Actor Amol Palekar : अहंकार की वजह से छिना 'पिया का घर'

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एक्टर अमोल पालेकर (Actor Amol palekar) जो फिल्मों में सुपरमैन नहीं, बल्कि आम आदमी थे, ऑफिस जाते, ट्रेन और बस में चलते। आम भाषा बोलते। एक्टिंग में ताजगी, सादापन और वास्तविकता।

‘बासु चटर्जी ने लीड रोल का ऑफर दिया, मैंने हां कर दी। फिल्म का प्रोडक्शन राजश्री प्रोडक्शन कर रहा था। बासु दा ने कहा कि ताराचंद बड़जात्या से मिल लो। मैंने पूछा क्यों? उन्होंने कहा कि, ये फिल्म वही बना रहे हैं तो उनसे आपको जाकर मिलना चाहिए। मैंने मना कर दिया तो बासु दा ने मुझसे वजह पूछी।

'लीड रोल के लिए आपने मुझे चुना'

मैंने कहा आपने मुझे लीड रोल के लिए चुना है। तो आप मुझे उनसे मिलवाएं और उनसे मेरा ठीक से परिचय करवाएं। फिल्म के प्रोड्यूसर से मिलने के लिए कतार में खड़े होकर नहीं जाना चाहता, वो भी तब जब आपने मुझे फिल्म में कास्ट करने का मन बना लिया हो।’

'मैं ऐसा ही हूं'

‘मेरी बात सुनकर बासु दा सहम गए। उन्होंने मुझसे कहा कि, अभी अपना करियर शुरू नहीं किया है और इतना अहंकार। मैंने कहा, मैं ऐसा ही हूं।’ ये किस्सा 1972 का है जब फिल्म ‘पिया का घर’ के लिए अमोल पालेकर को बतौर हीरो बासु चटर्जी ने चुना था पर बाद में इस फिल्म में अमोल पालेकर की जगह अनिल धवन ने ली। वजह अमोल पालेकर का एटीट्यूड बना।

सुपरमैन नहीं, आम आदमी 

एक तरफ जब राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जितेंद्र लार्जर दैन लाइफ वाली छवि लिए पर पर्दे पर धूम मचा रहे थे। उसी गुजरे दौर में एक हीरो ऐसा भी था जिसकी गिनती एक सुपरस्टार के तौर पर थी।ये हीरो सुपरमैन नहीं, बल्कि आम आदमी था, जो ऑफिस जाता है, ट्रेन और बस में चलता है। आम बोल चाल की भाषा बोलता था। उनकी एक्टिंग में एक नई ताजगी, सादापन और वास्तविकता थी।

निजी जीवन बेहद सादा 

आज कहानी फिल्मी परदे पर साधारण से दिखने वाले असाधारण कलाकार अमोल पालेकर की। जो अक्सर कहते कि, मैं प्रशिक्षण पाकर पेंटर बना, दुर्घटना वस एक्टर, मजबूरी में प्रोड्यूसर और अपनी पसंद से फिल्म डायरेक्टर बना। ये निजी जीवन में भी आम आदमी जैसे ही जीवन जीते है।

माता-पिता के एकलौटे बेटे, तीन बहनों के भाई

पोस्ट ऑफिस में काम करने वाले कमलाकर पालेकर जो एक मराठी भाषी मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते। अपनी पत्नी सुहासिनी पालेकर जो एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थीं उनके साथ मुंबई में रहते। इनके चार बच्चे थे। तीन बेटियां - नीलम, रेखा, उन्नति और एक बेटा थे – 24 नवंबर साल 1944 के जन्मे अमोल पालेकर।

सीधे-सादे और आज्ञाकारी

बचपन में बहुत सीधे-सादे और आज्ञाकारी, स्कूल में टॉपर अमोल पालेकर जब नौवीं कक्षा में पहुंचे तब उनके माता-पिता ने उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेज दिया।अमोल पालेकर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘उस वक्त लोगों में ऐसी धारणा थी कि बोर्डिंग स्कूल में उन्हीं बच्चों को भेजा जाता था, जो शरारती होते, गुंडागर्दी करते, पढ़ते नहीं, फेल हो जाते। लेकिन, मेरे माता पिता की दलील थोड़ी अलग थी।

मन लगा पेंटिंग में

वो कहते थे कि मैं पढ़ाई के साथ-साथ थोड़ा खेलकूद भी करूं, बदमाशी भी सीखूं। वो मानते थे कि ये चीजें भी जिंदगी में जरूरी हैं। बोर्डिंग स्कूल जाने के बाद मेरी जिंदगी में नया मोड़ आया। यहां मैंने बदमाशी नहीं सीखी। यहां मेरा मन किताबें पढ़ने और पेंटिंग की तरफ लगा।’

'बैंक ऑफ इंडिया' में की नौकरी 

बोर्डिंग से निकले तो मुंबई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से फाइन आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया। और बतौर पेंटर करियर को आगे बढ़ाया। इनकी इतनी अच्छी पेंटिंग्स होती एग्जीबिशन लगाई जातीं। शौक तो ठीक था पर कुछ बनने के लिए काम करना था, इसलिए बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी करने लगे।

चित्रा ने जिंदगी में भरे रंग

उम्र के 23-24 साल गुजर गए। फिर इनके जीवन में एक गर्लप्रेंड आईं। संयोग देखिए उन्हें चित्र बनना पसंद था और जो इनकी गर्लफ्रेंड बनीं उनका नाम चित्रा था। चित्रा की वजह से अमोल पालेकर की जिंदगी में एक्टिंग का नया रंग भरा। दरअसल चित्रा थिएटर करती थीं। जब वो रिहर्सल करने जाती थीं तो अमोल पालेकर भी थियेटर उनके साथ जाते।

जब एक्टिंग की ट्रेनिंग ली

एक दिन महान थियेटर आर्टिस्ट और डायरेक्टर सत्‍यदेव दुबे की नजर अमोल पालेकर पर गई तो उन्हें अपने एक मराठी नाटक ‘शांताता! कोर्ट चालू आहे’ के एक रोल के लिए चेहरा मिला। नाटक में हिस्सा लिया तो अमोल पालेकर की एक्टिंग की तारीफ हुई तो सत्‍यदेव दुबे ने कहा – ‘अब तुम थियेटर की दुनिया में आ ही गए हो तो एक्टिंग की ट्रेनिंग भी कर लो।’

ऐसे से जुड़ा अदाकारी से नाता 

साल 1971 में मराठी नाटक ‘शांताता! कोर्ट चालू आहे’ पर ही बेस्ड डायरेक्टर सत्यदेव दुबे ने मराठी फिल्म भी बनाई जिसमें अमोल पालेकर को रोल मिला। इस तरह से अमोल पालेकर का अदाकारी की दुनिया से नाता जुड़ा। लेकिन अगली फिल्म में काम मिले इसके लिए वक्त लग। इन सालों में अमोल पालेकर थियेटर का जाना माना नाम बन गए।

'अनिकेत' की शुरुआत

दरअसल, साल 1972 में उन्होंने थियेटर ग्रुप की शुरुआत की, नाम रखा -  अनिकेत। कई सारे नाटकों में एक्टिंग की, कई नाटकों को डायरेक्ट किया।

फिल्म ‘रजनीगंधा’ से डेब्यू

अमोल पालेकर की फिल्म न करने की एक और भी वजह रही। 1972 में बासु चटर्जी ने फिल्म पिया का घर का ऑफर दिया। पर अमोल पालेकर का एटीट्यूड आड़े आ गया। लेकिन एक अच्छा कलाकार दूसरे अच्छे कलाकार की कद्र करता ही है। वो बासु चटर्जी ही थे जिन्होंने अमोल पालेकर को साल 1974 की फिल्म ‘रजनीगंधा’ में बतौर लीड रोल दिया। ये फिल्म सुपर-डुपर हिट हुई। और अमोल पालेकर का बॉलीवुड का करियर चल निकला।

ये किरदार आज भी दिलों में बसे

'रजनीगंधा' के 'संजय', 'छोटी सी बात' के 'अकाउंटेंट अरुण', 'बातों बातों में' के 'टोनी', 'चितचोर' के 'विनोद', 'घरौंदा' के 'सुदीप', 'मेरी बीवी की शादी' के 'भगवंत कुमार भारतेंदु', 'रंग-बिरंगी' के 'अजय शर्मा', 'गोलमाल' और फिल्म 'नरम-गरम' के 'राम प्रसाद' ये ऐसे किरदार हैं जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं।

मध्यमवर्गीय परिवार की कहानियां

आर्ट और क्रिएटिव सिनेमा बनाने वाले डायरेक्टर हृषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी की पहली पसंद एक्टर अमोल पालेकर की फिल्मों की कहानियां मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ी होती थी।

साल 2005 में 'पहेली' डायरेक्ट की

साल 2005 की शाहरुख खान और रानी मुखर्जी की फिल्म पहेली अमोल पालेकर ही डायरेक्ट की थी। इस फिल्म की एंट्री ऑस्कर में हुई थी। तड़क-भड़क से दूर रहने वाले अमोल पालेकर बेहद सादा जीवन जीते हैं।

30 साल बाद टूटा पत्नी से रिश्ता 

अमोल ने दो शादियां कीं। साल 1969 में पहली शादी अपनी गर्लफ्रेंड चित्रा पालेकर से की। इनसे एक बेटी श्यामली पालेकर हुईं। अमोल पालेकर और चित्रा पालेकर का रिश्ता शादी के 30 साल बाद टूट गया। अमोल पालेकर ने दूसरी शादी साल 2001 में संध्या गोखले की। संध्या से इनकी दूसरी बेटी शाल्मली पालेकर हुई।

पांच बार 'नेशनल' और एक बार 'फिल्मफेयर'

पांच बार नेशनल और एक बार फिल्म फेयर का अवार्ड जीतने वाले एक्टर अमोल पालेकर अपने बेबाक अंदाज के लिए गाहे बगाहे सुर्खियों में आ ही जाते हैं।आज ये 79 साल की उम्र में भी फिल्मों में एक्टिव हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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