पूनम पांडे ने इस सर्वाइकल कैंसर के लिए फैलाई अपनी ही मौत की खबर

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, सर्वाइकल कैंसर के शुरुआत में लक्षण बहुत साफ नहीं पता चलता हैं, ये ही कारण है कि ज्यादातर बार, महिलाओं को इसके गंभीर होने के बाद ही कैंसर का पता चलता है।

एक्ट्रेस, मॉडल और अपने बोल्ड अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली पूनम पांडे ने 32 साल की उम्र में मौत की झूठी खबर। इसका कारण उन्होंने सर्वाइकल कैंसर को बताया है। एक फरवरी को फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने भी अंतरिम बजट 2024-25 में सर्वाइकल कैंसर के वैक्सीनेशन को बढ़ाने का ऐलान किया था।  स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसको लेकर बताते हैं कि महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के जोखिमों को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। 

सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में होने वाला गंभीर प्रकार का कैंसर माना जाता है। सर्विक्स यानी कि आपके गर्भाशय जिसे कोख भी कहा जाता है, उसका निचला हिस्सा होता है, जो योनि से जुड़ता है। सर्वाइकल कैंसर के अधिकतर मामले ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण के कारण होते हैं। एचपीवी एक आम वायरस है, जो संभोग के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। WHO के मुताबिक, यौन रूप से सक्रिय, कम से कम आधे लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी एचपीवी संक्रमण हो सकता है, हालांकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इस संक्रमण को कम कर देती है।

ये तो बात हुई सर्वाइकल कैंसर के बारे में, अब आपको इसके लक्षणों के बारे में बताते हैं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 35 से 44 वर्ष की उम्र के लोगों में सर्वाइकल कैंसर का सबसे अधिक निदान होता है। हालांकि, आंकडे ये भी कहते हैं कि स्क्रीनिंग और एचपीवी वैक्सीन के कारण इस दर में गिरावट आ रही है। सभी लोगों को इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, सर्वाइकल कैंसर के शुरुआत में लक्षण बहुत साफ नहीं पता चलता हैं, ये ही कारण है कि ज्यादातर बार, महिलाओं को इसके गंभीर होने के बाद ही कैंसर का पता चलता है।

लेकिन कुछ लक्षण ऐसे है, जोकि सामान्यता और सर्वाइकल कैंसर के मदेदनजर ध्यान देते रहना चाहिए। इसमें मासिक धर्म के बीच में या सेक्स के बाद असामान्य रक्तस्राव का ध्यान देना चाहिए। योनि से स्राव जोकि सामान्य से अलग दिखता या गंध देता है। इसपर ध्यान देना चाहिए।पेल्विक हिस्से में अक्सर दर्द बने रहना।बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता और पेशाब के दौरान दर्द होना। यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो जांच के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। हालांकि उल्लेखनीय है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। अगर सही उम्र में इस वैक्सीन को लगवा लिया जाए, तो इस गंभीर बीमारी को 98 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। 

दुनिया के कई देशों में इस बीमारी से बचने के लिए मुफ्त वैक्सीन लगवाई जाती है। डॉक्टर्स के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर एक रोकथाम बीमारी है। अगर सही से पता चल जाए, तो इसका इलाज मुमकिन हैं। सर्वाइकल कैंसर को वैक्सीनेशन प्रोग्राम से रोका जा सकता है। जिसका वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट में जिक्र किया। सरकार सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए 9 से 14 वर्ष के आयु वर्ग की लड़कियों के टीकाकरण को प्रोत्साहित करेगी। वहीं, अगर आंकड़े देखें, तो पता चलता है कि कैसे बीते दशको में ये तेजी के साथ बढ़े हैं। भारत में, सर्वाइकल कैंसर 123,907 मामले के साथ, 18.3% की दर के साथ तीसरा सबसे आम कैंसर है। रिपोर्ट के अनुसार 9.1% की मृत्यु दर के साथ ये महिलाओं में मौत का दूसरा प्रमुख कारण भी है।

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