए खर्च कर पाए हैं। तृणमूल की नुसरत जहां ने एमपी लैड फंड से विकास कार्यों के लिए 7.5 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

पिछले 5 सालों में कोरोना महामारी सभी के लिए मुसीबत बनी हुई थी, लेकिन इस आपदा के समय भी ज्यादातर फिल्मी स्टार्स अपने क्षेत्र से गायब रहे हैं। सनी देओल, किरण खेर और हेमा मालिनी एक बार भी अपने क्षेत्र में नहीं दिखीं। इनके खिलाफ स्थानीय लोगों ने लापता के पोस्टर भी लगवाए थे। वहीं मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2023 में गुरदासपुर के बटाला में एक फैक्ट्री में ब्लास्ट हो गया था। इस हादसे में 23 लोगों की जान चली गई, लेकिन वहां के सांसद सनी अंजान बने रहे। हादसे के एक दिन बाद सनी अपने बेटे करण के फिल्म का प्रमोशन कर रहे थे। इसको लेकर उनकी खूब किरकिरी भी हुई थी। लोगों ने जब सनी को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया, तब जाकर उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। नुसरत जहां और मिमी चक्रवर्ती भी बुरे वक्त में क्षेत्र से गायब रहे हैं। फिल्मी स्टार्स के राजनीति में रहने का ट्रैक रिकॉर्ड काफी खराब है। कुछ को छोड़ दिया जाए, तो अधिकंश स्टार्स किसी एक पार्टी के साथ रहकर लंबे वक्त तक राजनीति करने में विफल रहे हैं। कई स्टार्स तो जीत के बावजूद राजनीति छोड़कर अपने मूल काम की ओर लौट गए हैं। 

 

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