International Yoga Day : भारत के वो महान गुरु जिन्होंने दशकों पहले दुनिया को सिखाया योग

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योग – हजारों सालों का अभ्यास

एक प्राचीन अभ्यास, जो हजारों सालों से स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए किया जाता है। इस अभ्यास का जन्म पांच हजार साल पहले भारत में हुआ। एक ऐसा स्थान जहां भगवान आदियोगी शिव ने इस अभ्यास को शुरू किया। इसके बाद हमारे महान भारतीय गुरुओं ने इसको जीवित रखा और अपने छात्रों और पूरी दुनिया को दिया। ये अभ्यास – योग है। यानी आध्यात्मिक, शारीरिक और मानसिक प्रथाओं का एक समूह।

21 जून – अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

21 जूनसाल का सबसे बड़ा दिन। योग भी मनुष्य को दीर्घायु प्रदान करता है। इसलिए हर साल 21 जून को पूरी दुनिया में योग दिवस के रूप मनाया जाता है। स्पेनअमेरिकापुर्तगालइंडोनेशियामोरक्कोयूकेइटली जैसे विविध देशों योग बेहद लोकप्रिय है। मौजूदा वक्त में दुनिया भर में लगभग 50 फीसदी योगा इंस्ट्रक्टर भारतीय मूल के ही हैं। जो योग की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन आज उन योग शिक्षक के बारे में जिन्होंने योग को जीवित रखा आज से कई दशक पहले ही इस प्राचीन कला का प्रकाश पूरी दुनिया में फैलाया।

परमहंस योगानंद

साल 1893 में गोरखपुर में जन्मे परमहंस योगानंद पहले भारतीय योगी जो पश्चिम में क्रिया योग की शिक्षा देने के लिए प्रसिद्ध हैं। वो अपनी किताब 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ अ योगीके लिए जाने जाते हैं. उन्होंने पश्चिम के लोगों को मेडिटेशन और क्रिया योग से परिचित कराया. इतना ही नहींपरमहंस योगानंद योग के सबसे पहले और मुख्य गुरू है. उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन अमेरिका में गुजारा था।

स्वामी कुवलयानंद

साल 1883 में गुजरात में जन्मे स्वामी कुवलयानंद एक प्रमुख शोधकर्ता और योग शिक्षक थे, जो योग और उसके अभ्यासों में अपने शोध कार्य के लिए जाने जाते थे। उन्होंने योग मीमांसा पर काम करना शुरू किया जो उनकी पहली वैज्ञानिक पत्रिका थी।

स्वामी शिवानंद सरस्वती

साल 1887 तमिलनाडु में जन्मे शिवानंद सरस्वती 40 साल की उम्र में योग और ध्यान के कठोर अभ्यास के साथ आत्म-साक्षात्कार की खोज में ऋषिकेश आए। पेशे से डॉक्टर शिवानंद सरस्वती कर्मभक्तिज्ञान और राज योग के संयोजन के लिए जाने गए। योगवेदांत और कई अन्य विषयों पर लगभग 200 से ज्यादा किताबें लिखी। ऋषिकेश में 'शिवानंद योग वेदांतके नाम से योग सेंटर खोला और योग की शिक्षा को पूरी दुनिया में फैलाया। पूरा जीवन शास्त्रों के अध्ययनयोग और अध्यात्म की शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया।

तिरुमलाई कृष्णमाचार्य

साल 1888 को कर्नाटक में जन्मे टी. कृष्णमाचार्य ने एक आयुर्वेदिक विद्वान और  योग शिक्षक थे। इन्होंने पारंपरिक हठ योग में सांस और गति को मिलाकर विन्यास योग का रूप विकसित किया। इसलिए इन्हें आधुनिक योग का पिता भी कहा जाता है। इनकी शिक्षण शैली पतंजलि योग सूत्र पर आधारित थी। वो योग और आयुर्वेद की मदद से लोगों को ठीक करते थे।

महर्षि महेश योगी

साल 1918 को जन्में महर्षि महेश योगी ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन तकनीक को विकसित करने के लिए जाने गए। ये एक प्रकार का मंत्र ध्यान है जो विश्राम की गहरी स्थिति पैदा करता है और आध्यात्मिकता की भावना को बढ़ावा देता है। महर्षि महेश योगी दुनिया भर की मशहूर हस्तियों के आध्यात्मिक गुरु बने। श्री श्री रविशंकर भी महर्षि महेश योगी के शिष्य हैं।

के पट्टाभि जोइस

साल 1915 में जन्मे संस्कृत के विद्वान और महान भारतीय योग गुरु के पट्टाभि जोइस योग के क्षेत्र में प्रमुख नामों में से एक हैं। ब्राह्मण परिवार में जन्मेउन्होंने बचपन से ही संस्कृतवेद और योग की कला सीखी। अष्टांग योग या अष्टांग विन्यास योग विकसित किया जो प्राचीन शास्त्र योग कोरंटा की शिक्षाओं पर आधारित था। उनके अनुयायियों में मडोनास्टिंग और ग्वेनेथ पाल्ट्रो जैसे बड़े नाम शुमार थे।

बीकेएस. अयंगर

साल 1918 को बेल्लुर में जन्मे बीकेएस अयंगर या बेल्लूर कृष्णमाचार्य सुंदरराज अयंगर बचपन में कई बीमारियों से पीड़ित थे फिर योग के मार्ग पर चलना शुरू किया। पश्चिम में हठ योग की शिक्षा को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद मेंउन्होंने इस प्राचीन कला के साथ प्रयोग करना शुरू किया और एक नया रूप विकसित किया जिसे आज हम अयंगर योग के नाम से जानते हैं। 'अंयगर योगके नाम से उनका एक योग का स्कूल भी है। इस स्कूल के माध्यम से उन्होंने दुनियाभर के लोगों को योग के प्रति जागरूक किया था। साल 2004 में 'टाइम मैगजीनने उनका नाम दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली लोगों में शुमार किया गया था। इसके अलावा उन्होंने पतंजलि के योग सूत्रों को नए सिरे से परिभाषित किया। 'लाइट ऑन योगके नाम से उनकी एक किताब भी हैजिसको योग बाइबल माना जाता है।

धीरेन्द्र ब्रह्मचारी

भारत में योग को लोकप्रिय बनाने के लिए टीवी उपयोग करने वाले पहले व्यक्ति साल 1924 में मधुबनी में जन्मे धीरेंद्र ब्रह्मचारी। वो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योग शिक्षक थे। भारत के बेहद विवादास्पद योग गुरु हैं। उन्होंने दिल्ली के स्कूलों और योग को विश्वयातन योग आश्रम में योग को शुरू करवाया। उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी भाषा में कई किताबें लिखकर योग को बढ़ावा दिया है। जम्मू में उनका एक आलीशान आश्रम भी है।

स्वामी राम

साल 1925 में उत्तराखंड में जन्मे स्वामी राम ने विदेशों में भारतीय यौगिक क्रियाओं का प्रत्यक्ष प्रदर्शन करके दिखाया। वो भारतीय योग शास्त्र में प्रसिद्ध योग निद्रा में पारंगत थे। बहुत कम उम्र में ही करवीर पीठ के शंकराचार्य बने। उन्होंने हिमालय की गहन गुफाओं में ध्‍यान कियाअनेक चमत्कारी साधु-संतों से भेंट की। उनका अपने शरीर पर इतना नियंत्रण था कि वो अपने दिमाग की तरंगों को मनचाहा आकार दे सकते थे। जब उन्होंने अपने दिल में खून के बहाव को कुछ देर तक अपनी इच्छा के अनुसार रोक लिया तो डॉक्टर और वैज्ञानिक हैरान रह गए। उनकी आत्मकथा 'लिविंग विथ हिमालयन मास्टर्सबहुत प्रसिद्ध है। इसमें उन्होंने अनेक चमत्कारी संतों का उल्लेख किया है। उन्होंने हिमालयन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगिक साइंस एंड फिलॉसफी की स्थापना भी की।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव

1957 में मैसूर में जन्मे एक रहस्यवादी व्यक्तित्व और लोकप्रिय गुरू सद्गुरु जग्गी वासुदेव। ईशा योग के संस्थापक हैं। एक संस्था जो दुनिया भर में विभिन्न योग कार्यक्रम करती है। जिन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों को योग का ज्ञान देने में बिताया है और अपनी संस्था के माध्यम से लोगों की मदद करते हैं।

रामदेव

साल 1964 में हरियाणा में जन्में बाबा रामदेव युवावस्था में ही संन्यास लेने का संकल्प किया साल 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। 2003 से टीवी में हर सुबह बाबा रामदेव के योग के कार्यक्रम देखने के बाद बहुत से समर्थक उनसे जुड़े। योग को जन-जन तक पहुंचाने में बाबा रामदेव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ की स्थापना की ब्रिटेन, अमेरिका, नेपाल, कनाडा और मॉरीशस में भी पतंजलि योगपीठ की शाखाएं।

योग के लाभ

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिकवैज्ञानिक प्रमाण दर्शाते हैं कि योग तनावमानसिक स्वास्थ्यजागरूकतावजन घटाने और अच्छी नींद में सहायक है। तो आप भी अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करें।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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