आजम खान के ठिकानों पर इनकम टैक्स रेड: अल जौहर ट्रस्ट पर भी सर्चिंग, ये है घटना का सच्चा पर्दाफाश | Manchh न्यूज़

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UP की सियासत में जुर्म की बिसात की फेहरिस्त काफी लंबी है. इसकी मिसालें अक्सर मिलती रहतीं हैं. पर आजम खान से जुड़ी सियासत, जुर्म की कहानी और कानूनी दांव-पेंच बेहद उलझे है. इन दिनों फिर से आज़म खान सुर्खियों में छाए हुए है. दरअसल समाजवादी पार्टी के सीनियर लीडर आजम खान और उनके करीबी लोगों के ठिकानों पर इनकम टैक्स की टीम ने छापा मारा है. दावा है कि आजम खान को करीब तीन हजार करोड़ रुपए डोनेशन में मिले, लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट
को उन्होंने इसकी जानकारी न देकर करोड़ों रुपए की टैक्स की चोरी की है.

आजम खान के करीब 30 ठिकानों पर इनकम टैक्स की टीम ने छापा मारा. लखनऊ, रामपुर, मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, नोएडा, सीतापुर समेत कई शहरों में छापेमारी की गई, इस रेड के केंद्र में था जौहर ट्रस्ट- इसके सभी 13 ट्रस्टियों के घरों-कार्यालयों पर भी आईटी टीमें पहुंचीं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर ये जौहर ट्रस्ट विवाद है क्या, जिसको लेकर आजम खान एक बार फिर घिरते नजर आ रहे हैं.

रामपुर में 2006 में मुहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को स्थापित किया गया. सपा शासन के दौरान ये एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के तौर पर बनी, जो आजम खान का एक सपना थी. खुद मुलायम सिंह यादव ने इस यूनिवर्सिटी की नींव रखी थी.
आजम खान पर आरोप है कि इस यूनिवर्सिटी की स्थापना में अपने रसूख का इस्तेमाल किया. सरकार में मंत्री रहने के दौरान उन्होंने इस यूनिवर्सिटी के नाम पर स्थानीय किसानों की जमीन का अधिग्रहण कराया.
यूनिवर्सिटी के संचालन के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया, जिसका नाम मौलाना मुहम्मद अली जौहर ट्रस्ट रखा गया. इस ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान हैं. उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा ट्रस्ट की सचिव हैं. जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद शुरू से ही था.
आजम खान पर आरोप लगा है कि अपने ट्रस्ट के जरिए उन्होंने ग्रामीणों की जमीन पर जबरन कब्जा किया. यूनिवर्सिटी में जमीन को शामिल करने के लिए धन-बल और बाहुबल का प्रयोग किया गया.
आरोप है कि 2012-2017 के अखिलेश सरकार में यूनिवर्सिटी को अनुचित लाभ दिए गए. ऐसा दावा है कि रिसर्च सेंटर के लिए साढ़े तीन एकड़ जमीन 100 रुपये हर साल के लिए लीज पर दे दी गई.
मामला साल 2017 में योगी आदित्यनाथ के यूपी में सत्ता में आने के बाद गरमाया. सरकार की जांच में पता चला कि यूनिवर्सिटी को केवल साढ़े 12 एकड़ जमीन अधिग्रहण की अनुमति दी. लेकिन, ट्रस्ट ने 173 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. सरकार ने इस अधिग्रहण को अवैध माना है.  

रामपुर के वर्तमान नगर विधायक आकाश सक्सेना ने मौलाना मुहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित जौहर यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाए थे. जिसकी जांच सरकार ने रामपुर प्रशासन को दी, जांच में पाया गया कि जौहर ट्रस्ट को हर साल एक अप्रैल को रामपुर डीएम को प्रोग्रेस रिपोर्ट देने की शर्त रखी गई थी. ट्रस्ट की ओर से कोई रिपोर्ट प्रशासन को नहीं मिली. ट्रस्ट के नाम पर जमीन खरीद में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई. इसके बाद रामपुर जिला प्रशासन की ओर से ट्रस्ट के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कराया गया. साथ ही आकाश का आरोप है कि ट्रस्ट के बहाने आजम खान ने करोड़ों रुपए चंदा लिया, लेकिन इसका ब्योरा उन्होंने इनकम टैक्स वालों को नहीं दिया. इस तरह से उन्होंने टैक्स चोरी कर ली. इसीलिए उन्होंने CBDT से अली जौहर ट्रस्ट की संपत्ति की जांच की मांग की है. आकाश की शिकायत पर ही आजम खान, उनके परिवार और उनके करीबी लोगों पर देश के 30 ठिकानों पर छापेमारी जारी है. इनकम टैक्स की इस रेड में अब तक क्या मिला है, इसकी जानकारी नहीं आई है. अब आगे क्या सामने निकलकर आता है ये देखने होगा.
कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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