Actress Divya Bharti का ऐसा बीता था आखिरी दिन

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सुबह हैदराबाद से मुंबई लौटीं एक 19 साल की लड़की बेहद खुश थी, क्योंकि उस दिन उसने एक फ्लैट की डील साइन की थी। इस सब चीजों में दिन कब गुजर गया वक्त का पता ही नहीं चला। काम निपटाकर शाम को वर्सोवा में बने अपने फ्लैट पहुंचीं और लिविंग एरिया में दोस्त और पति के साथ शराब पी। नशे में इनता धुत हो गईं की वो कब उस खिड़की की तरफ चली गईं, जहां ग्रिल नहीं लगी थी। खिड़की पर बैठते वक्त बैलेंस बिगड़ा और पांचवीं मंजिल से नीचे गिरकर उस लड़की मौत हो गई।’

ये ऑफिशियल स्टेटमेंट साल 1998 में दिया गया जब 05 साल से चल रहे हत्या, आत्महत्या या हादसे में उलझे केस की फाइल को बंद कर दिया गया। ये 19 साल की लड़की कोई और नहीं सिर्फ तीन साल के करियर में 21 फिल्मों में काम कर अपनी खूबसूरती और बेहतरीन एक्टिंग से लोगों का दिल जीतने वाली दिव्या भारती थीं। बेहद कम वक्त में टॉप सक्सेसफुल एक्ट्रेसेस में शामिल होने वाली दिव्या भारती की इस तरह से मौत होने से हर कोई हैरान था।

साल 1992 में डायरेक्टर राजीव राय की फिल्म ‘विश्वात्मा’ में रिलीज हुई। दिव्या भारती की ये बॉलीवुड में पहली फिल्म थी। फिल्म तो फ्लॉप हो गई लेकिन इस फिल्म का गाना ‘सात समंदर पार में तेरे पीछे-पीछे आ गई...’ दिव्या भारती पर फिल्माया गया ये गाना आज भी सुपरहिट है।

इस गाने के बाद दिव्या भारती रातों रात स्टार बन गई। दिव्या भारती 25 फरवरी 1974 को मुंबई में ऐसे परिवार में जन्मी थी जिनका बॉलीवुड से कोई नाता नहीं था। उनको कम ही उम्र से फिल्मों के ऑफर मिलने लगे थे, लेकिन किसी न किसी वजह से बात नहीं बनती। कभी पिता मना कर देते थे तो कभी आखिरी वक्त में कोई और हीरोइन को कास्ट कर लिया जाता था। ऐसे में दिव्या ने साउथ की फिल्मों से एक्टिंग डेब्यू किया। 16 साल की उम्र में साल 1990 में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘नीला पिनय’ से एक्टिंग के सफर की शुरुआत की।

बॉलीवुड में दिव्या की एंट्री क्या हुई, धमाल ही मचा दिया। उस दौर की हर हीरोइन को लगभग साइडलाइन हो गई।

जब ‘विश्वात्मा’ रिलीज हुई थी। उसी साल उनकी गोविंदा के साथ 'शोला और शबनम' रिलीज हुई। फिल्म हुई हिट। इसी के अगले महीने शाहरुख, दिव्या और ऋषि कपूर की 'दीवाना' रिलीज हुई। शाहरुख खान की ये डेब्यू फिल्म थी और दिव्या भारती की एक ही साल में तीसरी हिट फिल्म। इस फिल्म के बाद किसी को भी कोई शक नहीं था कि वो अगली बड़ी स्टार होंगी।

लेकिन ये सितारा जितनी तेजी से चमका, उतनी तेजी से अस्त भी हो गया।

'शोला और शबनम' फिल्म की शूटिंग के दौरान ही दिव्या भारती की फिल्म प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला से मुलाकात हुई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं और 10 मई साल 1992 में दोनों ने शादी कर ली। ऐसा कहा जाता कि दिव्या भारती शादी से पहले मुस्लिम धर्म अपनाकर अपना नाम सना नाडियाडवाला रख लिया था। लेकिन शादी के बाद दोनों के रिश्ते बिगड़ने लगे। दिव्या शराब की लत में डूबने लगी।

5 अप्रैल 1993 को दिव्या भारती ने जब इस दुनिया को अलविदा कहा उस वक्त तक दिव्या भारती और साजिद नाडियाडवाला की शादी को महज 11 महीने हुए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिव्या जब फ्लैट से गिरी तब किचन में सिर्फ नौकरानी थी। वहीं फ्लैट पर फैशन डिजाइनर नीता लुल्ला और पति साजिद नाडियाडवाला थे। जो नौकरानी किचन में थी, एक महीने बाद ही उसकी भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

दिव्या की मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिला किया, किसी ने इसे एक्सीडेंट कहा तो किसी ने साजिश। इस केस में पुलिस पांच सालों तक जांच करती रही। साल 1998 में पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दिया।

साल 1993 की पहली रिलीज 'क्षत्रिय' थी। इस फिल्म में दिव्या, रवीना, सनी देओल और और संजय दत्त जैसे एक्टर थे। ये फिल्म मार्च के महीने में रिलीज हुई। अप्रैल में दिव्या की मौत हो गई। 'क्षत्रिय' उनके जीवनकाल में उनकी आखिरी रिलीज थी।

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में रवीना टंडन ने कहा था कि दिव्या भारती जवान थीं, बहुत जज्बाती थीं, और किसी की सुनती नहीं थी। बस शायद वही बात कहीं कोई कारण बन गई।’

दिव्या भारती की मौत के बाद ‘रंग’ और ‘शतरंज’ हिंदी फिल्में और ‘Tholi Muddhu’ तेलुगू फिल्म रिलीज हुई। 08 फिल्में ऐसी थीं, जो बीच में ही अटक गईं। बाद में

इन फिल्मों की शूटिंग दूसरी एक्ट्रेस के साथ पूरी की गईं। इनमें 'मोहरा', 'लाडला', 'अंगरक्षक', 'कर्तव्य', 'विजयपथ', 'हलचल', 'धनवान' और 'आंदोलन' के नाम शामिल है।

इनके अलावा 03 फिल्में ऐसी थीं, जो कभी रिलीज ही न हो सकीं।

दिव्या भारती के एक साल के काम ने उन्हें इतनी ऊंचाई पर पहुंचा दिया की आज भी लोग उन्हें भूल नहीं पाते।

एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस आयशा जुल्का ने बताया, दिव्या भारती हमेशा कहती थीं कि जल्दी करो, जल्दी चलो, जिंदगी छोटी है। उन्होंने साफ साफ नहीं कहा लेकिन शायद इंसान को अंदर से एक 'इंपल्स' होता है। उन्हें हर काम जल्दी करना था। उनको सब कुछ जिंदगी में जल्दी मिल रहा था। वो खुद कहतीं कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा। ऐसा लगता है कि उन्हें पता था कि हमारे बीच ज्यादा नहीं रहना।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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