विभाजन के लिए कितने जिम्मेदार थे माउंटबेटन ?

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साल 1947 में जब देश को आजादी मिली तब इंडिया के लास्ट वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ( Lord Mountbatten) थे और उन्होंने देश के बंटवारे वाला ऐसा माउंटबेटन प्लान बनाया, जिसमें भारत की आजादी और ट्रांसफर ऑफ पॉवर के साथ ही इंडिया के बंटवारे का प्रोविजन था। आज माउंटबेटन की डेथ एनेवर्सिरी (Death Anniversary) पर हम बात कर रहे हैं उसी माउंटबेटन प्लान की।

कहा जाता है कि अंग्रेजों ने भारत छोड़ने की ज्यादा ही जल्दी दिखाई थी, जो माउंटबेटन के इरादों में दिखाई देती थी। माउंटबेटन के प्रपोज़ल के मुताबिक, ब्रिटिश संसद ने 4 जुलाई 1947 को भारत की आजादी का दिन 15 अगस्त तय किया था और इसी वजह से भारत-पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा का फैसला जल्दबाजी में हुआ। लेकिन रेखा का ऐलान 17 अगस्त को किया गया। तब तक दोनों तरफ के लोग भ्रमित ही रहे कि वो भारत में हैं या पाकिस्तान में... जिसके चलते दंगों में और भी ज्यादा जानें गईं थीं। हालांकि ये सवाल हमेशा ही बना रहेगा कि क्या माउंटबेटन बंटवारे की त्रासदी को और कम कर सकते थे या उन्होंने उसे वास्तव में कम ही कर दिया था। वर्ल्ड वॉर के बाद इंग्लैंड में नई ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड माउंटबेटन को 20 फरवरी 1947 को भारत का नया वायसराय नियुक्त किया और इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार ने ये साफ कर दिया था कि जून 1948 तक भारत को स्वतंत्र कर दिया जाएगा। इसके बाद देश में कई तरह की राजनीतिक बहस शुरू हुईं, जो बाद में हिंसा में बदल गईं। देश दंगों की आग में झुलसने लगा और केंद्र की अंतरिम सरकार हालातों को काबू करने में नाकाम साबित हो रही थी। क्योंकि कानून व्यवस्था का मामला प्रान्तों के पास था। इसे देखते हुए ब्रिटिश राज साम्प्रदायिक और राजनीतिक गतिरोध को खत्म करने के लिए ‘माउंटबेटन प्लान’ के साथ सामने आया। जिसमें इंडिया के बंटवारे और पाकिस्तान के जन्म का खाका था। बात है 3 जून 1947 की सुबह की... और जगह दिल्ली में भारत के आखिरी अंग्रेज गवर्नर जनरल माउंटबेटन का स्टडी रूम का एक राउंड टेबल... टेबल पर माउंटबेटन के साथ 7 लोग और बैठे हुए थे। कांग्रेस से जवाहर लाल नेहरू, बल्लभ भाई पटेल और आचार्य कृपलानी। मुस्लिम लीग से मोहम्मद अली जिन्ना, लियाकत अली खान और रब निस्तर... सिखों का प्रतिनिधित्व बलदेश सिंह कर रहे थे। सभी के सामने एक दस्तावेज रखा गया। ये भारत-पाकिस्तान के बंटवारे का प्लान था। और इसके साथ ही ब्रिटिश इंडिया के पार्टिशन प्लान को मंजूर करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हुई। माउंटबेटन ने कांग्रेस और सिख प्रतिनिधियों की तरफ देखा और उनकी तरफ से हां में जवाब मिला। अब बारी माउंटबेटन के बाईं तरफ बैठे जिन्ना की थी। जिन्ना ने कुछ सेकेंड लिया और धीरे से हां में सिर हिलाया। और कुछ मिनटों में 34 करोड़ लोगों का भाग्य तय हो गया। माउंटबेटन प्लान के कुछ मेन प्वाइंट थे। जैसे कि भारत को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटकर दो देश बनाए जाएंगे। एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। दोनों देशों का अलग संविधान होगा और अलग संविधान सभा का गठन किया जाएगा। इसके अलावा भारत की जम्मू और कश्मीर जैसी 500 से ज्यादा रियासतों को छूट दी गई कि वो अपनी मर्जी से चाहें पाकिस्तान में मिल जाएं या भारत में ही रहें। अगर चाहें तो रियासतें स्वतंत्र रूप से भी रह सकती थीं। और इसके अलावा पंजाब और बंगाल में हिंदू व मुसलमान बहुसंख्यक जिलों को अलग प्रांत बनाने का विकल्प दिया गया। उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत और असम के सिलहट जिले के लोगों की इच्छा जानने के लिए जनमत संग्रह कराने का प्रावधान भी दिया गया। 14 और 15 अगस्त 1947 की आधी रात को पाकिस्तान और भारत के अधिराज्य अस्तित्व में आए। लॉर्ड माउंटबेटन को स्वतंत्र भारत का पहला गवर्नर-जनरल नियुक्त किया गया और एम.ए. जिन्ना पाकिस्तान के गवर्नर जनरल बने। हालांकि इससे पहले अंग्रेजों ने पिछली योजनाओं का भी हवाला दिया था कि कैसे भारत छोड़ने यानि भारत की आजादी की बनी योजनाओं को हिंदुओं और मुस्लिम के बीच की दरार की वजह से स्वीकार नहीं किया जा सका था। लेकिन जब माउंटबेटन 22 मार्च 1947 को भारत आए थे। उस वक्त दिल्ली मुंबई और रावलपिंडी में कौमी दंगे चल रहे थे। तब माउंटबेटन ने भारत के हालात को बहुत ही नाजुक माना था और कहा था कि भारत को एक साल तक आजाद होने की हालत में नहीं है। माउंटबेटन को जल्दी ही हालात के मुताबिक यही समझ में आया कि अगर आजादी देने में देरी की गई तो गृह युद्ध छिड़ सकता है। ऐसे में उन्होंने फैसला किया कि आजादी की तारीख जल्दी ही तय करनी होगी और अगर आजादी देने में उन्होंने देरी की तो और ज्यादा खून खराबा होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पहले भारतीय गर्वनर जर्नल सी राजगोपालाचारी ने कहा था कि अगर वो हालात को पहले काबू करने में लग जाते हैं, तो जून 1948 के बाद सत्ता हंस्तातरण की शक्ति ही खत्म हो जाती। 25 जून 1900 को विंडसोर में पैदा हुए एडमिरल ऑफ फ्लीट लुईस फ्रांसिस अल्बर्ट विकटर निकोलस माउंटबेटन ब्रिटिश नेवी के एक superior officer थे। उनका ब्रिटिश राघराने से गहरा संबंध था। विक्टोरिया उनकी परदादी थीं। 27 अगस्त साल 1979 को रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड के काउंटी स्लिगो की क्लिफोनी गांव के पास छुट्टी मना रहे माउंटबेटन की फिशिंग बोट में बड़ा विस्फोट हो गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। 15 अगस्त 1947 को भारत को सत्ता सौंपने के बाद लॉर्ड माउंटबेटन अपने परिवार के साथ इंडिया से तो चले गए थे। लेकिन इंडिया का नाम हमेशा से उनके साथ जुड़ा रहा, माउंटबेटन की बेटी पामेला को भारत से एक खास लगाव था। ये आगे साबित भी हुआ, जब पामेला ने साल 1967 यानि आज़ादी के 20 बाद साल एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम इंडिया हिक्स रखा गया, आपको बता दें फ़िलहाल इंडिया हिक्स की उम्र 55 साल की है और वो पेशे से एक डिजाइनर और लेखिका हैं।

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