Actress Moushumi Chatterjee : कंट्रोवर्सी नहीं, कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं, फिर भी एक दुख ने आंखों को नम कर दिया

Home   >   किरदार   >   Actress Moushumi Chatterjee : कंट्रोवर्सी नहीं, कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं, फिर भी एक दुख ने आंखों को नम कर दिया

123
views

‘वो टिपिकल हाउसवाइफ के रूप में मुझसे मिलीं। हमारे लिए नींबू-पानी बनाया। जब वे बात करती हैं, तो सिर्फ बोलतीं हैं। बाकी सभी सुनते।’

‘रियल लाइफ में थोड़ी लाउड, खूब बातें करने वालीं, मिलनसार स्वभाव, एक्सप्रेसिव और फनी हैं। यही रोल उन्होंने अपनी फिल्मों में भी निभाए। मौसमी चटर्जी रील और रियल में एक-जैसी हैं।

ये लाइनें फिल्म डायरेक्टर शूजीत सरकार ने एक न्यूज पेपर को दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी के बारे में तब कहे थे, जब वे साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म ‘पीकू’ का प्रमोशन कर रहे थे। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और इरफान खान के साथ ही मौसमी चटर्जी भी एक छोटी सी भूमिका में थी। मौसमी चटर्जी ने फिल्मों के जरिए अपनी मनमोहक मुस्कान से लाखों लोगों को दिवाना बनाया। बेहद कम उम्र में शादी, फिर कम उम्र में ही बच्चों की जिम्मेदारी, घर की जिम्मेदारी। इन सबके बाद भी अपने करियर में भी एक खास मुकाम पाया। रील और रियल लाइफ में किसी भी तरह की कोई कंट्रोवर्सी नहीं, किसी से कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं। सब कुछ ठीक था लेकिन इनके जीवन में एक दुख भी आया, जिसको शायद ही वो कभी भूल पाएंगीं।

कोलकाता के रहने वाले प्रांतोष चट्टोपाध्याय जो एक बंगाली ब्राह्मण थे। इनके घर 26 अप्रैल साल 1955 को एक बेटी पैदा हुई। जिसका नाम उनकी बड़ी बहन ने बड़े प्यार से इंदिरा रखा। दादा जज, पिता फौज में अफसर और मां हाउसवाइफ। उनके घर के आस-पास कई फिल्म स्टूडियो भी थे। उस दौरान मशहूर फिल्म मेकर तरुण मजूमदार साल 1967 में रिलीज हुई बंगाली फिल्म बालिका वधू बना रहे थे। इसके लिए वे एक चेहरा तलाश रहे थे। तभी उनकी नजर इंदिरा पर पड़ी। इंदिरा तब अपने घर से कहीं जा रही थी और तरुण मजूमदार अपने स्टूडियो के बाहर खड़े थे। उन्होंने छोटी सी इंदिरा को देखते ही ‘बालिका वधू’ के लिए चुन लिया। और इस तरह से इंदिरा ने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। तरुण मजूमदार ने ही इंदिरा को नया नाम दिया। मौसमी। अब इंदिरा को लोग मौसमी चटर्जी के नाम से जानते थे। इस वक्त मौसमी हाईस्कूल की पढ़ाई कर रहीं थी। बालिका वधू में मौसमी की एक्टिंग को देख कर कई डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में साइन करना चाहते थे। दिक्कत थी मौसमी के पिता नहीं चाहते थे वे एक्टिंग करें। लेकिन मौसमी को एक्टिंग का शौक था। जिंदगी में ये खींचतान चल ही रही थी कि 15 साल की उम्र में मौसमी को शादी करनी पड़ी।

दरअसल, मौसमी की चाची बेहद बीमार हो गईं। बचने की कोई उम्मीद नहीं। उन्होंने जिद पकड़ ली कि उनकी आखिरी ख्वाहिश है कि वे मौसमी की शादी देखें। आखिरकार चाची की जिद के आगे सभी को झुकना पड़ा। मौसमी के पिता ने घर के पड़ोस में रहने वाले अपने दौर के मशहूर सिंगर हेमंत कुमार के बेटे जयंत मुखर्जी से रिश्ता तय कर दिया। जयंत उन दिनों फिल्मों में सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर थे। चाची की ख्वाहिश का सवाल था तो बिना देर किए साल 1970 में दोनों की शादी कर दी। भले ही ये अरेंज मैरिज थी, लेकिन वक्त बीतने के साथ मौसमी जयंत को चाहने भी लगी। मौसमी बहुत किस्मत वाली निकलीं क्योंकि शादी के बाद मौसमी के पति और ससुर ने उन्हें उनके शौक फिल्मों में एक्टिंग करने के लिए प्रेरित किया।

मौसमी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ‘मेरे ससुर एक फेमस फिल्म सेलिब्रिटी थे, कई फिल्मी हस्तियां हमारे घर में आती थीं। उनमें से एक फिल्म डायरेक्टर शक्ति सामंत थे, जिन्होंने मुझ पर एक्टिंग करने का जोर दिया। शक्ति दा ने मुझे फिल्म ‘अनुराग’ के लिए चुना। इस दौरान मेरे पति और ससुर ने मुझे प्रोत्साहित किया और मैंने हामी भरी।’

घरवालों के लगाए गए पंखों के साथ मौसमी ने साल 1972 में रिलीज हुई डायरेक्टर शक्ति सामंत की फिल्म ‘अनुराग’ से बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म सुपरहिट  हुई और मौसमी फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेट हुई। मौसमी ने अपने डेढ़ दशक के करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, उन्होंने शशि कपूर, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जीतेंद्र, राकेश रोशन, राजेश खन्ना जैसे सुपरस्टार्स के साथ काम किया। लेकिन सबसे ज्यादा उनकी जोड़ी एक्टर विनोद मेहरा के साथ रही। मौसमी को असली स्टारडम साल 1974 में रिलीज हुई मनोज कुमार की फिल्म ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ से मिला। इस फिल्म के लिए ‘बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड’ भी मिला। 

साल दर साल ‘प्यासा सावन’(1981), ‘स्वयंवर’(1980), ‘आनंद आश्रम’(1977), हमशक्ल’ (1974), ‘कच्चे धागे’ (1973), ‘जहरीला इंसान’ (1974), ‘स्वर्ग नरक’ (1978), ‘फूल खिले है गुलशन-गुलशन’(1978), ‘मांग भरो सजना’ (1980), ‘ज्योति बने ज्वाला’ (1980), ‘दासी’ (1981), ‘अंगूर’ (1982), ‘घर एक मंदिर' (1984), ‘घायल’ (1990), ‘संतान’ (1993), ‘जल्लाद’ (1995) जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया।

70 और 80 के दशक में अपनी सिंपल ब्यूटी से दिल जीतने वालीं मौसमी एक ऐसी हीरोइन थीं जिन्हें अपने एक्सप्रेशन दिखाने के लिए नकली चीजों की जरूरत नहीं होती थी। वो अपने किरदार को जीती थीं और फिर जो उनका एक्सप्रेशन स्क्रीन पर आता था, वो वाकई लोगों के आंखों में आंसू ला देता था।

साल 2015 में फिल्मफेयर के ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित मौसमी चटर्जी ने बॉलीवुड के बाद पॉलिटिक्स ज्वाइन की। साल 2019 में मौसमी ने बीजेपी की सदस्यता ली। इससे पहले, वे कांग्रेस की टिकट से साल 2004 में बंगाल से चुनाव लड़ा चुकी है लेकिन जीत नहीं पाईं।

मौसमी चटर्जी के बारे में कहा जाता है कि एक्टिंग करते वक्त वे बिना ग्लिसरीन लगाए सीन की डिमांड पर रो सकती थीं। लेकिन उनकी रील लाइफ में एक ऐसी दुखद घटना घटी जो उनकी आंखों को हमेशा के लिए नम कर गई।

हुआ यूं कि शादी के बाद महज 18 साल की उम्र में मौसमी चटर्जी ने अपनी पहली बेटी पायल और कुछ साल बाद दूसरी बेटी मेघा को जन्म दिया। मौसमी चटर्जी की बड़ी बेटी पायल क्रिएटिव एक्जीक्यूटिव थीं। पायल ने साल 2010 में बिजनेसमैन डिकी सिन्हा से लव मैरिज की। लेकिन पायल की शादी ही बहुत बड़ी गलती थी। पायल ने लंबी बीमारी के बाद साल 2019 में तम तोड़ दिया। मौसमी और जयंत ने पायल के निधन का दोष उनके पति डिकी सिन्हा को दिया और मुंबई हाईकोर्ट में केस किया।

मौसमी और जयंत का कहना था कि, ‘पायल की तबीयत बहुत खराब थी। यहां तक कि वो कोमा में भी चली गई थी। लेकिन डिकी ने पायल का कोई ध्यान नहीं दिया। डिकी पायल से हम लोगों को मिलने भी नहीं देता था।’

खूबसूरत और टैलेंटेड हीरोइन होते हुए भी घर की सभी जिम्मेदारी उठाते हुए एक साधारण गृहणी का किरदार बखूबी निभाने वाली मौसमी चटर्जी पैसे और शोहरत को अस्थाई मानती हैं।

वे कहती हैं, ‘मैं सकारात्मक सोच रखती हूं और ऐसा नहीं सोचती कि कोई भी चीज बिना किसी वजह के होती है। लाइफ ने मुझे बहुत तज़ुर्बे दिए हैं। मेरा मानना है कि, पैसा और शोहरत अस्थाई हैं। आपका बर्ताव, प्रतिबद्धता और सोच ही हमेशा आपके साथ रहती हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!