Actor Nawazuddin Siddiqui : शक्ल-सूरत सामान्य, अदाकारी लाजवाब

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शक्ल-सूरत किसी भी आम भारतीय जैसी है, लेकिन अदाकारी का हुनर लाजवाब है। इनकी जिंदगी पर नजर डाली जाए तो ये काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। साइंस में ग्रैजुएशन किया। एक फैक्ट्री में नौकरी इसलिए छोड़ दी क्योंकि उसमें खतरा था। वाचमैन बने। कई रातें भूखी गुजारी। बॉलीवुड में कदम रखा। और 13 साल संघर्ष करने के बाद एक रोल मिला फैजल का। जिसके बाद उनकी दुनिया ही बदल गई। और बॉलीवुड को भी नवाजुद्दीन के रूप में एक शानदार एक्टर मिल चुका था। आज कहानी नवाजुद्दीन सिद्दीकी की। जिनकी जिंदगी में एक वो भी दौर आया जब इनको लगने लगा खुद को कहीं मार न लूं।

19 मई, साल 1974 को यूपी के एक छोटे से कस्बे बुढ़ाना में नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म हुआ। एक न्यूज पेपर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि हम सात भाई और दो बहनें हैं। पिता किसान थे। घर में फिल्म का नाम लेना भी अच्छा नहीं समझा जाता था। बल्कि यूं कहें कि, जिंदगी की लड़ाई इतनी बड़ी रही कि, सिनेमा के बारे में सोचने की किसी को फुरसत नहीं थी। हां, जैसी हर मां-बाप की आरजू होती है। पिता चाहते थे कि, मैं अच्छी तरह पढ़-लिख जाऊं। पिता जी ये तो नहीं समझाते थे कि, कौन-सी पढ़ाई करनी ठीक होगी। लेकिन, हुनरमंद होने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते थे।’

नवाज ने हरिद्वार की गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन किया। जॉब के लिए दो साल भटकने के बाद बड़ौदा की एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में नौकरी मिली। वहीं पर तमाम तरह के केमिकल की टेस्टिंग करनी पड़ती थी। वो नौकरी इनको खतरनाक लगी तो डेढ़ साल बाद काम छोड़ दिया। दिल्ली आ गए नई नौकरी की तलाश में। यहां वो वक्त आया जब उनको लगा कि यही वो काम है जिसे मैं करना चाहता हूं।

एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि दिल्ली में नौकरी की तलाश कर रहा था कि, एक दिन किसी दोस्त के साथ नाटक देखने चला गया। प्ले देखकर दिल खुश हो गया। धीरे-धीरे रंगमंच का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा। खुद से कहा- यार! यही वो चीज है, जो मैं करना चाहता हूं। कुछ वक्त बीता और एक थिएटर ग्रुप ज्वाइन कर लिया। लेकिन पैसे नहीं मिलते थे। रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। शाम की रोटी का इंतजाम हो सके, इसके लिए वॉचमैन की नौकरी करने लगा।’

बॉलीवुड में नवाज ने करियर की शुरुआत साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म 'सरफरोश' से की। लेकिन रोल इनता छोटा सा था कि किसी ने इनको नोटिस तक नहीं किया। इसके बाद 13 साल लंबे संघर्ष का दौर शुरू हुआ। इस दौरान नवाज ने तमाम छोटी-बड़ी फिल्मों में काम किया। कभी भीड़ में खड़े आम आदमी बने, कभी पॉकेट मार, कभी वेटर, कभी चोर का रोल किया, किसी एक फिल्म में वो आतंकवादी बने। इन किरदारों ने लोगों के दिलों में कोई खास जगह नहीं बनाई।

फिर साल 2012 में डायरेक्टर अनुराग कश्यप उन्हें फैजल बनाकर 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में लाए और फैजल के रोल में वो ऐसा छाए की नवाज के हर तरफ चर्चे होने लगे। घर-घर में उनकी बात हो रही थी। उनका बॉलीवुड में सफर चल निकला था। आज वो दौर है। जब नवाज इंडस्ट्री के टॉप एक्टर्स में शुमार हो चुके हैं, लोग ये सोचकर हैरान होते हैं कि आखिर नवाज अपने हर रोल में कैसे ढल जाते हैं।

ऐसे ही एक फिल्म में किए गए अपने रोल में वो ऐसा ढल गए कि, एक बार वो खुद को भी मारने के लिए सोचने लगे। ये तब की बात है, जब नवाजुद्दीन सिद्दीकी साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म 'रमन राघव' की तैयारी कर रहे थे। ये एक सीरियल किलर की कहानी थी।

एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि 'फिल्म 'रमन राघव' का रोल पागल कर देने वाला था। जब मैं इस रोल की तैयारी कर रहा था, तो खुद पर कंट्रोल नहीं रख पा रहा था। फिल्म की शूटिंग से एक हफ्ते पहले एक छोटी सी जगह में अकेले रहने लगा था। हालत ऐसी हो गई कि, आइने में खुद को देखकर डर जाता था। मन में हमेशा खौफ रहता था कि, कहीं खुद को मार न लूं। बुरी तरह सहम जाता था।’

लेकिन ऐसा हुआ नहीं उन्होंने कहा - खुद से नहीं डरना है। वो खुद की जान नहीं लेंगे। बाद में उन्होंने फिल्म 'रमन राघव' की शूटिंग की।

एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की निजी जिंदगी में भी काफी उथल-पुथल रही है। उनकी पहली शादी उनकी मां की पसंद से उत्तराखंड के हल्द्वानी की रहने वाली शीबा के साथ हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स की मुताबिक, नवाजुद्दीन को शीबा तो पसंद थी। लेकिन, उसका भाई इनके रिश्ते में दखलअंदाजी करता था। लिहाजा दोनों ने अलग होने का फैसला ले लिया।

साल 2009 में नवाजुद्दीन ने दूसरी शादी अंजलि पांडे से की। अंजलि शादी के बाद आलिया बन गईं। आलिया को नवाजुद्दीन अपनी पहली शादी से पहले से ही जानते थे। लेकिन कुछ वक्त बाद दोनों का रिश्ता भी तलाक की कगार तक पहुंच गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आलिया ने नवाजुद्दीन के परिवार पर मारपीट का आरोप भी लगाया। दोनों के दो बच्चे शोरा और यानी भी हैं।

नवाजुद्दीन कुछ वक्त सुकून पाने के लिए अपने गांव जाते हैं। एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि मैं अपने गांव चला जाता हूं और वहां जाकर अपने खेतों की देखभाल करता हूं। कुछ दिन वहां खेती करते हुए बिताता हूं। ऐसा करने से मन को सुकून मिलता है। इसके बाद मैं नए किरदार की तैयारी में जुट जाता हूं।’ आने वाला वक्त भी नवाज का ही। वो कई प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं। वो अपनी दमदार एक्टिंग से लोगों का  जबरदस्त मनोरंजन करते रहेंगे।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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