Ranikhet : पर्यटन स्थल कैसे बन गया एक बीमारी का नाम?

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'नाम में क्या रखा है?'

शर्म दहशत झिझक परेशानी, नाज से काम क्यूं नहीं लेतीं।

आप वो जी मगर ये सब क्या है, तुम मिरा नाम क्यूं नहीं लेतीं।

शायर जॉन एलिया ने अपने इस शेर में अपनी मोहब्बत से कहा कि तुम मेरा नाम बेफ्रिके से लो। और दुनिया के फेमस राइटर शेक्सपियर ने कहा था 'नाम में क्या रखा है?' नाम - जो आपकी सबसे पहले पहचान दिलाता है। फिर जो नाम आपका हो उसी नाम की कोई बीमारी होती तो आपको कैसा लगता। रानीखेत भारत का बेहद खूबसूरत वादियों से लबरेज, लेकिन रानीखेत के नाम से एक बीमारी भी हैजिससे इस खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट की छवि खराब होती है। ऐसा मानना है। सतीश जोशी का जिन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। जिसमें कहा कि ‘रानीखेत बीमारी’ का नाम बदलकर कुछ और किया जाए। टूरिस्ट प्लेस रानीखेत की छवि खराब हो रही है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को रानीखेत रोग के नाम पर विचार करने और उसका वैकल्पिक नाम सुझाने का निर्देश जारी कर दिया है। अब उत्तराखंड सरकार इस मामले अपना हलफनामा भी दायर करेगी।

क्या है रानीखेत बीमारी?

रानीखेत बीमारी (Virulent Newcastle disease (VN) एक वायरल डिजीज है, जो मुर्गियों और अन्य जंगली पक्षियों में पाई जाती है। इस बीमारी के चपेट में आने से मुर्गियां कमजोर हो जाती हैं। वो खाना-पीना बंद कर देती हैं और कुछ दिन बाद उनकी मौत हो जाती है। इस वायरस की चपेट में आने से 50 से 60 प्रतिशत मुर्गियों या अन्य पक्षियों का मरना तय माना जाता है। ये बीमारी करीब 100 साल पुरानी है। पहला मामला साल 1926 को इंडोनेशिया के शहर जावा में पाया था। इसके बाद साल 1927 में इंग्लैंड के न्यूकैसल अपॉन टाइन शहर में दर्ज हुआ।

टूरिस्ट प्लेस रानीखेत के नाम पर क्यों रखा गया बीमारी का नाम?

अमेरिकी सरकार की NCBI वेबसाइट के मुताबिक धीरे-धीरे ये बीमारी जापान, फिलीपींस, कोरिया, श्रीलंका और भारत समेत अन्य देशों में फैलने लगी। वैज्ञानिकों ने जब इस वायरस को पहचाना तो उन्होंने इसका नाम NDV (Newcastle Disease Virus), बीमारी को 'न्यूकैसल' (Newcastle Disease) नाम दिया। जो इंग्लैंड के शहर न्यूकैसल अपॉन टाइन के नाम पर थी। लेकिन ये बात अंग्रेजों को रास नहीं आई। साल 1928 में जब उत्तराखंड के रानीखेत में मुर्गियों में ये बीमारी फैली तो ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने चालाकी से भारत के इस खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस के नाम पर न्यू कैसल रोग का नाम बदलकर रानीखेत रोग रख दिया। तब से ही मुर्गियों में फैलने वाले इस वायरस को दुनिया के कुछ देशों में रानीखेत के नाम से जाना जाता है।

रानीखेत का ऐतिहासिक महत्व

दो शब्दों से मिलकर बना – रानीखेत। टूरिस्ट प्लेस रानीखेत को ये नाम कैसे मिला। लोक कथाओं के मुताबिक यहां पर राजा सुधार देव ने रानी पद्मिनी का दिल जीता था, जिन्होंने बाद में इस क्षेत्र को अपने रहने के लिए चुना। और इस तरह से इस जगह का नाम रानीखेत हो गया। साल 1869 में अंग्रेजों ने यहां कुमाऊं रेजिमेंट का मुख्यालय बनाया। एक वक्त पर शिमला की बजाय रानीखेत को ब्रिटिश सरकार की गर्मी की राजधानी बनाए जाने पर विचार चल रहा था। यहां 700 साल पुराना झूला देवी मंदिर भी है। ये मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। इसे झूला देवी इसलिए कहते हैं क्योंकि यहां देवी को पालने पर बैठा देखा जाता है। माना जाता है कि झूला देवी अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती हैं और इच्छायें पूरी होने के बाद भक्त यहां तांबे की घंटी चढाते हैं। अब बीमारी का नाम बदलने की इच्छा पुरी होगी की ये तो वक्त बताएगा।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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