Actor Gufi Paintal : जब सेना में ‘सीता’ बनकर करते थे मंनोरजन

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पहले इंजीनियरिंग की। मन नहीं लगा तो सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने लगे। कुछ और करने की ख्वाहिश जागी तो फिल्मों की तरफ रुख किया। तमाम सारी फिल्मों और टीवी शो में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर, कास्टिंग डायरेक्टर, स्टोरी राइटर काम किया। फिर एक रोल किया जिससे उनकी खूब पहचान बनी। लेकिन उससे ज्यादा उन्हें नफरत का सामना भी करना पड़ा। आज कहानी सरबजीत पेंटल उर्फ गूफी पेंटल की।

पंजाब के रहने वाले गुरु चरण पेंटल और तारा पेंटल के घर 4 अक्टूबर, साल 1944 को सरबजीत का जन्म हुआ। जिन्हें हम गूफी पेंटल के नाम से जानते हैं। सिख फैमिली से ताल्लुक रखने वाले गुरु चरण कैमरामैन थे लेकिन गूफी को इंजीनियरिंग करने के लिए मुंबई भेजा। जहां वो हॉस्टल में रहते।

गुफी ने एक इंटरव्यू में बताया कि ‘हॉस्टल में मेरे साथ कश्मीर के एक्स प्राइम मिनिस्टर बक्शी गुलाम मोहम्मद के पोते नजीर बक्क्षी रूममेट हुआ करते थे। रतन टाटा भी साथ में रहते। उनसे मैं अपनी बातें भी शेयर करता था।’

गूफी पेंटल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन उनका मन इसमें बिल्कुल नहीं था। कुछ नया करने की ख्वाहिश रहती। ऐसे में 62 का युद्ध छिड़ गया और गूफी सेना में शामिल हो गए।

गूफी ने एक इंटरव्यू ने बताया था कि ‘साल 1962, भारत और चीन के बीच जंग हो रही थी। तब मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। जंग के दौरान आर्मी की भर्तियां आई। मैंने भी आवेदन कर दिया। मेरी पहली पोस्टिंग चीन बॉर्डर पर आर्मी आर्टिलरी में हुई।’

गूफी को आर्मी में नौकरी करने के दौरान एक्टिंग का शौक जागा। वे अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि

‘हमारे पास मनोरंजन के लिए टीवी और रेडियो नहीं होता था। इसलिए हम सभी जवान मिलकर बॉर्डर पर रामलीला करते थे। रामलीला में मैं सीता का रोल करता था और रावण बना साथी स्कूटर पर आकर मेरा अपहरण करता था।’

इसके बाद फिल्मों में काम करने की चाहत रखने लगे। दरअसल, जब गूफी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे तब उनके छोटे भाई कवरजीत पेंटर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट पुणे में पढ़ रहे थे। और यहां से निकलने के बाद उन्होंने साल 1970 में बॉलीवुड में कदम रखा और एक एक्टर और कॉमेडियन बने। गूफी ने भी भाई से बॉलीवुड में काम करने की इच्छा जाहिर की और आर्मी की नौकरी छोड़कर वो भी साल 1971 के आसपास मुंबई आ गए। मॉडलिंग की। एक्टिंग सीखी। कई फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया। और साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म रफू चक्कर से कैरेक्टर आर्टिस्ट से एक्टिंग की शुरुआत की। लेकिन सबसे ज्यादा पहचान एक टीवी शो मिली। उसका नाम था महाभारत। जिसमें पहले वो बतौर कास्टिंग डायरेक्टर काम करे थे। लेकिन बाद में महाभारत में शकुनि का किरदार निभा कर खुद की पहचान बनाई।

दरअसल गूफी बीआर चोपड़ा फिल्म में काम करते थे।

गूफी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘मैं महाभारत में शकुनि के कैरेक्टर के लिए परफेक्ट फेस की तलाश में था। इसके लिए मैंने तीन लोगों को चुना। इस बीच शो की स्क्रिप्ट लिख रहे मासूम रजा की नजर मुझ पर पड़ी। और उन्होंने मुझे ही शकुनि का रोल करने की सलाह दी। इस तरह मैं महाभारत का मामा शकुनि बन गया।’

शकुनि का किरदार निभाकर गूफी भले ही घर-घर में छा गए थे, लेकिन इस किरदार की वजह से उन्हें तमाम नफरत का भी सामना करना पड़ा।

गूफी ने एक बार कहा था कि ‘शकुनि का किरदार करने के दौरान लोग असल जिंदगी में मुझसे नफरत करने लगे थे। नफरत भरी चिट्ठियां भेजते। एक शख्स ने तो कहा था, बुरे काम करना छोड़ दो, नहीं तो टांगे तोड़ दी जाएंगी।’

गूफी आखिरी बार स्टार भारत के शो 'जय कन्हैया लाल की' में नजर आए थे।

गूफी पेंटल की पत्नी का नाम रेखा पेंटल था। उनकी 1993 में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। गूफी पेंटल के बेटे का नाम हैरी पेंटल है। वो भी एक एक्टर हैं।

तमाम सारी फिल्मों और टीवी शो में यादगार भूमिकाएं निभा कर गूफी ने लोगों की दिलों में जगह बनाने वाले आखिरी दिलों में दिल और किडनी संबंधी बीमारी थी। तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल में भर्ती कराया गया। 5 जून साल 2023 को उनका निधन हो गया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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