बिना सोचे-समझे लगाए गए पौधे राहत नहीं मुसीबत देते

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बिना सोचे-समझे लगाए गए पौधे राहत नहीं मुसीबत देते
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प्रदूषण के खिलाफ प्रमुख हथियार - पेड़

एयर पॉल्यूशन के खिलाफ लड़ने का प्रमुख हथियार – पेड़। जीवन के लिए बेहद जरूरी। लेकिन बस्तियां बसाने के लिए इन्हें काट दिया जाता है। जिससे एयर पॉल्यूशन का स्तर बढ़ता है। पर गुजरते वक्त के साथ एनवायरमेंट को लेकर जागरूकता बढ़ी है। लोग पौधे लगाने का काम कर रहे हैं। दिल्ली हो, लंदन हो या पेरिस, दुनिया के तमाम शहरों में हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पॉल्यूशन को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इन सब बातों से अलग साल 2023 में जापान में हजारों पेड़ों को काटने को कहा गया क्योंकि इन पेड़ों की वजह से तमाम लोगों में तबीयत बिगड़ रही थी। एक नई रिसर्च में बताया गया कि अमेरिका के कैलिफोर्निया के सबसे बड़े शहर लॉस एंजिल्स में पेड़ एयर पॉल्यूशन को कम नहीं बल्कि उसे बढ़ा रहे हैं। लॉस एंजिल्स में वाहनों की आवाजाही को कम किया गया। एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन को प्रयास किए गए। लेकिन पॉल्यूशन का लेवल कम नहीं हुआ।

अमेरिका के साइंटिस्टों ने किया चौंका देने वाले दावा

कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech), कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी (CSU), नेशनल ओशियन एंड एटमॉस्फियर एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) अमेरिका के साइंटिस्टों की एक रिसर्च साइंस जर्नल में छपी हैं जिसमें बताया गया है 'पेड़ों में पाए जाना वाला टरपेनोइड्स (VOC) एनवायरमेंट को खराब कर रहा है।' दरअसल, टरपेनोइड्स एक तरह का VOC यानी volatile organic compounds जो ओजोन और सूक्ष्म कण प्रदूषकों यानी particulate Pollutants को बनाते हैं और एनवायरमेंट को प्रभावित करते हैं।  तापमान बढ़ने पर पेड़ ज्यादा VOC बनाते हैं जिस वजह से लॉस एंजिल्स में एयर पॉल्यूशन बढ़ता है। साइंटिस्टों ने इस रिसर्च के लिए साल 2021 में VOC यानी का concentration (सांद्रता) मापने को मास स्पेक्ट्रोमीटर के साथ कई दिनों तक पूरे लॉस एंजिल्स पर एक प्लेन उड़वाया था। इससे साइंटिस्टों को पता चला कि टरपेनोइड्स VOC ही प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण थे। ये प्रभाव शहर के वनस्पति हिस्सों और सबसे गर्म दिनों में सबसे ज्यादा दिखा। साइंस जर्नल में छपी में ये रिसर्च बताती है कि इतने प्रयास के बावजूद साइंटिस्ट अभी 'ये नहीं पता लगा पाए हैं कि कौन से पेड़ टरपेनोइड्स के सबसे ज्यादा उत्सर्जन का कारण बनते हैं।'

जापान में दिए गए हजारों पेड़ काटने के निर्देश

साल 2023 भी ये बात सामने आई थी कि जापान में देवदार और सरू के पेड़ों से निकलने वाले पराग कणों से लोग बीमार पड़ रहे थे। जापान टाइम्स के मुताबिकजापानी सरकार ने देवदार और सरू के 70,000 पेड़ों को हर साल काटने का फैसला लिया है क्योंकि हर साल हजारों की संख्या में लोग इनकी वजह से हे फीवर की चपेट में आते हैं।

जगह के मुताबिक लगाएं पौधे

बीबीसी की एक खबर के मुताबिक, सभी पेड़ एक समान स्तर पर प्रदूषण खत्म नहीं करते। इसके लिए पहले ये जानना जरूरी है कि कहां किस स्तर का प्रदूषण है और फिर उसके मुताबिक ही वहां पेड़ लगाए जाएं। साथ ही ये समझना भी जरूरी है कि पेड़ हवा की गुणवत्ता बेहतर करते हैंन कि हवा को पूरी तरह साफ करते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि  शहरों की प्लानिंग में पौधरोपण एक अहम हिस्सा हैं। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उस जगह के वातावरण और माहौल को समझकर ही पौधों को लगाएं। बिना सोचे-समझे लगाए गए पौधे राहत से ज्यादा मुसीबत का सबब बन सकते हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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