9 साल की Age में Matric और 22 में IIT Bombay में Professor,Tathagat Avatar Tulsi अब बेरोजगार क्यों?

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बुद्ध की धरती से रिश्ता रखने वाला एक ऐसा नाम जिसमें महज़ पांच साल की उम्र में ही गणित के बड़े-बड़े समीकरण पलक झपकते ही हल कर देने की अद्भुत प्रतिभा थी। जिसने महज़ 9 साल की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और इसी के चलते उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। हालांकि, सीबीएसई बोर्ड के नियम के चलते 14 साल से कम की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा देने के लिए उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी और फिर बिना इंटरमीडियट पास किए, ग्रेजुएशन में दाखिला लिया और ग्रेजुएशन के तीनों सालों की परीक्षा एक साथ देकर महज़ 11 साल की उम्र में तथागत ने ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की, उसके बाद पीएचडी पूरी की और बॉम्बे आईआईटी में प्रोफेसर बना। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि आज वो होनहार लड़का बेरोज़गार है। आज कहानी तथागत अवतार तुलसी की...

साल 1994 मई का महीना... जनसत्ता अखबार में बिहार के गया जिले के खिजरसराय के एक बच्चे के लिए खबर छपती है। जिसकी हेंडिंग पर लिखा था ‘बिहार के कोख में पल रहा एक और विलक्षण गणितज्ञ’...  इसमें उस आश्चर्य का बखान किया गया था कि कैसे तथागत कम उम्र में ही गणित के मुश्किल सवालों को हल कर देते थे। उस दौर में आधुनिकता के इतने साधन न होने के बाद भी इस बात की चर्चा बिहार के साथ ही पूरे देश में बहुत जल्द होने लगी। इस ख़बर के बाद, 3 जून को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने तथागत को मिलने बुलाया। लालू ने उन्हें कुछ नकद प्रोत्साहन राशि और एक कंप्यूटर देने का वादा दिया जो बाद में उन्हें मिला भी... सुर्ख़ियों में आने के बाद 

तथागत को सुलभ इंटरनेशनल संस्था नाम के एक एनजीओ ने आर्थिक मदद दी और दिल्ली बुला लिया। जहां उन्हें हॉली हर्ट पब्लिक स्कूल में 6ठी क्लास में दाख़िला मिल गया। साल 1995 में तथागत जब दिल्ली पहुंचे तब उनकी उम्र 7 साल की थी। उनकी प्रतिभा के देखते हुए स्कूल की तरफ़ से 14 साल से कम उम्र में उन्हें मैट्रिक की परीक्षा देने के लिए अनुमति मांगी गई थी, हालांकि बोर्ड के एज रिलेटेड रूल्स के चलते सीबीएसई ने साफ मना कर दिया कि ऐसा नहीं हो सकता। फिर साल 1996 में लोकसभा का चुनाव हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके बाद तथागत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की। वाजपेयी के सहायक सचिव टीएन माकन ने भी कैलकुलेटर लेकर आधे घंटे तक उनकी जांच की और हैरान हो गए। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें केवल इतना कहा कि 'देखते हैं हम इसमें क्या कर सकते हैं'।

उसके कुछ महीने बाद 5 नवंबर, 1996 को दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल पीके दवे और साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्री एसआर बोम्मई ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तथागत अवतार तुलसी को केवल 9 साल की उम्र में मैट्रिक परीक्षा देने की छूट दे दी। हालांकि, इसके बाद भी सीबीएसई ने कुछ रिप्लाई नहीं दिया। अब नौबत कोर्ट तक आ पहुंची थी और इसी प्रकरण में वो राम जेठमलानी से मिले। चूंकि, राम जेठमलानी ने भी 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री हासिल की थी, जबकि उस वक़्त वकालत की प्रैक्टिस शुरू करने के लिए 21 साल की उम्र ज़रूरी थी। तो ऐसी सिचुएशन को समझते हुए जेठमलानी ने तथागत के मामले में रुचि ली और पेशेवर वकील मुकुल रोहतगी से मुलाकात करवाई और आखिर में दिल्ली हाईकोर्ट ने तथागत अवतार तुलसी को नौ साल की उम्र में मैट्रिक परीक्षा देने की छूट दे दी और कोर्ट ने 30 मई, 1997 को सभी बच्चों के साथ तथागत का रिज़ल्ट भी जारी करने का आदेश दिया। बिहार बोर्ड ने वो रिज़ल्ट 3 जून, 1997 को जारी किया। इस अचीवमेंट पर तथागत अवतार तुलसी का नाम पहली बार 'गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया। 

इस रिकॉर्ड के बाद, साल 1997 में दूरदर्शन के 50 साल पूरे होने के अवसर पर दूरदर्शन ने उन्हें ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा ’ गाने में कंप्यूटर चलाते हुए फिल्मांकित भी किया था। 

उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए तथागत ने 6 सितंबर, 1997 को बिहार के तत्कालीन राज्यपाल और पटना यूनिवर्सिटी के चांसलर एआर किदवई से मुलाक़ात की। उन्होंने उनसे बिना इंटर की परीक्षा दिए ग्रेजुएशन करने की छूट देने की मांग की।जिसके बाद पटना यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल ने तथागत का इंटरव्यू लिया और 26 फ़रवरी, 1998 को इंटरमीडिएट की परीक्षा पास किए बिना ग्रेजुएशन करने की मंज़ूरी उन्हें मिल गई। लेकिन उस वक्त भी ग्रेजुएशन के तीनों सालों की परीक्षा एक साथ देने के लिए वे पटना हाईकोर्ट पहुंच गए। कोर्ट ने 1 अप्रैल, 1998 को एक साथ ग्रेजुएशन के तीनों साल की परीक्षा देने का आदेश दे दिया। इस तरह, साल 1998 में ही 11 साल की उम्र में तथागत ने ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी कर ली। तुलसी ने 68.5 फीसदी अंक के साथ फ़ीज़िक्स ऑनर्स की परीक्षा पास कर ली। 

उसके बाद, तथागत ने एक बार फिर पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और तब बिहार के कार्यवाहक राज्यपाल रहे बीएम लाल से मुलाक़ात कर एमएससी के दोनों साल की परीक्षा एक ही साल में देने की अनुमति मांगी। इसके लिए दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के फ़िज़िक्स के प्रोफ़ेसरों की एक टीम ने 20 मई, 1999 को तथागत अवतार तुलसी का इंटरव्यू लिया। उनकी रिकंम्डेशन के बाद तथागत को छूट मिल गई और तथागत ने 28 नवंबर, 1999 को 70 फ़ीसदी से ज़्यादा अंकों के साथ एमएससी की परीक्षा पास कर ली। उस समय उनकी उम्र महज़ 12 साल थी। इस अचीवमेंटके बाद उनका नाम एक बार फिर से 'गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में शामिल किया गया। 

इसके बाद तथागत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 15 साल की उम्र में इंडियन इन्सटीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर से ‘ क्वांटम कंप्यूटर’ सबजेक्ट पर पीएचडी करनी शुरू की, जो 21 साल में पूरी हो गई। इसके बाद 22 साल की उम्र में आईआईटी बॉम्बे में वो असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए और साल 2013 में उनकी नौकरी पक्की हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईआईटी में नौकरी के बाद से ही उनकी नींद अनियमित हो गई थी। ये समस्या साल 2013 में कुछ ज्यादा ही बढ़ गई, जिसके बाद डॉक्टर ने उन्हें आराम की सलाह दी। जनवरी 2014 से तथागत ‘एक्सट्रा आर्डिनरी लीव’ पर चले गए, जो संस्थान ने उन्हें दिसंबर 2017 तक दी। तथागत के मुताबिक, इस बीच उन्होंने महसूस किया कि उनकी परेशानी की वजह मुंबई का उमस भरा मौसम है। जिसके आधार पर उन्होंने आईआईटी दिल्ली ट्रांसफर के लिए अर्जी भी दी थी, जिसे आईआईटी एक्ट के नियम के आधार पर ठुकरा दिया गया। आपको बता दें कि आईआईटी एक्ट के अकॉर्डिंग, देश में किसी और आईआईटी में ट्रांसफर नहीं होता, आपने जिस भी आईआईटी में जॉब ज्वाइन की, वहीं आपको ताउम्र नौकरी करनी होगी। इसके अलावा उन्होंने छुट्टी पर रहते वक्त ही साल 2015 से आईआईटी दिल्ली, पटना और कानपुर में भी नौकरी के लिए अप्लाई किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

31 जुलाई 2019 को एक पत्र जारी करके आईआईटी बॉम्बे ने तथागत अवतार तुलसी को नौकरी से हटाने की सूचना दी है। पत्र के मुताबिक तथागत को ‘संस्थान से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और अलग-अलग समय पर संस्थान द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं करने की वजह’ से नौकरी से हटाया जा रहा है। तथागत को अपना पक्ष रखने के लिए 31 जनवरी 2019 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने 15 फरवरी को दिया। लेकिन संस्थान उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और 22 जून को संस्थान के बोर्ड ऑफ गर्वनर की मीटिंग में तथागत को नौकरी से हटाने का फैसला लिया गया।

तथागत अवतार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपनी नौकरी बचाने की अपील की है। उनका कहना है कि जिस तरह से साल 2004 में आईएएस और आईपीएस का स्वास्थय आधार पर कैडर ट्रांसफर का प्रावधान किया गया है, उसी तरह आईआईटी एक्ट में भी बदलाव लाए जाएं।

शायद तथागत की कहानी हमें बच्चों के अतिमहत्वाकांक्षी ना होने और उम्र के हिसाब से सामान्य विकास का सबक भी सिखलाती है। ये तो विशेषज्ञों के लिए गहन शोध का विषय है, फिलहाल तथागत को अपनी समस्या के निदान की पीएम से भरपूर उम्मीद है। उनका कहना है कि जल्द ही अगर उनकी स्थिति पर विचार नहीं किया गया तो इस मानसिक तनाव का असर उनके स्वास्थ्य पर और नकारात्मक होगा, जो पहले से ही खराब चल रहा है।

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