Actor Rajendra Nath : जब पाई-पाई को मोहताज हुए 'पोपटलाल'

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अपने दौर के बेहतरीन कॉमेडियन राजेंद्र नाथ (Actor Rajendra Nath) ने चार दशक के सफर में करीब 175 से ज्यादा फिल्में की। इन्होंने सबको हंसाया, पर उन्हें खुद रोना पड़ा। क्योकि ये जिंदगी के आखिरी दिनों में एक-एक पैसे के लिए मोहताज हुए। और इसकी वजह कर्ज बना।

 

 

उलजुलूल हरकतों से दिल बहलाता 'पोपटलाल'

साल 1961 की फिल्म 'जब प्यार किसी से होता है' में एक किरदार था - पोपटलाल। जो ढीली हाफ पैंट, रंगबिरंगी शर्ट, सर पर टोपी और आंखों में मोटे का चश्मा पहनता। अपनी उलजुलूल हरकतों से लोगों का दिल बहलाता। पोपटलाल के किरदार को ऐसी सफलता मिली की अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कई देशों में पोपटलाल के स्टेज शोज होते। पोपटलाल को इतना प्यार मिला की लोग इनका असली नाम - राजेंद्र नाथ मल्होत्रा - भूल गए। आज कहानी अपने दौर के बेहतरीन कॉमेडियन राजेंद्र नाथ की जिन्होंने चार दशक के सफर में करीब 175 से ज्यादा फिल्में की। इन्होंने सबको हंसाया, पर उन्हें खुद रोना पड़ा। क्योकि ये जिंदगी के आखिरी दिनों में एक-एक पैसे के लिए मोहताज हुए। और इसकी वजह कर्ज बना।

राज कपूर से हुई बहन कृष्णा की शादी

ये 40 का दशक था। पृथ्वीराज कपूर अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए शहर-शहर घूमते। ऐसे ही एक दिन वो मध्य प्रदेश की रीवा पहुंचे। जहां उनकी मुलाकात हुई करतार नाथ मल्होत्रा। करतार नाथ बिट्रिश पुलिस में बड़े अफसर थे। दोनों में दोस्ती हुई। दोस्ती की वजह एक और भी थी। दोनों ही पेशावर के रहने वाले थे। उसके बाद जब भी पृथ्वीराज कपूर रीवा आते करतार नाथ के घर जरूर जाते। एक दिन पृथ्वीराज कपूर ने करतार नाथ मल्होत्रा की बेटी कृष्णा मल्होत्रा को देखा। देर किए बगैर ही उन्होंने करतार नाथ से उनकी बेटी कृष्णा मल्होत्रा का हाथ अपने बेटे राज कपूर के लिए मांग लिया, और ऐसे साल 1946 में राज कपूर और कृष्णा मल्होत्रा की शादी हुई। 

सालों चलता रहा संघर्ष का दौर

इस शादी के बाद कृष्णा मल्होत्रा के भाइयों ने भी फिल्मों में करियर बनाने के लिए कदम बढ़ाए। सबसे पहले भाई प्रेम नाथ मुंबई पहुंचे। उन्हें पृथ्वी थियेटर में काम मिला। जब उन्होंने फिल्मों में पैर जमा लिए तो फिर 08 जून, 1931 को जन्मे अपने छोटे भाई राजेंद्र नाथ को अपने पास बुलाया। राजेंद्र नाथ भी पृथ्वी थियेटर से जुड़े, पहले तो वो एक्टिंग को लेकर गंभीर नहीं थे। एक दिन भाई प्रेम नाथ ने कहा 'या तो गंभीर हो जाओ या मुंबई छोड़ दो।' ये बात राजेंद्र नाथ के दिल में लगी। वो निकल पड़े काम खोजने। फिर शुरू हुआ संघर्ष का दौर। कुछ फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिले तो हौसला बढ़ा। 

हीरो बनने का सपना टूटा

भाई प्रेम नाथ को भी खुशी हुई। वो चाहते थे की भाई हीरो बने। उन्होंने साल 1954 में फिल्म 'गोलकुंडा का कैदी' बनाई जिसमें राजेंद्र नाथ को साइड हीरो का रोल दिया। पर फिल्म फ्लॉप हो गई। और राजेंद्र नाथ का हीरो बनने का सपना अधूरा रह गया। पांच साल का वक्त और गुजरा। फिर साल 1959 की 'दिल देके देखो', साल 1961 की 'जब प्यार किसी से होता है' जैसी फिल्में करने के बाद तो फिल्म इंडस्ट्री में राजेंद्र नाथ का सिक्का जम गया। 

बॉलीवुड का बदला अंदाज

अब प्रेम नाथ और राजेंद्र नाथ ने अपने तीसरे भाई नरेंद्र नाथ को भी मुंबई बुला लिया और वो भी फिल्मों में काम करने लगे। साल 1969 में राजेंद्र नाथ की एक और बहन उमा मल्होत्रा ने एक्टर प्रेम चोपड़ा से शादी कर ली थी। इसी साल राजेंद्र नाथ ने भी शादी कर ली गुलशन कृपलानी से। दोनों के एक बेटा और एक बेटी हुई। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ ने रफ्तार पकड़ी ही थी जिंदगी पूरी तरह से घूम गई। दरअसल, एक कार दुर्घटना में राजेंद्र नाथ बुरी तरह घायल हो गए। कुछ साल वो बिस्तर पर रहे। जब तक दोबारा लौटे तब तक बॉलीवुड का अंदाज बदल गया था अब फिल्मों में कॉमेडियन के रोल कम होने लगे थे। राजेंद्र नाथ अक्सर कहते कि  'जब से कॉमेडियन की जगह हीरो को दे दी गई हास्य अभिनेताओं के पास काम ही नहीं बचा।'

फिल्म बनाई तो कर्जे में आए

इसके बाद उनकी उनकी जिंदगी का ग्राफ और नीचे आया। कारण बना एक गलत फैसला। फिल्म प्रोडक्शन का। साल 1974 - रणधीर कपूर और नीतू सिंह को लेकर एक फिल्म शुरू की। राजेंद्र नाथ एक एक्टर तो बेहतरीन थे पर उन्हें फिल्म प्रोडक्शन की बारीकियां नहीं पता थीं। ऐसे में वो भारी कर्जे में आ गए। पंजाबी और साउथ की फिल्मों काम किया। जी तोड़ मेहनत करके जैसे तैसे कर्ज निपटाया।

आखिरी किरदार भी पोपटलाल

ये वो वक्त था दोनों भाई – प्रेम नाथ और नरेंद्र नाथ का भी निधन हो गया। फिल्मों में पुराने दोस्तों का भी साथ छूटा तो फिल्मों में काम करना बंद कर दिया। 90 के दशक में 'बेख़ुदी' और 'सौदा' जैसी फिल्में इनकी आखिरी फिल्में थीं। संयोग देखिये की जिंदगी के आखिरी वक्त टीवी सीरियल 'हम पांच' में काम किया। जिसमें वो पोपट लाल ही बने। वो अब ज्यादातर मुंबई में अपने घर पर ही रहते। सांस लेने में तकलीफ रहती। एक दिन दिल ने धोखा दे दिया। 13 फरवरी साल 2008, 76 साल की उम्र में राजेंद्र नाथ मल्होत्रा दुनिया से चले गए। दुनिया भर को अपने अंदाज से हंसाने वाले राजेंद्र नाथ भले ही गुमनामी में चले गए हों लेकिन उनके किरदार हमेशा याद रहेंगे।

 

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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