Actress Nalini Jaywant : दो फिल्म डायरेक्टर से शादी, एक एक्टर से मोहब्बत फिर भी जिंदगी तन्हा

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एक्ट्रेस नलिनी जयवंत (Actress Nalini Jaywant) खूबसूरती के मामले में मधुबाला को भी मात देती थीं। छोटे कद और गठीले बदन की नलिनी जयवंत खूबसूरत थीं लेकिन उनका अंत सड़ा हुआ था।

 

'सच में दत्त साहब का दिल कितना बड़ा था'

25 जून साल 2005, हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर सुनील दत्त का निधन हुआ। उन्हें याद करते हुए फिल्म हिस्टोरीयन अली पीटर जॉन ने एक मैगजीन में एक लेख लिखा था – शीर्षक का नाम था 'सच में दत्त साहब का दिल कितना बड़ा था'

'सुनील दत्त का अनुरोध मेरे लिए आदेश था'

अली पीटर जॉन अपने लेख में लिखते हैं कि 'एक दिन सुनील दत्त ने मिलने बुलाया। मैं सुबह 7:30 बजे उनके पाली हिल वाले बंगले पहुंचा। उन्होंने कहापहले ठीक से नाश्ता करो। क्योंकि दिन भर खाने की फुर्सत नहीं मिलेगी। मैं कुछ समझ नहीं पाया आखिर होने क्या वाला हैपर उनका अनुरोध मेरे लिए आदेश था।'

सुनील दत्त को देख भगवान दादा का खिल गया चेहरा

अली पीटर जॉन अपने लेख में आगे लिखते हैं कि 'नाश्ता करने के बाद हम एक एंबेसडर कार से रवाना हुए और सबसे पहले परेल की भीड़-भाड़ वाली गलियों में उतरे। हाथों में एक छड़ी लिए चल रहे सुनील दत्त के पीछ-पीछे मैं था। सबसे पहले एक चॉल के छोटे से कमरे में घुसे। सामने कुर्सी में बैठे थे लकवाग्रस्त और मुश्किल से बोल पा रहे अपने दौर के ग्रेड कॉमेडियन और फिल्म प्रोड्यूसर भगवान दादा। सुनील दत्त को देख भगवान दादा का चेहरा खिल गया।'

कैंसर से जूझे राजन हक्सर

'फिर हमने टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल में कैंसर से जूझ रहे एक्टर राजन हक्सर का हालचाल लिया। मैं समझ गया कि सुनील दत्त आज पूरे दिन क्या करने वाले हैं।'

शराब ने बना दिया अंधा

'हम चेंबूर की एक चॉल गए। वहां एक छोटे से कमरे में अपने दौर के दिग्गज विलेन केएन सिंह से मिले। वो याददाश्त खो चुके थे और शराब ने उन्हें अंधा बना दिया था।'

चेहरा काला और कम हो बाल

'दिन बिता हम चेंबूर में ही दिग्गज एक्टर अशोक कुमार के बंगले गए। अशोक कुमार का चेहरा काला और बाल कम हो गए थे। अशोक कुमार ने खूब बातें कीखाना भी खिलाया।

बदहवास हालात में हटलतीं मिली नलिनी जयवंत

'जैसे ही हम दादामुनी के बंगले के बाहर निकले तो देखा की नलिनी जयवंत बदहवास हालात में टहल रही थीं। नलिनी जयवंत ने कोई बात नहीं की और सुनील दत्त ने भी बात करना मुनासिब नहीं समझा। वजह थी नलिनी जयवंत अल्जाइमर से पीड़ित थीं उनकी याददाश्त चली गई थी। हमें उन्हें वैसे ही छोड़ना पड़ा जैसे वो थीं और हम आगे चले गए।'

दो शादी, एक से मोहब्बत

नलिनी जयवंत पाई-पाई को मोहताज थींरोटी खाने तक के पैसे नहीं। दो शादीएक से मोहब्बत की फिर भी तन्हा। जब मौत हुई तो तीन दिनों तक लाश सड़ती रही। न मोहल्ले वाले न कोई रिश्तेदारबॉडी लेने कोई नहीं आया। इन्हें लावारिस लाश की तरह फूंक दिया।

जिंदगी खूबसूरत अंत बेहत दुख भरा

आज कहानी खूबसूरती के मामले में मधुबाला को भी मात देने वालीं गुजरे जमाने की दिग्गज एक्ट्रेस नलिनी जयवंत की। 24 साल के फिल्मी सफर में 53 फिल्मी कीं। छोटे कद और गठीले बदन की नलिनी जयवंत जो बेहद खूबसूरत थीं लेकिन उनका अंत सड़ा हुआ था।

फिल्में देखी तो एक्ट्रेस बनने का ख्वाब जागा

18 फरवरीसाल 1926 मुंबई के एक मराठी परिवार में नलिनी जयवंत का जन्म हुआ। पिता कस्टम अफसर और मां हाउस फाइफ। दो भाई भी थे। बचपन से ही डांस और गाने का शौकपिता ने हीराबाई जवेरी से क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग दिलवाई। पिता के पास एक सिनेमा हॉल था वो वहां फिल्में देखतीं तो एक्ट्रेस बनने का ख्वाब जागा।

एक्ट्रेस शोभना समर्थ से चिढ़ते थे घर वाले 

हीरोइन बनने की वजह एक और थी। वो अपने दौर की फेमस एक्ट्रेस शोभना समर्थ से प्रभावित थीं। नलिनी जयवंतशोभना समर्थ की कज़न सिस्टर थीं। शोभना समर्थ की बेटी एक्ट्रेस नूतन और तनुजा और तनुजा की बेटी काजोल और तनिषा। इस रिश्ते से नलिनी जयवंत काजोल की नानी लगीं। लेकिन नलिनी के पिता शोभना समर्थ के परिवार से चिढ़ते थे क्योंकि वो फिल्मों में काम करने को अच्छा नहीं मानते। उन्होंने शोभना समर्थ को कई बार जान से मारने तक की धमकी भी दी। इस वजह से शोभना समर्थ की मां रतन बाई ने नलिनी जयवंत के घर वालों से रिश्ते तोड़ दिए।

फिल्म 'राधिका' से किया डेब्यू

इधर नलिनी जयवंत हीरोइन बनने पर अड़ी थी। वो जिद्द करतीं तो उन्हें पीटा जाता। उन्हें किसी भी तरह अपने सपनों को पूरा करना था। एक दिन नलिनी जयवंत, शोभना समर्थ के बर्थडे पर उनके घर गईं। पार्टी में फिल्म प्रोड्यूसर चिमनलाल देसाई भी आए थे। वो उन दिनों साल 1941 की फिल्म 'राधिका' बना रहे थे। उन्हें नये चेहरे की तलाश थी। जब चिमन लाल देसाई ने 14 साल की नलिनी जयवंत को देखा तो तय कर लिया वो उन्हीं को कास्ट करेंगे। 

फिल्म डायरेक्टर से की शादी

चिमनलाल देसाई ने नलिनी जयवंत के पिता को समझाया। कहा - 'वक्त बदल गया है।तब कहीं नलिनी जयवंत के पिता मानें। इस तरह से साल 1941 की फिल्म 'राधिका' से नलिनी जयवंत ने डेब्यू किया। फिल्म 'राधिका' के डायरेक्टर चिमनलाल देसाई के बेटे वीरेंद्र देसाई थे। फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों की दोस्ती हुईप्यार हुआ। शादी करना चाहते थे। दिक्कत थी दोनों के घर वाले। क्योंकि वीरेंद्र देसाई पहले से शादीशुदा थेएक बच्चे के पिता थे और नलिनी से उम्र में 13 साल बड़े भी थे। फिर भी दोनों ने शादी की। इस वजह से दोनों के परिवार ने उन्हें बेदखल कर दिया। 

फिल्म 'बहन' से मिली पहचान 

फिर इनके सहारा बने 'फिल्मिस्तानस्टूडियो के मालिक शशधर मुखर्जी। उन्होंने दोनों को अपने स्टूडियो में नौकरी में दी। साल 1941 में ग्रेट डायरेक्टर महबूब खान की फिल्म 'बहनमें काम मिला। फिल्म हिट हुई। नलिनी के काम को भी सराहा गया। 

पहले पति से लिया तलाक 

लेकिन अभी नलिनी को बड़े रोल नहीं मिल रहे थे। दो वजहें थी। पहली, वो सिर्फ 15-16 साल की थीं। दूसरी, उन्होंने शशधर मुखर्जी के सामने ये शर्त रख दी कि वो उसी फिल्म में काम करेंगी जिस फिल्म को उनके पति डायरेक्ट करेंगे। इस बात से शशधर मुखर्जी नाराज हो गए। उनकी बेहद कम फिल्में आ रही थी लोग उन्हें भूल रहे थे। इसका असर नलिनी और वीरेंद्र की शादीशुदा जिंदगी पर पड़ा। दोनों झगड़ते। जिस वजह से शादी के पांच साल बाद दोनों ने तलाक ले लिया। वीरेंद्र देसाई को शराब की लत गई। शराब की वजह से साल 1947 में सिर्फ 34 साल की उम्र में वो दुनिया से अलविदा कह गए।

फिल्म 'अनोखा प्यार' ने कराया हिट 

साल 1948 की फिल्म 'अनोखा प्यारमें दिलीप कुमार और नरगिस के साथ नलिनी जयवंत ने भी शानदार काम किया। लव ट्रायंगल पर बनी इस फिल्म के बाद तय हुआ कि नलिनी जयवंत फिल्मों में लंबे वक्त के लिए ठहरने जा रही हैं।

मधुबाला से भी थीं खूबसूरत

40 और 50 के दशक में नलिनी जयवंत, उस दौर की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेसेस में से एक मधुबाला को टक्कर देती थीं। साल 1952 में फिल्मफेयर मैगजीन ने एक पोल किया थाजिसमें खूबसूरती के मामले में पहले नंबर पर नलिनी जयवंत आईं और मधुबाला चौथे नंबर पर। दूसरे और तीसरे नंबर पर बीना राय और नरगिस थीं। साल 1951 में नलिनी जयवंत ने एक मैगजीन के लिए बोल्ड फोटोशूट करवाया। जो उस वक्त बेहद सुर्खियों में रहा। साल 1954 की फिल्म 'नाज' में लीड रोल किया। 'नाजऐसी पहली हिंदी फिल्म थी जिसकी शूटिंग विदेश में हुई।

हर बड़े एक्टर के साथ किया काम

साल 1951 की 'जादूमें 'सुरेश'फिल्म 'नौजवानमें 'प्रेमनाथ'साल 1953 में 'शिकस्तमें 'दिलीप कुमार', 1954 की 'नास्तिकमें 'अजीत', 1956 की फिल्म 'हम सब चोर हैंमें 'शम्मी कपूर', साल 1955 की फिल्म 'रेलवे प्लेटफार्ममें एक्टर 'सुनील दत्तऔर साल 1958 की 'कालापानीमें 'देव आनंदके साथ काम किया।

'नास्तिकमें अमिताभ की मां के रोल में नजर आईं 

साल 1965 की फिल्म 'बॉम्बे रेसकोर्सके बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। वजह थी कि उन्हें फिल्मों में लीड रोल के ऑफर नहीं मिलते। हालांकि आखिरी बार वो 18 साल बाद साल 1983 में फिल्म 'नास्तिकमें नजर आईं थीं। इस फिल्म में वो अमिताभ बच्चन की मां के रोल में दिखीं थी।

अशोक कुमार से की थी मोहब्बत 

साल

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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