गर्मी में आपको भी गुस्सा आता है, वजह जानते हैं?

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जब बॉडी हो जाती डिहाइड्रेटेड

गर्मी के मौसम में अगर आपको किसी पर बहुत तेज गुस्सा आ रहा हो, उससे लड़ने का मन करे, मामूली सी बात पर इतनी चिड़चिड़ाहट हो रही हो, कि लगे अब इसका सिर फोड़ना ही है। तो समझ लिजिएगा आपको थोड़ा सा ठहरने की जरूरत है। आपको एक गिलास ठंडे पानी पीने और थोड़ गहरी सांस लेने की जरूरत है। क्योंकि आपकी बॉडी डिहाइड्रेटेड हो चुकी है। मतलब ये कि आपके शरीर में पानी और ऑक्सीजन की कमी हो गई है, और इन सबकी वजह गर्मी है।

मौसम और मूड, दोनों का गहरा नाता

जब कभी भी अचानक मौसम सुहावना हो जाता है, तो हमारा दिल भी खुशनुमा हो जाता है। घर से बाहर निकलने, यारों और रिश्तेदारों के साथ घूमने का मन करता है। पर अगर मौसम में तल्खी हो, यानी गर्मियों में जैसे-जैसे पारा चढ़ता है, लू के थपेड़े झुलसा रहे हों तो शरीर भी थकावट महसूस करने लगता है। आज बात गर्मी और गुस्से की। कैसे इन दोनों का एक-दूसरे से गहरा नाता है? और कैसे आप इस भयानक गर्मी में अपने को कूल रखें। निजी और सामाजिक रिश्तों पर पड़ने वाले असर को बचाएं?

तापमान बढ़ने के साथ बढ़ता तनाव

अमेरिका में एरिजोना रिसर्च सेंटर की एक स्टडी के मुताबिक 'हाई टेम्परेचर की वजह से लोग गुस्सा हो जाते हैं और रोड पर ज्यादा हॉर्न बजाने लगते हैं, एक-दूसरे से झगड़ा करते हैं।' 'गन वायलेंस अर्काइव' की एक रिपोर्ट बताती है कि 'साल 2022 में पूरे अमेरिका में मास शूटिंग की 84% घटनाएं सिर्फ गर्मी के मौसम में हुईं।' गर्मी के दौरान रोड एक्सीडेंट, रोडरेज और आपराधिक गतिविधियों में इजाफा हुआ। अमेरिका की एरिजोना रिसर्च सेंटर की रिसर्च के मुताबिक तापमान बढ़ने से हिंसा 4% और सामूहिक हिंसा में 14% तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं स्पेन में रोड एक्सीडेंट का खतरा 7.7% तक बढ़ा है। इसके साथ ही कई और साइकोलॉजिकल साइंस स्टडीज ये कहती हैं कि गर्मी में तापमान बढ़ने के साथ तनाव, डिप्रेशन, एंग्जाइटी, लोगों से लड़ाई-झगड़ा, रिश्तों में मनमुटाव बढ़ता है।

ऐसा क्यों होता है?

एक वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक एक्सपर्ट का मानना हैं कि ब्लड, पानी और ऑक्सीजन को सबसे ज्यादा कंज्यूम हमारा ब्रेन करता है। जब शरीर में ब्लड, पानी और ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो इसका सबसे ज्यदा असर ब्रेन पर पड़ता है। मतलब ये कि शरीर के बाकी सभी फंक्शन का स्लो हो जाना। गर्मी के मौसम में जब पारा चढ़ता है, तो शरीर में पानी और ऑक्सीजन का लेवल कम होता है। डिहाइड्रेशन की समस्या होने की संभावना रहती है। जब बॉडी डिहाइड्रेड होती है। तो ब्रेन में सोचने-समझने की शक्ति और सहनशीलता भी कम होने लगती है।

कोई भी रोडरेज पर हो सकता उतारू

वहीं जब गर्मी बढ़ती है तो शरीर को ठंडा रखने के लिए नसों में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है। इस दौरान हमारा हार्ट भी तेजी से काम करने लगता है। हार्ट बीट 2.5 गुना तक बढ़ जाती है। इस वजह से हम अपनी भावनाओं पर पूरा कंट्रोल नहीं रख पाते और आवेश में आकर फैसला ले लेते हैं। इसी वजह से जब तपती दोपहरी में गाड़ी चलाते हुए आप भले अपने गुस्से पर काबू कर लें, लेकिन किसी भी तरह की मेंटल कंडीशन से जूझता कोई रैंडम शख्स आकर आपसे लड़ाई मोल ले सकता है, रेड लाइट पर फ्रस्टेट होकर लगातार हॉर्न बजा सकता है, रोडरेज पर उतारू हो सकता है। कोई भी बिना वजह किसी भी बात पर आपसे बहस कर सकता है।

गुस्सा आने से क्या होता है?

•   लोगों से रिश्ते बिगड़ सकते हैं।

•   किसी परेशानी में फंस सकते हैं।

•   प्रोडक्टिव काम नहीं कर सकते हैं।

•   पूरा दिन दिमाग ठीक नहीं रहता।

•   जरूरी काम करना भूल सकते हैं।

•   खाना खाने का मन नहीं करता है।

•   शरीर में एनर्जी नहीं रहती है।

•   तबीयत खराब हो जाती है।

•   दूसरों से बात करने का मन नहीं करता है।

तो फिर गर्मी में मन शांत रहे तो क्या करें?

•   दोपहर में सड़क पर निकलने से बचें।

•   बाहर से आएं तो तुरंत किसी बहस से बचें।

•   किसी पर गुस्सा आएं तो गहरी सांस लें।

•   भरपूर पानी पीएं, ताकि पानी की कमी न हो पाए।

•   शराब और मसालेदार खाना खाने से बचें।

•   हो सके तो ठंडे स्पेस में रहें।

•   रात को अच्छी नींद लें।

•   हॉबीज पर ध्यान लगाएं

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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