साउथ कोरिया में रोबोट नहीं झेल सका काम का प्रेशर, फिर हुआ वो जो कभी नहीं हुआ

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साउथ कोरिया में रोबोट नहीं झेल सका काम का प्रेशर, फिर हुआ वो जो कभी नहीं हुआ
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अक्सर ऐसी खबरें आती रहती हैं कि काम का ज्यादा प्रेशर होने की वजह से किसी सरकारी या प्राइवेट ऑफिस के कर्मचारी ने सुसाइड जैसा गलत कदम उठा लिया है। यहां तक कि सेना और पुलिस में काम करने वाले लोगों को लेकर भी कई बार ऐसी खबरें आ चुकी है कि छुट्टी न मिलने या काम के दबाव के चलते मौत को गले लगा लिया। लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि काम का ज्यादा प्रेशर होने की वजह से एक रोबोट आत्महत्या कर लेगा। जी हां ये थोड़ा चौंका देने वाला मामला है, लेकिन सच है। ऐसा एक मामला दक्षिण कोरिया से सामने आया है।  

दरअसल, दक्षिण कोरिया में आए दिन कंपनियों के कर्मचारी वर्कलोड को लेकर प्रोटेस्ट करते नजर आते हैं। पिछले हफ्ते ही दक्षिण कोरिया की सबसे प्रमुख कंपनियों में से एक सैमसंग के कर्मचारी वर्क लोड को लेकर धरने पर चले गए। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों पर टारगेट पूरा करने का जबरदस्त दबाव रहता है। दक्षिण कोरिया सरकार ने कर्मचारियों के बढ़ते सुसाइड को देखते हुए पिछले साल सप्ताह में काम का घंटा 68 से घटाकर 52 किया था। इसके अलावा वर्क लाइफ बैलेंस जैसी चीजों को लेकर लगातार कैंपेन चला रही है, इसके बावजूद सुसाइड की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। 

घरों में भी रोबोट का हो रहा इस्तेमाल 

दक्षिण कोरिया में सिर्फ कंपनियों में ही नहीं लोगों के घरों में भी रोबोट का इस्तेमाल हो रहा है। दक्षिण कोरिया में वरिष्ठ नागरिकों के बीच अकेलापन एक बढ़ता हुआ सामाजिक मुद्दा है। दक्षिण कोरियाई सरकार ने बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने के लिए एआई का इस्तेमाल कर एक सोशल रोबोट जैसी गुड़िया का आविष्कार किया है। जिससे वरिष्ठ नागरिक बात कर सकें और उन्हें दवाएं लेने जैसी जरूरी बातों की याद गुड़िया दिला सके। इसके पीछे की वजह ये है कि दक्षिण कोरिया दुनिया का ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा रोबोट का इस्तेमाल होता है। यहां हर 10 कर्मचारियों में एक रोबोट है और इनका इस्तेमाल हर तरह की कंपनियों में होता है। यहां तक कि कई सरकारी दफ्तरों में भी रोबोट की सेवाएं ली जाती हैं। दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले दक्षिण कोरिया में 7 गुना ज्यादा रोबोट वर्कर्स हैं। अमेरिका और यूरोप भी उससे इस मामले में पीछे हैं। दक्षिण कोरिया में रोबोट का ज्यादा इस्तेमाल होने की वजह वहां की जनसंख्या है। 

दक्षिण कोरिया में जनसंख्या का डेटा चिंताजनक 

बता दें किसी भी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए औसत प्रजनन दर का 2.1 होना जरूरी है। लेकिन दक्षिण कोरिया में जनसंख्या का डेटा चिंताजनक बना हुआ है। दक्षिण कोरिया में दुनिया की सबसे कम प्रजनन दर है। प्रजनन दर को इस आधार पर मापा जाता है कि एक महिला के जीवनकाल में कितने बच्चे होंगे। दक्षिण कोरिया में साल 2023 में प्रति महिला ये औसत 0.72 दर्ज किया गया, जो साल 2022 के मुकाबले 0.78 से भी कम है। देश में लगातार कई सालों में प्रजनन दर में गिरावट देखी जा रही है। 

रोबोट का पहला सुसाइड मामला

इस बीच दक्षिण कोरिया में रोबोट की आत्महत्या का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी के होश उड़ा दिए हैं। दक्षिण कोरिया के गुमी सिटी काउंसिल ने खुलासा किया है कि उनका टॉप एडमिनिस्टेटिव ऑफिसर रोबोट मृत पाया गया। काउंसिल ने कहा है कि ऐसा लगता है कि रोबोट ने खुद को साढ़े छह फुट ऊंची सीढ़ियों से नींचे फेंक दिया। इंटरनेशल एजेंसी के मुताबिक, इस घटना से स्थानीय लोग सदमे में हैं। इसे किसी रोबोट का पहला सुसाइड कहा जा रहा है। इस रोबोट का निर्माण बेयर रोबोटिक्स कंपनी ने किया था। ये रोबोट म्युनिसिपल कारपोरेशन के काम में मदद कर रहा था। रोबोट करीब एक साल से गुमी शहर के लोगों की प्रशासनिक कामों में मदद कर रहा था। रिपोर्ट की मानें तो रोबोट सुबह 9 से शाम 6 बजे तक काम करता था और इसका अपना पब्लिक सर्विस कार्ड भी था। 

 काम की वजह से तनाव में था रोबोट !

ये भी कहा जा रहा है कि रोबोट काम की वजह से तनाव में था। दूसरे रोबोट की अपेक्षा इससे ज्यादा काम लिया जा रहा था। क्योंकि इसे एलिवेटर ऑपरेशन का भी काम दिया हुआ था। चश्मदीदों ने रोबोट को गिरने से पहले इधर-उधर घूमते हुए देखा, जैसे कि कुछ गड़बड़ है। यही वजह है कि लोगों का कहना है कि रोबोट ने ज्यादा काम के दबाव के कारण ये कदम उठाया है। रोबोट की खुदकुशी के बाद साइंटिस्ट अब इसे जांच और रिचर्स का विषय मान रहे हैं। रोबोट के टुकड़ों को इकट्ठा कर लिया गया है और एनालिसिस के लिए कंपनी भेजा गया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि इस मेहनती पब्लिक सर्वेंट ने इस तरह का व्यवहार क्यों किया? क्या रोबोट के लिए काम बहुत कठिन था। 

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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