क्या होती है कैंसर वैक्सीन और इससे कितना फायदा होगा ?

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दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक है कैंसर। हार्ट डिजीज के बाद दूसरे नंबर पर सबसे जानलेवा बीमारी भी है। इस बीमारी से निपटने के लिए लगातार कोशिश जारी हैं। इसी क्रम में दुनिया की पहली कैंसर वैक्सीन (Cancer Vaccine) का ट्रायल इंग्लैंड (England) के नेशनल हेल्थ सर्विस में हजारों लोगों पर होने जा रहा है, जिससे लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। यहां 30 से ज्यादा अस्पतालों में लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी। इसके बाद वैक्सीन का टेस्ट दूसरे देशों में भी किया जाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, कैंसर हर साल करीब 1 करोड़ लोगों की जान लेता है यानी दुनिया की हर छठी मौत कैंसर के कारण हो रही है। बड़ी मुश्किल ये है कि इतनी तरक्की के बाद भी इसका सटीक इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। हालांकि एंटी कोरोना वैक्सीन की तरह ही MRNA तकनीक का इस्तेमाल करके इस वैक्सीन को बायोफार्मास्युटिकल कंपनी बायोएनटेक और जेनेटिक ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। ये वैक्सीन मरीज के प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने में सक्षम बनाने, उन्हें खत्म करने और उन्हें दोबारा फैलने से रोकते हैं। माना जा रहा है कि ये वैक्सीन फेफड़े, मूत्राशय और अग्नाशय समेत कई तरह के कैंसर पर प्रभावी हो सकती है। ये वैक्सीन बीमारी के पहले नहीं बल्कि बीमारी के बाद ही दी जाएगी। मरीज की कैंसर पीड़ित कोशिका में मौजूद खास म्यूटेशन की स्टडी करने के बाद वैक्सीन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम बनाती है।

आंत के कैंसर पीड़ित को लगाई पहली वैक्सीन

सबसे पहले आंत के कैंसर से पीड़ित 55 साल के इलियट फेबवे को ये वैक्सीन लगाई गई है। फैबवे की सर्जरी कर ट्यूमर को हटाया गया और कीमोथेरेपी के बाद कैंसर कोशिकाओं का सैंपल जर्मनी में बायोएनटेक की लैब में भेजा गया। उनकी कोशिकाओं में 20 म्यूटेशन की पहचान की गई, जिसके बाद व्यक्तिगत वैक्सीन बनी और यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल बर्मिंघम में उन्हें लगाई गई। फेबवे को वैक्सीन लगने के बाद हल्का बुखार आया। वैज्ञानिक इसके बाद भी कई तरह के कैंसर वैक्सीन का अध्ययन कर रहे हैं और वो अलग-अलग कैंसर में कैसे काम कर सकते हैं।  

वैक्सीन का टेस्ट 2027 तक होगा पूरा 

इंग्लैंड में ही स्किन कैंसर की वैक्सीन का भी टेस्ट चल रहा है। उम्मीद है कि वैक्सीन का परीक्षण साल 2027 तक पूरा हो जाएगा। पहले इंग्लैंड के ही 30 से ज्यादा सेंटरों पर इसके टेस्ट किए जाएंगे। फिर जर्मनी, बेल्जियम, स्पेन और स्वीडन में 200 से ज्यादा मरीजों को परीक्षण के लिए भर्ती किया जाएगा। इन्हें वैक्सीन के 15 डोज दिए जाएंगे। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस वैक्सीन के पारंपरिक कीमोथेरेपी के मुकाबले कम साइड इफेक्ट होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये वैक्सीन आंत, फेफड़े, मूत्राशय, अग्न्याशय और गुर्दे के कैंसर के इलाज में प्रभावशाली साबित हो सकती है। हालांकि, इस पर अभी और स्टडी की जरूरत बताई गई है। वैक्सीन को मरीज के कैंसर कोशिकाओं का अध्ययन करने के बाद ही विकसित किया जाएगा। इसे हर मरीज के लिए अलग-अलग तरीके से बनाया जाएगा। कैंसर कोशिकाओं में होने वाले म्यूटेशन के हिसाब से वैक्सीन में बदलाव किए जाएंगे। इसे ब्लड और कैंसर कोशिकाओं के सैंपल लेकर तैयार किया जा सकता है। 

कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का विषय

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं क्योंकि साल 2022 में भारत में 14 लाख कैंसर के नए मामले रिपोर्ट किए गए हैं जिनमें से 9 लाख लोगों नें इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा दी है. WHO की नई रिपोर्टे के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा कॉमन कैंसर बनकर सामने आया है. पुरूषों में होंठ का कैंसर, मुंह का कैंसर और लंग कैंसर के सबसे ज्यादा मामले देखे गए हैं. जिनमें कुल कैंसर मामलों में 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. वही महिलाओं की बात की जाए तो ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर 27 और 18 फीसदी मामले आ रहे हैं.

सर्वाइकल कैंसर 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, साल 2018 में दुनिया में पांच लाख 70 हजार महिलाएं HPV वायरस से संक्रमित होकर सर्वाइकल कैंसर से ग्रसित हुईं। इनमें से 3 लाख, 11 हजार की मौत हो गई। भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के करीब 1 लाख 25 हजार नए मामले आते हैं और इनमें से 77 हजार को जान गंवानी पड़ती है। इसकी एक बड़ी वजह लोगों में वैक्सीन को लेकर जागरूकता की कमी है। अगर सबको HPV वैक्सीन लगाई जाए तो इनमें से ज्यादातर महिलाओं की जान बच सकती है। सर्वाइकल कैंसर को काफी हद तक वैक्सीन के जरिए रोका जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक करीब 95% सर्वाइकल कैंसर की वजह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। इसे रोकने के लिए भारत में साल 2008 से गार्डासिल और सर्वारिक्स नाम की दो वैक्सीन उपलब्ध हैं।

 कैंसर के कारण

WHO के मुताबिक, खानपान का खराब पैटर्न, बिगड़ी हुई लाफस्टाइल, शराब का सेवन और धूम्रपान कैंसर होने के बड़े कारण हैं. कुछ मामलों में जेनटिक वजह से भी ये बीमारी हो जाती है. ऐसे में लोगों को खानपान को ठीक रखना जरूरी है. इसके लिए फास्ट फूड से परहेज और शराब के सेवन को कम करने की सलाद दी गई है.

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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