राहुल गांधी ‘शैडो PM’ बनकर मोदी सरकार पर रखेंगे नजर ?

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18वीं लोकसभा का पहला सेशन शुरू हो चुका है। राहुल गांधी को ‘लीडर ऑफ अपोजिशन’ बनाया गया है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं ने मांग कि है कि इंडिया गठबंधन को एकजुट रखने और नई एनडीए सरकार के कामों पर नजर रखने के लिए शैडो कैबिनेट बनाई जाए। अगर शैडो कैबिनेट बनती है तो राहुल गांधी ही शैडो पीएम होंगे। वैसे तो शैडो कमेटी का कॉन्सेप्ट ब्रिटेन से आया है, जहां से भारत का पार्लियामेंट्री सिस्टम मोटिवेटेड है, लेकिन भारत में ये पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने शैडो कैबिनेट बनाने की बात कही। आइए समझते हैं कि आखिर शैडो कैबिनेट है क्या...

आसान भाषा में शैडो कैबिनेट का मतलब छाया मंत्रिमंडल है। जिस प्रकार इंसानी शरीर की एक परछाई या छाया होती है, जो शरीर के साथ-साथ तो चलती है, लेकिन खुद कुछ नहीं कर सकती है। उसे हमेशा शरीर के हिसाब से ही रहना पड़ता है। ठीक इसी तरह शैडो कैबिनेट सरकार की परछाई होती है, जो सरकार के सामने विपक्ष की एक कैबिनेट होती है। वैसे तो इसके पास कोई फैसले लेने की शक्ति नहीं होती, लेकिन परछाई की तरह ही सरकार पर हर वक्त नजर रखती है और जहां कहीं कोई कमी या गड़बड़ी नजर आए, उसे उजागर करना, उसके लिए संसद में आवाज उठाना। इस व्यवस्था में कोई शैडो रक्षामंत्री, कोई शैडो वित्तमंत्री हो सकता है जो रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्री के कामकाज की निगरानी करे। 

शैडो कैबिनेट का कॉन्सेप्ट कहां से आया ?

शैडो कैबिनेट ब्रिटिश पार्लियामेंट का कॉन्सेप्ट है, जिसका इस्तेमाल ब्रिटेन में विपक्षी सदस्य सरकार की गतिविधि या कामों पर नजर रखने के लिए करते हैं। भारत की संसदीय प्रणाली भी ब्रिटेन की संसद की तर्ज पर काम करती है। ब्रिटिश संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर शैडो कैबिनेट को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, शैडो कैबिनेट चुने हुए वरिष्ठ प्रवक्ताओं की एक टीम होती है। इनका चुनाव लीडर ऑफ अपोजिशन करते हैं। शैडो कैबिनेट के हर सदस्य को इससे जुड़ी जिम्मेदारियां और कुछ विशेष पॉलिसी दी जाती हैं। उनका काम कैबिनेट में अपने समकक्ष से सवाल पूछना और उन्हें चुनौती देना होता है। इस तरह आधिकारिक विपक्ष खुद को एक वैकल्पिक सरकार के तौर पर पेश कर सकता है।

शैडो कैबिनेट दुनिया में कहां-कहां है ?

शैडो कैबिनेट की व्यवस्था आमतौर पर कॉमन्वेल्थ देशों में है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इन देशों ने भी भारत की तरह संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से ही ली है। इन देशों की संसद भी करीब-करीब भारत की तरह ही काम करती है। फिलहाल यूके के अलावा कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में शैडो कैबिनेट सिस्टम है। कनाडा में मौजूदा शैडो कैबिनेट में विपक्ष की कंजरवेटिव पार्टी के मेम्बर्स शामिल हैं और पियरे पॉलिवीयर को विपक्ष का नेता यानी शैडो पीएम चुना गया है। ऑस्ट्रेलिया की शैडो कैबिनेट में विपक्ष की लिबरल पार्टी के मेम्बर्स हैं। यहां पीटर डटन को लीडर ऑफ अपोजिशन चुना गया है। न्यूजीलैंड में लेबर पार्टी के मेम्बर्स ने सरकार के सामने अपनी शैडो कैबिनेट बनाई है। कृष हिपकिंस को इसका मुखिया यानि लीडर ऑफ अपोजिशन चुना गया है।

भारत में कब हुई मांग ? 

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अब तक शैडो कैबिनेट नहीं रही है। लीडर ऑफ अपोजिशन जरूर रहा है। ऐसे में विपक्ष का नेता संसद के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण कमेटी का सदस्य भी होता है। हालांकि साल 2014 में बीजेपी से हारने के बाद कांग्रेस ने पार्टी स्तर पर मोदी सरकार की निगरानी के लिए 7 शैडो कैबिनेट कमेटियां बनाई थीं। जिनका काम पीएम मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में प्रमुख मंत्रालयों के फैसलों और नीतियों पर नजर रखना था। तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को रेलवे और श्रम संबंधी समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। इसी तरह पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी को रक्षा संबंधी मुद्दों पर निगरानी रखने वाली समिति का अध्यक्ष बनाया गया था।

राज्यों में भी हुए प्रयोग ?

केंद्र में भले ही अब तक शैडो कैबिनेट नहीं रही, लेकिन राज्यों ने इस कॉन्सेप्ट को अपनाने की कोशिश की है। साल 2005 में महाराष्ट्र में मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी और शिवसेना ने कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार के खिलाफ शैडो कैबिनेट बनाई थी। इसके अलावा साल 2014 में कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार के खिलाफ राज्य में शैडो कैबिनेट बनाई। इसी तरह साल 2015 में गोवा की एक NGO जेन-नेक्सट ने सरकार के कार्यों पर नजर रखने के लिए शैडो गवर्नमेंट बनाई और अप्रैल 2018 में केरल की सिविल सोसाइटी मेम्बर्स ने पिनरई विजयन की LDF सरकार पर नजर रखने के लिए एक शैडो कैबिनेट बनाई।

BJP और AAP ने भी किया था प्रयास

कांग्रेस के अलावा बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने भी इस प्रयोग में हाथ आजमाया है। इससे पहले बीजेपी ने महाराष्ट्र, गोवा, पंजाब और दिल्ली में ऐसा प्रयास किया था। जहां वो विपक्ष की भूमिका में थे। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद बीजेपी नेता हर्षवर्धन ने भी शैडो कैबिनेट बनाने की घोषणा की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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