Actress Jabeen Jalil : 'तकलीफदेह बातों को भूल जाना ही बेहतर'

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दिल्ली में हुआ था जन्म

साल 1801 से 1839 तक राज करने वाले शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह ने सैयद फकीर नूरुद्दीन, सैयद फकीर सईदुद्दीन और सैयद फकीर अजीजुद्दीन को फकीर की उपाधि दी थी। ये तीनों ही भाई दरबार में अहम पदों पर थे। रणजीत सिंह केविदेश मंत्री रहे सबसे छोटे भाई सैयद फ़कीर अजीजुद्दीन की एक पड़पोती थीं दिलारा बेगम। जिनका निकाह हुआ कोलकाता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाले पहले बंगाली मुस्लिम सैयद मौलवी अहमद के बेटे सैयद अबू अहमद जलील से। ब्रिटिश राज में आईसीएस अफसर सैयद अबू अहमद जलील मुंशी फाजिल की डिग्री ले चुकी अपनी पत्नी दिलारा बेगम के साथ दिल्ली में रहते। इन्हीं के घर 01 अप्रैल, साल 1937 को एक बेटी हुईं नाम रखा जबीन जलील।

बेहद खूबसूरत और दमदार एक्टिंग

वो जबीन जलील जिन्होंने अपनी खूबसूरती और बेहतरीन एक्टिंग के दम पर लाखों लोगों को दिवाना बना दिया। 20 साल के करियर में भले ही सिर्फ 23 हिंदी और चार पंजाबी फिल्मों में काम किया हो,लेकिन अपने दौर में माला सिन्हाहो या चांद उस्मानीया फिर एक्ट्रेसवहीदा रहमान इस सभी को जबीन जलील हर मामले में टक्कर देती थी। मुस्लिम होते हुए हिंदू से शादी की, पर धर्म आड़े नहीं आया। शादी के बाद घर संभालने में ऐसी उलझी की फिल्मी करियर पीछे छूटता चला गया। भारत छोड़कर अमेरिका में रहने लगी पर उन्हें बेटे के लिए दोबारा भारत लौटना पड़ा। आज कहानीसाल 1962 की पंजाबी फिल्म 'चौधरी करनैल सिंह' के लिए बेस्ट एक्ट्रेस के नेशनल अवार्ड से सम्मानित जबीन जलील की। उन्होंने एक बार कहा था कि उनके पास ऐसा कुछ नहीं जिसे याद करके वो खुश हो जाए।

फिल्मों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं

साल 1937 में सैयद अबू अहमद जलील काट्रांसफर जापान हो गया तब जबीन जलील सिर्फ दो महीने की थी। पिता उन्हें भी जपान साथ ले गए। चार साल बाद वो जापान से लौटे तो पोस्टिंग मुंबई में मिली। यहां क्वीन मेरीस्कूल और एल्फ़िन्स्टन कॉलेज से जबीन जलील ने पढ़ाई की। फिल्मों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं। बस पिता सैयद अबू अहमद जलील की प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और एक्टर सोहराब मोदी से दोस्ती जरूर थी। लेकिन जब जबीन जलील करीब 12 साल की थी तब साल 1949 में पिता का इंतकाल हो चुका था। ये वो वक्त था जब दो बड़ी बहनें शादी के बाद पाकिस्तान में रहने लगी थी घर में मां दिलारा बेगम और एक छोटा भाई असजद जलील था।

ऐसा मिला फिल्मों में काम करने का ऑफर

एक बार इंटरव्यू में जबीन जलील ने बताया था कि 'कॉलेज में मैं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेती। मैं थियेटर भी करती। एक बार नाटक 'नेक-परवीन' में मेरे रोल को देखने के बाद प्रोड्यूसर-डायरेक्टर एसएम यूसुफ मेरी एक्टिंग से प्रभावित हुए और उन्होंने मुझे फिल्म में काम करने का ऑफर दिया।' लेकिन मां दिराला बेगम नहीं चाहती थी वो फिल्मों काम करें। पर प्रोडयूसर-डायरेक्टर एसएम यूसुफ के समझाने पर वो मान गई।

वक्त बीता और आगे बढ़ती रहीं

साल था 1954 और फिल्म 'गुजारा'। जिसमें हीरो करण दीवान थे। संगीत ग़ुलाम मोहम्मद का था। फिर भी फिल्म नहीं चली। लेकिन जबीन जलील अपनी एक्टिंग से लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने में कामयाब रहीं और साल 1955 में उनकी दूसरी फिल्म 'लुटेरा'से उन्हें पहचान मिली साल 1956 की उनकी तीसरी फिल्म 'नई दिल्ली'ने सफलता के सारे मानत तोड़ दिए।

शादी में आड़े नहीं आया धर्म

छोटे भाई असजद जलील के एक दोस्त थे अशोक काफ़। अशोक काफ़ भी बेहद पढ़े-लिखे थे। जोधपुर में रहते और बतौर प्रेसिडेंटट कोडक कम्पनी में काम करते। अशोक काफ़ ने जब जबीन जलील को देखा तो पहली नजर में ही दिल दे बैठे। लगा दी शादी में दिक्कत होगी पर ऐसा हुआ नहीं। एक इंटरव्यू में जबीन जलील बताती हैं 'मैं सैयद मुस्लिम थी और अशोक कश्मीरी पण्डित। लेकिन हम दोनों ही के परिवारों का माहौल इतना खुला हुआ था कि धर्म कहीं भी हमारी शादी में आड़े नहीं आया।'

शादी के बाद फिल्मी दुनिया से हो गईं दूर

साल 1968 में अशोक काफ़ से शादी के करने के बाद जबीन जलील घर गृहस्थी में ऐसी पड़ी की उनका फिल्मी करियर पीछे छुटता चला गया। साल 1974 की फिल्म ‘वचन’ में काम करने के बाद वो फिल्मों में दूर हो गईं। पर वो समाज से जुड़ी रहीं। बेटा स्कूल जाने लगा तो वो उसी के स्कूल में बतौर चेयरपर्सन काम करने लगीं।

जब अमेरिका में जाकर बसीं

ये वो वक्त था जब जबीन जलील का कोई भी रिश्तेदार भारत में नहीं रहता था। दोनों बड़ी बहनें पाकिस्तान में थीं। छोटा भाई अमेरिका में सेटल हो चुका था। उन्होंने सोचा की बेटे की पढ़ाई और अच्छे भविष्य के लिए अमेरिका में सेटल हो जाएं। आखिरकार वो साल 1989 में पति, बेटे, सास और अपनी मां दिलारा बेगम के साथ भारत छोड़कर अमेरिका चली गईं।

बेटे के लिए 10 साल बाद लौटीं भारत

जबीन जलील की मां दिलारा बेगम का अमेरिका में निधन हो गया था। वरिष्ठ फिल्म हिस्टीरियन शिशिर कुमार शर्मा अपने एक लेख में लिखते हैं कि जबीन जलील के बेटे दिविज को अपनी नानी से बेहद लगावथा। नानी के इंतकाल के बाद वो डिप्रेशन में चला गया। डॉक्टर ने कहा – इसे भारत ले जाए। माहौल बदलेगा तो तबीयत ठीक हो सकती है। साल 1999 जबीन जलील मुंबई वापस आ गईं। डॉक्टरों की सलाह काम कर गई थी। बेटे की तबीयत में ठीक होने गई थी। पति अशोक काफ़ भी बिड़ला की कंपनी इंडिया स्टीम शिप में काम करने लगे। जबीन जलील ने भी करीब 30 साल बाद साल 2004 में दूरदर्शन के टीवी सीरियल में एक्टिंग दुनिया में कदम रखा। वहीं बेटे ने भी फिल्मों में ही अपना करियर बनाया।

'मैं खुद को इंडस्ट्री के माहौल से अलग-थलग महसूस करती रही'

 

आज 88 साल की उम्र में जबीन जलील मुंबई में रह रही हैं। वो एक इंटरव्यू के दौरान कहती है। 'करियर के दौरान मैं हमेशा खुद को इंडस्ट्री के माहौल से अलग-थलग महसूस करती रही, पर ये अनुभव मेरे बेटे के काम आएंगे। जहां तक उस दौर की यादों का सवाल है, तो मेरे जहन में ऐसा कुछ नहीं जिसे याद करके खुशी मिले और तकलीफदेह बातों को भूल जाना ही बेहतर होता है।'

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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