Bad Cholesterol जो नसों को जमा देता है

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क्या होता है कोलेस्ट्राल?

एक तरीके का फैटजिसे लिवर तैयार करता है। स्पाइसी और ऑयली फूड,  जंक फूड जितना ज्यादा खाया जाताउतना ये भी बनता। अगर जरूरत से ज्यादा बन जाएतो नसों में जम जाता। फिर ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं होता। इस वजह से हार्ट को पंप करने में परेशानी होती। ऐसे में हार्ट अटैक और हार्ट से जुड़ी तमाम परेशानियां होने लगती है। ये कोलेस्ट्रॉल हैजो ज्यादा बढ़ जाए तो इसका नेगेटिव इम्पैक्ट दिल से लेकर लीवर तक और ब्लड प्रेशर में पड़ता है।

कितने तरह के कोलेस्ट्राल?

जब हमारी बॉडी में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती हैतो उसे अच्छा माना जाता है। लेकिन बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ना नुकसानदायक होता है। बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने पर गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ने लगता है। इन दोनों का बैलेंस होना सबसे बढ़िया माना जाता है। हॉपकिन्स मेडिसिन की रिपोर्ट की मुताबिक हमारी बॉडी में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं।

लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी बैड कोलेस्ट्रॉल

LDL (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल के तेजी से बढ़ने के दो कारण होते हैं। पहला गलत खानपान और दूसरा फिजिकल एक्टिविटी नहीं करना। हम जो कुछ भी खाते हैं। उसे पचना जरूरी होता है। मौजूदा वक्त में लोग जंक फूड तो जमकर खाते हैं। लेकिन न एक्‍सरसाइज करते हैंन वॉक करते हैं और न ही कोई और ऐसा कोई काम करते हैंजिससे खाने को पचाया जा सके। अगर LDL कोलेस्ट्रॉल की मात्रा हमारी बॉडी में बढ़ जाए तो हमारे सीने में दर्द और भारीपन महसूस हो सकता है। सांस फूलनाहाई बीपीपैरों में सूजन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसे कंट्रोल करना जरूरी है। क्योंकि इसके बाद हार्ट और लीवर में भी गंभीर समस्याएं हो सकती है। ये चिपचिपा पदार्थ होता है जो नसों में जम जाता है और ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है।

हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी गुड कोलेस्ट्रॉल 

 

HDL (हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन) ये आपके ब्लड वेसल्स में से एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। ये बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है। इन कारणों से ये हार्ट डिजीज से बचाने में भी मदद करता है। लेकिन अगर ये अपने तय मानक से कम या ज्यादा हो जाए तो गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का नॉर्मल लेवल क्या होता है

बॉडी का टोटल कोलेस्ट्रॉल  mg/dL - मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर

नॉर्मल - 200 mg/dL   

बॉर्डर लाइन - 201 से 239 mg/dL

खतरा - 240 mg/dL से ज्यादा

 कोलेस्ट्रॉल 

नॉर्मल - 100 mg/dL

बॉर्डर लाइन - 101 से 129 mg/dL

खतरा - 160 से 189 mg/dL

कोलेस्ट्रॉल

नार्मल - 40 mg/dL से 59 mg/dL तक

बेहतर - 60 mg/dL

 

खतरा – 40 mg/dL से कम

ऐसे कंट्रोल करें कोलेस्ट्रॉल

बिजी लाइफस्टाइल और एक्सरसाइज न करने की आदतें सबसे बड़ा कारण होती है नसों और खून में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की। लेकिन इसके अलावा भी कई और आदतें हैं जिनके कारण ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है।  

·       हेल्दी फूड खाएं

·       एक्सरसाइज करें

·       वजन कंट्रोल रखें

·       ध्रूमपान न करें

·       शराब के सेवन से बचें

·       डाइट पर ध्यान दें

·       भरपूर नींद लें

 

Disclaimer : ये सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में न लें। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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