Actress Lalita Pawar : भगवान ने बिगाड़ा था खूबसूरत चेहरा

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बॉलीवुड में जब भी ‘खड़ूस सास’ के किरदार की बात होती है तो दिमाग में एक चेहरा उभर कर आता है। वो एक्ट्रेस जिसका चेहरा बेहद खूबसूरत था, लेकिन एक्टर भगवान दादा की वजह से चेहरे की खूबसूरती चली गई। आधे शरीर में लकवा हो गया। एक आंख छोटी हो गई। इसके बाद भी दुखों ने पीछा नहीं छोड़ा। कुछ सालों में मुंह में कैंसर हो गया। इन्हें लगा की फिल्मों में किए गए निगेटिव रोल की वजह से ऊपर बैठा भगवान शायद सजा दे रहा है। आज कहानी हिंदी सिनेमा की बेहतरीन एक्ट्रेस ललिता पवार की। इनकी जब मौत हुई तब तीन दिनों तक उनका शव कमरे में सड़ता रहा।

नासिक के बड़े सिल्क के कारोबारी लक्ष्मण राव की पत्नी अनुसूया देवी 18 अप्रैल साल 1916 को मंदिर जा रहीं थी। अभी मंदिर के गेट तक पहुंची ही थीं कि अचानक लेबर पेन होने लगा। जब तक अस्पताल ले जाते तब तक उन्होंने एक खूबसूरत सी बेटी को जन्म दिया। जिनका नाम रखा गया अंबा। उनकी आंखें बेहद खूबसूरत थीं। उस दौर में लोग लड़कियों को बहुत ही कम पढ़ाते थे। इसी वजह से अंबा भी नहीं पढ़ पाईं। नौ-दस साल की उम्र में वो एक बार पिता के साथ पुणे में एक फिल्म की शूटिंग देखने गईं।

इस वक्त मूक फिल्मों का दौर था। शूटिंग देखते वक्त एक डायरेक्टर की छोटी सी अंबा पर नजर गईं तो उस डायरेक्टर ने चाइल्ड आर्टिस्ट का रोल ऑफर कर दिया। और यहीं से उनकी फिल्मी दुनिया में एंट्री हो गई। 15 साल की उम्र में गणपत पवार से शादी हो गई और अब अंबा का नाम हो गया ललिता पवार। शादी के बाद उन्होंने कई मूक फिल्मों में काम किया। कई फिल्में प्रोड्यूस की। जब बोलती फिल्मों का दौर आया तो साल 1932 में करियर की पहली बोलती फिल्म ‘कैलाश’ में काम किया। ललिता पवार जब सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थीं। तब वे बेहद ही खूबसूरत और बोल्ड एक्ट्रेसेस में गिनी जाती थीं। हर तरफ उनके ही चर्चे थे। उन्होंने जब फिल्मों में काम शुरू किया था तो उनको 18 रुपये मिलते थे, देखते ही देखते वे सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हीरोइनों में शुमार हो गईं। सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी तहस-नहस कर दी।

साल 1942 ललिता पवार एक्टर भगवान दादा के साथ फिल्म 'जंग-ए-आजादी' के लिए शूट कर रही थीं। एक सीन में भगवान दादा को ललिता पवार को थप्पड़ मारना था। लेकिन गलती से ललिता पवार को थप्पड़ कान पर लग गया। इस कारण उनकी आंख के पास की नस फट गई। अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहां मिले गलत ट्रीटमेंट से हालत और बिगड़ गई। उनके शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया। कई साल इलाज चला। वो ठीक तो हो गईं, पर उनकी एक आंख खराब हो गई और उनका करियर भी खराब हो गया।

इस दौरान ललिता ने अपनी निजी जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव देखे। पति गणपत पवार ने भी उनका साथ छोड़ दिया था। इसके बाद ललिता ने राज प्रकाश गुप्ता से दूसरी शादी की। करीब तीन सालों बाद जब ललिता दोबारा से फिल्मी दुनिया में वापस लौटीं तो सब कुछ बदल गया। उन्हें मां-बहन और सास के रोल मिले।

अब ललिता पवार सिर्फ कैरेक्टर रोल्स तक ही सिमट गईं। लेकिन इन कैरेक्टर रोल्स में भी ललिता पवार ने ऐसी जान फूंकी कि वो हमेशा के लिए अमर हो गए। इनकी ऐक्टिंग का कमाल था कि जब इन्होंने ‘दयालु मां’ का रोल किया तो सभी की आंखें नम हो गईं। ‘खड़ूस सास’ बनीं तो दर्शकों ने खूब कोसा और टीवी सीरियल ‘रामायाण’ में ‘कपटी दासी मंथरा’ का किरदार निभाया तो दर्शकों के मन में नफरत और गुस्सा भड़क गया।

ललिता पवार वो हीरा थी जिसकी चमक से फिल्मी पर्दा कई सालों तक रोशन रहा। लेकिन अभी उनकी जिंदगी में एक और दुख आना बाकी था। उन्हें मुंह का कैंसर हो गया।

एक न्यूज पेपर की खबर के मुताबिक ललिता को जब कैंसर हुआ तब ललिता पवार ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मुझे ये सजा भगवान ने दी है। ऐसा उन नेगेटिव किरदारों की वजह से हुआ है जो मैंने फिल्मी पर्दे पर निभाए। क्योंकि दर्शकों ने उन किरदारों में मुझे खूब कोसा।’

कैंसर के बाद ललिता पवार की हालत दिनोंदिन खराब होती गई। 24 फरवरी साल 1998 को 81 साल की उम्र में इस दुनिया से अलविदा कहने वालीं ललिता पवार आखिरी समय पुणे में बंगले में अकेले रह रही थीं। पति अस्पताल में भर्ती थे। बेटा बाहर था। घर का कोई फोन नहीं उठा तो बेटे को चिंता हुई उसने पुलिस को सूचना दी। दरवाजा तोड़ने पर पुलिस को ललिता पवार का शव मिला। पोस्टमार्टम में पता चला की उनकी मौत तीन दिन पहले ही हो गई।

कई सारे अवार्ड से सम्मानित ललिता पवार ने 70 साल के लंबे एक्टिंग करियर में 700 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। इस वजह से उनका नाम Guinness World Record में भी शामिल है। कुछ ऐसे किरदार और कलाकार जो जेहन में जिंदगी भर के लिए छाप छोड़ देते हैं। ऐसे ही ललिता पवार लोगों के दिलों में हमेशा बसी रहेंगी।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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