Actor Kamal Kapoor : एक विलेन जो कभी हीरो था

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एक्टर कमल किशोर कपूर (Actor Kamal Kapoor) 60 के ऐसे खलनायक थे जिनकी बिल्लौरी आंखें हमेशा ही दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींचती थीं। शायद बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि ये कभी फिल्मों में हीरो बनते थे।

जब गुजारे के लिए गाड़ी तक बेच दी

ये 60 का दशक था, तब हिंदी सिनेमा का परिचय एक ऐसे खलनायक से हुआ जिनकी बिल्लौरी आंखें हमेशा ही दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींचती थीं। एक्टिंग इतनी दमदार कि लोग इन्हें सच में बुरा आदमी मानने लगे। पर्दे पर इन्हें देखकर लोग दहल जाते थे। लेकिन, शायद बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि ये कभी फिल्मों में हीरो बनते थे। पर दसियों फिल्मों में काम करने के बाद भी किस्मत इन्हें हीरो बनने नहीं देनी चाहती थी। ये सड़क पर आ गए। गुजारे के लिए गाड़ी तक बेच दी। सालों काम नहीं मिला तो जिंदगी गुजारने के लिए मजबूरी में विलेन बने। आज कहानी एक्टर कमल किशोर कपूर की। ये भी बताएंगे कि ये कैसे एक्टर रणबीर कपूर के परदादा और एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे के नाना लगते हैं।

किस्मत ले गई मुंबई

22 फरवरी, साल 1920 पाकिस्तान के पेशावर में कमल कपूर का जन्म हुआ। लाहौर से पढ़ाई पूरी की फिर सवाल आया कि जिंदगी में आखिर क्या करना है? पहले तय किया मध्य प्रदेश चले जाए, जहां पर इसके बड़े भाई बिट्रिश पुलिस में अफसर थे। लेकिन किस्मत उन्हें मुंबई ले गई। वो वहां पृथ्वीराज कपूर से मिले।कमल कपूर और पृथ्वीराज कपूर दोनों रिश्ते में भाई लगते थे। दरअसल पृथ्वीराज कपूर की मां और कमल कपूर की मां सगी बहनें थीं।

अंग्रेजों जैसी थी कमल कपूर की पर्सनैलिटी

साल था 1943 जब कमल कपूर मुंबई पहुंचे। उस वक्त पृथ्वीराज कपूर 'पृथ्वी थिएटरचलाते थे। कमल कपूर की पर्सनैलिटी अंग्रेजों जैसी। रंग गोराकद लंबाआंखे भूरी। इसी वजह से पृथ्वी राज कपूर ने कमल कपूर को साल 1944 में अपने नाटक दीवार में एक अंग्रेज का रोल दिया। और यहीं से उनकी एक्टिंग करियर का सफर शुरू हुआ। फिर दो साल गुजरे और साल 1946 की फिल्म 'दूर चलेसे फिल्मी दुनिया में भी कदम दिया।

बतौर हीरो 20 फिल्में फ्लॉप हो गईं

साल 1948 की फिल्म 'आगमें उन्होंने राज कपूर के पिता के रोल में किया। इस किरदार को खूब पसंद किया गया। पर कमल कपूर निराश थे। वजह थी कि कैरेक्टर रोल में उन्हें पसंद किया जा रहा था पर वो हीरो बनना चाहते थे, वो हीरो बने भी।साल 1947 की 'हातिमताई' और 'डाक बंगला', साल 1948 की 'परदेसी मेहमान', साल 1952 की 'इंसान ' और 'जग्गू', साल 1954 की 'अमीर' जैसी कुल 21 फिल्मों में बतौर हीरो काम किया। लेकिन 'जग्गू' को छोड़कर बाकी 20 फिल्में पिट गईं। वो साइड रोल के लिए तैयार नहीं थे। ये वो वक्त था जब उनका करियर डगमगाने लगा।

खुद हीरो बनने का किया फैसला

वरिष्ठ फिल्म हिस्टोरीयन शिशिर कृष्ण शर्मा के लेख के मुताबिक 'कमल कपूर को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। जब फिल्में एक-एक कर फ्लॉप होने लगीं तो उन्होंने तय किया कि खुद ही फिल्में बनाएंगे और हीरो बनेंगे।'

घर में खाली बैठे तो विलेन बने 

साल 1951 में 'कश्मीर' और 1954 में 'खैबर' ये दो फिल्में बनाई पर ये फिल्में भी इतनी बुरी तरह पिटी कि उनके आर्थिक हालात और ज्यादा खराब हो गए। वो सड़क पर आ गए। रोटी के लाले पड़े तो कार बेचने पड़ी। कमल कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि 'मैं करीब नौ सालों तक घर पर खाली बैठा रहा। जब कुछ नहीं सूझा तब विलेन बनने का फैसला किया। सोचा कि शायद कुछ बात बन जाए।'

अपनी भूरी आंखों से ही डायलॉग कहने का हुनर रखते

साल 1965 बतौर विलेन वो पहली बार फिल्म 'जौहर महमूद इन गोवामें नजर आए। ये उनका आखिरी मौका था। इस बार उनसे कोई गलती नहीं हुई। इस फिल्म के बाद उनके दिन फिर गए। कामल कपूर की एक्टिंग की खास बात थी कि वो अपनी बातों और डायलॉग को अपनी भूरी आंखों से कहने का हुनर रखते थे। साल दर साल कमल कपूर के पास ढेरों फिल्मों के ऑफर आए। उन्होंने हर तरह के छोटे-बड़े किरदार किए और अपनी अलग पहचान बना ली।

एक रोल ने कर दिया अमर

लेकिन अभी उन्होंने वो रोल नहीं मिला था जिस वजह से उन्हें आजतक याद किया जाता है। साल था 1975 और फिल्म थी अमिताभ बच्चन की डॉन। फिल्म डॉन में कमल कपूर ने विलेन नारंग का रोल किया। साल 1985 की फिल्म 'मर्दमें भी वो जनरल डायर के दमदार किरदार में दिखे। कमल कपूर के एक और छोटे भाई थे रविंदर कपूर - जिन्होंने बतौर एक्टर कुछ फिल्मों में काम किया।

सोनाली के नाना और रणबीर के परदादा

साल 1945 में कमल कपूर ने सुमन देवी से शादी की। पांच बच्चे हुए। 03 बेटे और 02 बेटियां। बेटे कपिल कपूर ने कुछ फिल्में डायरेक्ट और प्रोड्यूस की। कमल कपूर की एक बेटी मधु की शादी फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रमेश बहल से हुई। रमेश बहल के बेटे फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर गोल्डी बहल ने एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे से शादी की। इस रिश्ते से कमल कपूर सोनाली बेंद्रे के नाना लगे। वहीं पृथ्वीराज कपूर के बेटे राज कपूर, राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर और ऋषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर के पृथ्वीराज कपूर परदादा लगे। पृथ्वीराज कपूर के भाई होने के नाते एक्टर कमल कपूर भी रणबीर कपूर के परदादा लगे।

हिंदी सिनेमा को दिए जिंदगी के 50 साल

जिंदगी के करीब 50 साल हिंदी सिनेमा को देने वाले एक्टर कमल कपूर ने 100 से ज्यादा से फिल्में की। साल 1993 की फिल्म 'जख्मी रूहमें वो आखिरी बार नजर आए। इसके बाद फिल्मों को अलविदा कह दिया। 02 अगस्त साल 2010 90 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को भी छोड़ दिया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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