Burnout Syndrome : भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक थकावट

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लोग अपनी क्षमता से ज़्यादा काम करने लगते हैं और थकान महसूस होते-होते एक वक्त ऐसा आता है जब लगता है कि वो पूरी तरह से चुक गए हैं। उनमें काम करने की बिलकुल इच्छा नहीं होती है। इस स्थिति को बर्नआउट सिंड्रोम कहा जाता है।

उबरने में लगते हैं कई साल

"सिर्फ थकान जैसा नहीं लगता हैबल्कि आप जो काम कर रहे हैं और जिन लोगों के साथ काम कर रहे हैंउन सबसे विरक्ति का भाव पैदा हो जाता है। शरीर एकदम इनकार करने लगता है और काम करना बंद कर देता है। ऐसे लोग अपने प्रोफेशन तक को बदल लेते हैं। लेकिन इस खास परिस्थिति से उबरने में सालों लगता है।"

दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ रहे मामले

भावनात्मकमानसिक और शारीरिक थकावट की स्थिति को बर्नआउट कहा जाता है। ये तब होता हैजब हम नकारात्मक भावनाओं,  काम और तनाव से इतना घिर जाते हैं कि खुद को नियंत्रित करना ही मुश्किल हो जाता है। ये हमें असफलता और अस्वीकृति की भावना महसूस कराता है। ये सिर्फ भावनात्मक संघर्ष नहीं हैबल्कि इसका शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बिट्रेन हिस्टोरीयन अन्ना कैथरिना स्केफ़नर की किताब 'एक्झॉस्टेड: एन ए टू जेड फॉर दे वेयरीके मुताबिक भारत के साथ दुनिया भर में बर्नआउट के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

बर्नआउट होने की छह अहम वजहें 

·        बहुत ज्यादा कामकाजी दबाव

·        दुनिया में आजादी की कमी

·        काम का पर्याप्त सम्मान नहीं

·        कामकाजी मूल्यों में अंतर का होना

·        दुनिया में उपेक्षा का शिकार होना

·        सामाजिक मूल्यों का कम होना

दुनिया भर में एक तरह की भागमभाग है

दुनिया भर में एक तरह की भागमभाग हैअव्यवस्थित माहौल है। चाहे वो प्रोफेशनल वर्ल्ड हो,  सोशल वर्ल्ड या फिर वर्चुअल वर्ल्ड। चारों तरफ ये साफ दिखता है कि हर आदमी अपनी कैपेसिटी से ज्यादा काम कर रहा है। इसका असर दिमाग और शरीर पर पड़ना स्वभाविक ही है। लोगों में लग्जरी लाइफ जीने की चाहत बढ़ रही है,  वो ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं। कुछ लोग थोड़े समय में ही कई प्रमोशन पाना चाहते हैं। इन सबके चलते लोग अपनी क्षमता से ज़्यादा काम करने लगते हैं और थकान महसूस होते-होते एक वक्त ऐसा आता है जब लगता है कि वो पूरी तरह से चुक गए हैं। उनमें काम करने की बिलकुल इच्छा नहीं होती है। इस बर्नआउट सिंड्रोम की स्थिति से शरीर पर गंभीर असर पड़ता है।

इम्यून सिस्टम होता कमजोर 

बर्नआउट होने से सबसे पहले इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। लगातार चिंता और तनाव से घिरे रहने से इम्यून सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है। इस वजह से संक्रमणों और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अगर आप इनसे सुरक्षित रहना चाहते हैं तो तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें और डाइट में ऐसी खान-पान की चीजों को शामिल करेंजो इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करने में मदद कर सकती हैं।

बार-बार मन में आते बुरे ख्याल

बर्नआउट की स्थिति में शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी काफी ज्यादा थकावट महसूस करता है और इससे बार-बार मन में बुरे-बुरे ख्याल आते रहते हैंजिस वजह से नींद आने में भी मुश्किल हो जाती है। अगर आपकी नींद बिगड़ती है तो इसके कारण शरीर कई अन्य बीमारियों की चपेट में भी आ सकता है, इसलिए जिंदगी में पॉजिटीविटी लाएं। पॉजिटीविटी लाने के लिए अगर आपके काम में कोई खामियां निकालता है तो उस आलोचना को रचनात्मक रूप से स्वीकार करके खुद पर काम करें। हालात जैसे भी हो हमेशा मुस्कुराएं और खुद की सराहना करें। अपने आसपास रह रहे लोगों से बात करें।

शरीर का मेटाबॉलिज्म होता प्रभावित 

बर्नआउट शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता हैजिससे एसिड रिफ्लक्स और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी पाचन से जुड़ी समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है। पाचन में दिक्कत न हो इसके लिए सही वक्त पर भोजन करें। अपने डेली रूटीन को सही करें और व्यायाम करें।

मांसपेशियों खिंचाव और दर्द की समस्या

बर्नआउट के कारण शरीर की मांसपेशियों खिंचाव और दर्द की समस्या हो सकती हैखासकर गर्दन और कंधों में। इस स्थिति में सिर दर्द और माइग्रेन होना भी आम है, इसलिए बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करें।

हार्मोनल के बिगड़ता संतुलन   

बर्नआउट के कारण हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। बता दें कि हार्मोन शरीर के सभी कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं और जब ये असंतुलित हो जाते हैं तो इनका शरीर की प्रक्रियाओं पर बुरा असर पड़ता है।

Disclaimer :

ये सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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