Type-3 Diabetes : ज्यादा भूख-प्यास लगने से खो सकती याददाश्त ?

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क्या होती है डायबिटीज?

'जब हम खाना खाते हैं तो हमारी बॉडी कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर ग्लूकोज में बदलती है। पैंक्रियाज से इंसुलिन नाम का एक हार्मोन निकलता हैजिसकी मदद से हमारे शरीर की कोशिकाएं शुगर को सोख कर ऊर्जा बनाती हैं। जब हमारे शरीर में इंसुलिन का बनना कम हो जाता है या वो ठीक से काम नहीं करता है तो कोशिकाएं खून में मौजूद शुगर की मात्रा को सोखने में असमर्थ हो जाती हैं।'

किसी को कभी भी हो सकती है डायबिटीज

डायबिटीज या फिर कहें मधुमेह से जिसकी वजह से दुनियाभर में हर साल करीब 10 से 12 लाख लोगों की मौत हो जाती है। वहीं भारत डायबिटीज के मरीजों के मामले में चीन के बाद दूसरा नंबर पर है। डायबिटीज होने से अंधापनकिडनी फेल और पैरों के निष्क्रिय होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ये एक ऐसी बीमारी है जो किसी को कभी भी हो सकती है। पिछले कुछ सालों से बच्चों से लेकर युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। पिछले 40 सालों में डायबिटीज की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या चार गुना बढ़ गई है। भारत में बड़ी संख्या में लोगों को मालूम ही नहीं उन्हें डायबिटीज है या नहीं। 

क्या कहती है रिपोर्ट ?

'भारत में करीब 10 करोड़ लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं और 13 करोड़ लोगों को प्री-डायबिटीज हैं।' प्री-डायबिटीज ऐसी स्थिति को कहते हैं जिसमें भविष्य में डायबिटीज होने की आशंका बेहद ज्यादा होती है। अभी टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मरीज हैं लेकिन धीरे-धीरे टाइप-3 डायबिटीज के मरीज भी बढ़ रहे है। जो और भी खतरनाक है। अभी इसके मामले कम है। टाइप-3 डायबिटीज किसी को हो जाए तो सीधा ब्रेन से संबंधित डिसऑर्डर होने लगता है।

टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण 

टाइप-1 डायबिटीज क्या होता है। इसमें इम्यून सिस्टम ही इंसुलिन बनाने वाली बीटा सेल्स को नष्ट कर देता हैजिससे इंसुलिन का प्रोडक्शन प्रभावित होता है।

   बार-बार पेशाब आना।

   सामान्य से ज्यादा भूख-प्यास लगना।

   वजन का तेजी से घटना या बढना।

   हर वक्त थकान रहना।

   आंखें कमजोर होना।

   घाव का धीरे-धीरे ठीक होना।

टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण 

बॉडी इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाती है और धीरे-धीरे पैंक्रियाज में इंसुलिन बनना कम हो जाता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं।

   टाइप 1 डायबिटीज के सभी लक्षणों के साथ ही

   हाथ-पैर में झुनझुनी रहना।

   स्किन का रूखापन होना भी होते हैं।

 

 

 

क्या होती है टाइप-3 डायबिटीज ? 

टाइप -1 और टाइप -2 से खतरनाक टाइप-3 डायबिटीज होती है। अल्जाइमर की तरह ही टाइप 3 डायबिटीज भी दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचाती है। टाइप 3 डायबिटीज में याददाश्त कमजोर होने लगती है। इस तरह की समस्या होने पर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। एक्सपर्ट कहते हैं कि, आमतौर पर माना जाता है कि याददाश्त की कमजोरी का कारण अल्जाइमर की बीमारी होती हैलेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। कई मामलों में टाइप 3 डायबिटीज भी इस समस्या का कारण हो सकती है।

टाइप-3 डायबिटीज के लक्षण 

जब शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस ब्रेन में सूजन या ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाता है तो इससे टाइप-3 डायबिटीज होती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के ब्रेन पर असर पड़ता है जिससे मेमोरी लॉस होने लगती है। ये परेशानी धीरे-धीरे होती है। बढ़ती उम्र के साथ समस्या गंभीर रूप लेती जाती है। अगर इलाज न हो तो ये अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी स्थिति में ला सकती है।

   काम में ध्यान लगाने में परेशानी।

   सोचने की क्षमता कम होना।

   बार-बार चीजों को भूल जाना।

   किसी मामले पर राय न बना पाना।

   रोजाना के कुछ कामों को भूल जाना।

टाइप-3 डायबिटीज से बचाव 

टाइप-3 डायबिटीज के बचाव के लिए आपको रोजाना फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए। सही लाइफस्टाइलसंतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज से हम कई बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं. डायबिटीज आनुवांशिक कारणों से भी होता है इसलिए कई बार इसे रोकना मुश्किल हो सकता है लेकिन एहतियात बरतकर हम इसके खतरे को कम कर सकते हैं. रोजाना आधे घंटे चलकर भी डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है. 

डिसक्लेमर :

ये जानकारी सिर्फ साधारण सूचना के लिए हैं। इसे पेशेवर सलाह के रूप में नहीं लें। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा डॉक्टर के पास जाएंउनसे ही सलाह लें।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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