आपदा में जिंदगियां बचाने निकल पड़ते हैं NDRF के जवान, जानें इसे कब बनाने का आया ख्याल

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अरब सागर से आया शक्तिशाली तूफान बिपरजॉय ने गुजरात, राजस्थान के अलावा कई राज्यों में भयानक असर दिखाया। जिसकी वजह से सैकड़ों पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कई घरों को नुकसान पहुंचा। हालांकि अब तक इस तूफान से एक भी व्यक्ति की मौत की खबर नहीं आई है। इस भयंकर तूफान से निपटना इतना आसान नहीं था, इसकी जद में हजारों-लाखों लोग थे। बिपरजॉय तूफान से पहले और उसके बाद रेस्क्यू में लगे NDRF के जवानों ने मुश्किल स्थितियों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। जिसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। लोग NDRF की खूब तारीफ कर रहे हैं, हालांकि NDRF का ये कोई पहला रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं है। इससे पहले फरवरी में तुर्की के भूकंप और इसी महीने ओडीसा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे के राहत बचाव कार्य की खबरों में NDRF का नाम खूब सुनाई दिया था।

हर साल देखा गया है कि देश में बाढ़, भूकंप या किसी भी तरह की आपदा आती है तो NDRF की टीम जिस तेजी के साथ जान माल को बचाने का काम करती है, वो किसी देवदूत की तरह लगती है। इस टीम के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाते हैं। अब सवाल उठता है आखिर ये NDRF है क्या और कैसे बनी...तो वो भी आपको बता देते हैं।

NDRF का मतलब नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स है। 90 के दशक के आखिरी में इंडिया को एक ऐसी फोर्स की जरूरत महसूस होने लगी, जो तमाम तरह की आपदाओं में जाकर लोगों को बचा सके। अमेरिका जैसे देशों में इस तरह की फोर्स पहले से ही बढ़िया काम कर रही थी। तभी इंडिया को भी इस तरह की फोर्स को तैयार करने का ख्याल आया। इस फोर्स के बनने कि एक वजह ये भी है कि साल 1999 के ओडिशा के सुपर साइक्लोन, 2001 के गुजरात भूकंप और वर्ष 2004 में आई सूनामी के बाद भारत ने मन बना लिया कि वो भी इस तरह की फोर्स बनाएगा, जो आपदा के दौरान लोगों को राहत पहुंचाने में एक्सपर्ट हो फिर साल 2006 में यूपीए सरकार में आठ बटालियनों के साथ NDRF बनकर तैयार हुई। NDRF गृह मंत्रालय के अंडर आता है।

मौजूदा समय में इनकी क्षमता क्या है...वो भी बता देते हैं फिलहाल NDRF की क्षमता 16 बटालियनों की है, लेकिन 5 साल पहले इसकी क्षमता 12 बटालियनों की थी। हर बटालियन में 1149 जवान होते हैं। NDRF की प्रत्येक बटालियन 18 सेल्फ कंटेन्ड स्पेशलिस्ट सर्विस करने में सक्षम है। 45 बचाव कर्मियों की एक टीम में इंजीनियर, इलेक्ट्रीशियन, टेकनिशियन, पैरामेडिक्स, मेडिकल प्रोफेशनल और डॉग स्क्वॉड शामिल हैं। प्राकृतिक आपदा के दौरान सहायता प्रदान करने के अलावा, NDRF परमाणु, जैविक, रासायनिक और रेडियोलॉजिकल आपदा जैसी संकट की स्थितियों को भी संभाल सकता है। आपदा की स्थिति में ये 16 सेंटर देश के हर राज्य को कवर करते है। वहीं NDRF में सीधी भर्ती नहीं होती है बल्कि NDRF में अद्धसैन्य बलों से बटालियनों को डेपुटेशन के आधार पर तैनात किया जाता है।

देशभर में NDRF के 16 सेंटर हैं, जहां इनकी अलग-अलग बटालियन तैनात रहती हैं। इन सभी जगहों पर ट्रेनिंग की व्यवस्था है। हालांकि इन सेंटरों के कुछ जगहों पर ही खास ट्रेनिंग होती है, जिसमें सभी बटालियनों के जवानों को भेजा जाता है। मोटे तौर पर NDRF देश विदेश में 100 से ऊपर आपरेशंस को अंजाम दे चुकी है। जिसमें उसने अनगिनत लोगों की जान बचाई है। इसके अलावा NDRF स्थानीय लोगों को भी बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग देने का काम करती है ताकि वो आपदा के दौरान वालिंटियर के रूप में मदद कर सकें। NDRF हर साल हजारों लोगों को इस काम के लिए ट्रेनिंग देती है। वहीं NDRF की तर्ज पर राज्य सरकारों ने भी SDRF यानी स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स का गठन किया है।

 

 

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