1957 में बनी Delhi की तिहाड़ जेल सुर्खियों में छाई, देखें Inside Story

Home   >   खबरमंच   >   1957 में बनी Delhi की तिहाड़ जेल सुर्खियों में छाई, देखें Inside Story

110
views
तिहाड़ की हाईटेक सिक्योरिटी में गैंगस्टर की नृशंस हत्या
तिहाड़ जेल में आखिर किसका चल रहा राज ?
क्या सरकार कस पाएगी गुनहगारों पर शिकंजा ?
क्या गैंगस्टरों और जेल प्रशासन की कोई सांठगांठ है ?
कैसे तिहाड़ जेल अपराधियों का आश्रम बनी ?
क्या लॉरेंस-गोल्डी बराड़ चला रहे जेल में सिंडिकेट ?

ऐसे कई सवाल है जो इन दिनों इस तिहाड़ जेल के ईर्द-गिर्द घूम रहे हैं....क्योंकि हाल ही में एक गैंग्स्टर टिल्लू ताजपुरिया की नृशंस हत्या कर दी गई... जिसके वीडियो भी सामने आए है.... जो हम आपको नहीं दिखा सकते.. क्योंकि वो काफी भयावह है....हत्या के बाद कई सवाल अब जेल प्रशासन पर खड़े हो रहे हैं... आखिर कैसे पुलिस की नाक के नीचे ऐसी खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया...और पुलिस तमाशबीन खड़ी रही.... ऐसा नहीं कि पहली बार ऐसा हुआ है इससे पहले भी कई बार तिहाड़ जेल सुर्खियों में आया है....चाहे आप नेता की मसाज की चर्चा हो या फिर नटवरलाल सुरेश चंद्रशेखर के कारनामे हों... वैसे  कहा तो ये भी जाता है कि तिहाड़ जेल के आस-पास कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता... लेकिन कहावत अपनी जगह और हकीकत अपनी जगह.... बल्कि अब हकीकत ये है कि इस जेल में हर वो गुनाह मुमकीन है जिसे सोचकर ही होशफाक्ता हो जाते हैं....गुनाहों के बीच गैंगवॉर और कत्ल की खबरें आम बात हो गई है....जिसने तिहाड़ के माथे पर कलंक लगा दिया है....एक्शन तो होता हैजैसे टिल्लू ताजपुरिया वाले केस में हुआ एक सहायक अधीक्षक समेत अब तक कुल 9 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है...लेकिन सवाल है आखिर कैसे देश की सबसे सुरक्षित जेल में जरायम का बड़ा खेल खेला जा रहा है....



तिहाड़ जेल देश की नहीं बल्कि साउथ एशिया की सबसे सुरक्षित जेल मानी जाती है... इसी तिहाड़ जेल में देश के सबसे खूंखार, कुख्यात, मोस्टवांटेड, आतंकी और जरायम की दुनिया के बादशाह बंद है.....इन कैदियों में अक्सर रंजिश देखने को मिलती है...खून से दुश्मनों संग होली खेलना तो आम बात है..साल दर साल तिहाड़ की चारदिवारी से छन-छन कर आती कभी गैंगवार, तो कभी क़त्ल की खबरें..... कैदियों के ऐशो-आराम की तस्वीरें और भ्रष्टाचार के आरोप में पूरे के पूरे जेल के नप जाने के खबरों ने तिहाड़ की साख पर बट्टा लगा दिया है..... लेकिन तिहाड़ के इस स्याह सच में और गहरे उतरने से पहले तिहाड़ के इतिहास को जान लेना जरूरी है....


साल 1957
दिल्ली के पश्चिम में तिहाड़ की इमारत बन कर तैयार हुई
चाणक्यपुरी से 7 किमी. दूर तिहाड़ा गांव की 400 एकड़ में बनी
तिहाड़ को साउथ एशिया का सबसे बड़ा कारागार कहा जाता है
चहारदिवारियों के अंदर कैद अपराधी गुनाहों की सजा काटते है
दीवारें इतनी मोटी हैं कि बाहर निकलना, दांतों तले उंगलियां चबाना जैसा है
तिहाड़ में 9 सेंट्रल जेल हैं, बाकि सेंट्रल जेल रोहिणी और मंडोली में शामिल हैं
कैदियों का बंटवारा नाम, लिंग, क्राइम और सजा के आधार पर किया गया है


करीब 400 एकड़ में फैले इस जेल का नाम तब पहली बार पूरी दुनिया में अच्छी वजह से चर्चाओं में आया जब देश की पहली महिला IPS अफसर किरण बेदी यहां कि इंस्पेक्टर जनरल बनी थीं.... उस दौरान किरण बेदी ने तिहाड़ जेल की तकदीर ही बदल दी थी..... किरण बने सही मायने में पाप से घृणा करो, पापी से नहीं वाली धारणा को यहां अमल में लाने की कोशिश की और इसका नाम तिहाड़ जेल से बदल कर तिहाड़ आश्रम कर दिया......उनके अच्छे प्रयासों का ही असर था कि उस समय 66 कैदियों को उनकी क्षमता और अच्छे चाल-चलन को देखते हुए देश की कई नामी कंपनियों में नौकरी मिली... और एक बंदी ने तो जेल में रहते हुए UPSC का इम्तेहान भी पास कर लिया और नई शुरुआत की....लेकिन समय बदलता गया और हर गुजरती तारीख के साथ तिहाड़ की साख मानों फिर से जुर्म के अंधेरे में गुम होने लगी.....


तिहाड़ के दामन पर लगे दाग
तिहाड़ की साख पर लगे कई धब्बे ऐसे भी हैं... जिन्हें शायद कभी मिटाया नहीं जा सकता...चाहे दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन का मालिश मसाज कराना हो...या जेल को अय्याशी का अड्डा बनाना हो.... मशहूर नटवरलाल सुकेश चंद्रशेखर के तिहाड़ जेल के किस्से को कोई नहीं भूल सकता... क्योंकि उसको रहने के लिए एक अलग कमरा था, जहां से वो अपनी गर्लफ्रेंड जैकलीन से बात करता था.... घंटों दोनों वीडियो चैट भी करते थे....लेकिन जैकलीन को कभी ये पता ही नहीं चल पाया कि सुकेश जेल के अंदर से चैटिंग कर रहा है... तिहाड़ जेल में 16 मार्च 1986 को एक ऐसा काम हुआ जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था... कहते हैं कि तिहाड़ में बंद चार्ल्स शोभराज जिसे बिकनी किलर कहा जाता है उसने यहां रहते हुए एक बार ऐसा जाल बट्टा फैलाया कि जेल के मुलाजिमों को अपने जन्मदिन के नाम पर केक के बहाने नशा देकर जेल से ही फरार हो गया.....तिहाड़ के इतिहास में ऐसी लापरवाही का ये पहला मामला था..... फिर धीरे-धीरे समय बदला और लापरवाही के कई मामले सामने देखने को मिले.... अब बात उस स्याह सच की जिसके बारे में यकीन करना मुश्किल है...यानी अपराधियों, माफियाओं का जेल से चलता जुर्म का काला साम्राज्य....गैंगस्टर जेल से ही बैठे-बैठे अपना क्राइम सिंडिकेट चला रहे है...

India Today की खबर के मुताबिक के मुताबिक तिहाड़ में इन दिनों कम से कम 20 बड़े और 30 छोटे क्रिमिनल गैंग्स से जुडे खूंखार अपराधी कैद हैं....जो जेल से ही जुर्म काला साम्राज्य चलाते हैं.....और लगातार कारोबारियों फोन कर रंगदारी मांगते हैं.... रंगदारी न देने पर जेल से ही सुपारी देकर उनका नामो निशान मिटाने की बात करते हैं.. कहा तो जाता है जेल की सिक्योरिटी इतनी टाइट है कि यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता....क्योंकि
 
चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मियों का कड़ा पहरा रहता है
चप्पे-चप्पे पर लगे अंदर-बाहर 7500 CCTV कैमरे
जैमर, अलार्म, हाई सिक्योरिटी सेल का इंतजाम है


मगर सच्चाई पूरी इसके इतर है....तिहाड़ में मौजूद क्षमता से ज्यादा कैदी और भ्रष्टाचार का घुन हर इंतजाम को अक्सर नाकाफी साबित कर देता है....फिलहाल तिहाड़ जेल परिसर में कुल नौ सेंट्रल जेल मौजूद हैं...जबकि इसके अलावा तिहाड़ जेल की दो शाखाएं रोहिणी और मंडोली भी हैं....
साल 2019 के तथ्यों के हवाले से बात करें तिहाड़ जेल क्षमता कुल 10 हज़ार 26 कैदियों की है
जबकि इस जेल में फिलहाल कुल 17 हज़ार 534 यानी यानी लगभग 18 हजार कैदी बंद है
ये आंकड़ा अपने-आप में क्षमता के मुकाबले करीब दोगुनी ज्यादा है


तिहाड़ जेल में देश के सबसे खूंखार, कुख्यात, मोस्टवांटेड, आतंकी बंद है... जिनमें सबसे पहले नाम बड़े अपराधियों में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन का आता है... और आतंकी में यासीन मलिक का....इसके अलावा नामी गैंगस्टर और सरगनाओं में नीरज बवानिया, काला जठेड़ी, नासिर उर्फ छेनू, अनिल भाटी, नवीन बाली, रोहित चौधरी,  रोहित मोई, हाशिम बाबा, दीपक बॉक्सर, संपत नेहरा, हड्डी, अट्टे, किकड़ी, जैसे तमाम नाम शामिल हैं.....जो जेल में रहते हुए भी अपना क्राइम सिंडिकेट चला रहे है.. ऐसा नहीं कि सरकार की इस पर नजर नहीं जाती है... नजर भी जाती है और एक्शन भी होता है.. जैसे सुकेश वाले मामले में 100 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी.. जिनमें कई अफसर रैंक के अधिकारी शामिल थे....
 
लेकिन अब कहा जाता है कि ये जेल एक ऐसी जगह बन चुकी है....जहां कोई शरीफ आदमी भी अंदर जाकर बदमाश बन जाता है...... रुपयों के दम पर यहां हर वो चीज़ मिलती है....जिसकी आप ख्वाहिश कर सकते हैं....जेल के बाहर और जेल के अंदर गैंग्स्टरों का शह-मात का सिलसिला जारी रहता है... चाहें वो लॉरेंस बिश्नोई गैंग, काला जठेड़ी गैंग, जितेंद्र गोगी गैंग, राजस्थान का आनंदपाल गैंग और सुब्बे गुर्जर गैंग हो या फिर देवेंद्र बंबीहा गैंग, नीरज बवानिया गैंग, टिल्लू ताजपुरिया गैंग, संदीप ढिल्लू गैंग और हरियाणा का कौशल जाट गैंग हो.... हाई सिक्‍योरिटी जेल में अक्‍सर हिंसा होती है.....
 
तिहाड़ जेल का सनसनीखेज सच
अगस्‍त 2015 में चार कैदियों ने सरिये से साथी कैदी को मार डाला
अक्‍टूबर 2015 में दो गुटों के बीच खून-खराबे में दो कैदी मारे गए
जनवरी 2016 में एक कैदी को जेल ले जाते समय साथियों मार डाला
मार्च 2017 में गैंगवार हुई, चले धारदार हथियार में 17 कैदी घायल हुए
सितंबर 2021 में जेल नंबर-3 में खूनी झड़प में तीन कैदी घायल हुए
अगस्त 2021 को अंकित गुर्जर नाम के कैदी की भी हत्या कर दी गई
दिसंबर 2022 को धर्मवीर के कैदी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी
जुलाई 2022 को राजेश कैदी पर दो कैदियों ने चाकू से हमला किया
जून 2022 को जेल में हुए खूनखराबे में 15 कैदी घायल हुए
मई 2022 को कैदियों के बीच चाकूबाजी में जेल के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट पर हमला
 
7500 आंखों वाली एशिया की सबसे सुरक्षित जेल अब पूरी तरह बदनाम हो चुकी है... सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर जेल प्रशासन क्या कर रहा है... तिहाड़ में मौत के हथियारों का आखिर राज क्या है.. क्यों कैदियों के हौसले इतने बुलंद है कि वो किसी का भी मर्डर करने से पीछे नहीं हटते....कैसे देश की सबसे महफूज जेल में मर्डर हो रहे हैं... ये सवाल अभी भी बना हुआ है.... बीते चंद महीनों में हुए गैंगवॉर ने तिहाड़ जेल की साख पर बट्टा लगा दिया है..... अब तिहाड़ जेल प्रशासन कैसे इन सब गैंगवॉरों को रोकता है.. ये देखने वाली बात होगी....
कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!