Actress Nargis : एक ख्वाहिश जो अधूरी रह गई

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साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म बॉबी में एक सीन हैं। राज यानी ऋषि कपूरमिसेज ब्रिगेंजा यानी दुर्गा खोटे से मिलने उनके घर जाते हैं। दरवाजा नॉक करते हैं। तो, किचन में पकोड़े तल रहीं, बॉबी यानी डिंपल दरवाजा खोलती हैं। दरवाजा खोलते वक्त अचानक बेसन से सने हाथ डिंपल के माथे और बालों में लग जाते हैं। इस तरह से जब ऋषि कपूर उनको देखते हैं। तो देखते ही रह जाते हैं।

25 सालों से जेहन में बसे एक सीन को किया था रीक्रिएट

ये सीन फिल्म के डायरेक्टर राज कपूर ने रीक्रिएट किया था। जो उनके जेहन में 25 सालों से था। जब इसी तरह से उन्होंने पहली बार नरगिस को देखा था। पहले से शादीशुदा राजकपूर 19 साल की बेहद खूबसूरत नरगीस को देखते ही दिल दे बैठे। और उन की ये मोहब्बत नौ सालों तक चली। बॉलीवुड में अपनी अदाओं से आज भी लोगों के दिलों में राज करने वाली एक्ट्रेस नरगिस जिनकी खूबसूरती का दीवाना सारा जमाना था। जो बिना हीरो के फिल्म को हिट कराने का दम रखती थीं। नरगिस के नाम कई सारे रिकार्ड भी हैं। जो शायद ही आपको पता होंगे। इनकी एक ख्वाहिश भी थी जो अधूरी रह गई।

फातिमा राशिद से बनीं नरगिस

20 और 30 के दशक के दौर में पहली महिला म्यूजिक कंपोजरसिंगर, एक्टरप्रोड्यूसर और डायरेक्टर जद्दन बाई कोलकाता में रहती थीं। उनके घर 01 जून साल 1929 को एक बेटी का जन्म हुआ। जिसका नाम फातिमा राशिद रखा गया। घर में फिल्मी माहौल था। तो फातिमा ने भी चार साल की उम्र में साल 1935 में रिलीज हुई फिल्म ‘तलाश-ए-हक’ में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इस फिल्म को उनकी मां जद्दनबाई ने ही प्रोड्यूस किया था। फिल्मों में आने के बाद फातिमा का नाम बदलकर नरगिस हो गया। लगभग 13 साल की उम्र में साल 1942 में रिलीज हुई फिल्म ‘तमन्ना’ से नरगिस पहली बार लीड रोल में नजर आईं।

जब राज कपूर से मिलीं नरगिस

वक्त यूं गुजर ही रहा था कि फिल्मी दुनिया में अपने पांव जमाने की जद्दोजहद कर रहे राज कपूर से उनकी मुलाकात होती है। मशहूर राइटर मधु जैन अपनी किताब ‘फर्स्ट फैमिली ऑफ इंडियन सिनेमा- द कपूर्स’ में लिखती हैं कि  साल 1948 के आसपास राज कपूर को एक फिल्म स्टूडियो की तलाश थीउस दौर में नरगिस की मां जद्दन बाई एक मशहूर स्टूडियो में शूटिंग कर रही थीं। उन्हें लगा,  जद्दन बाई इस बात की जानकारी दे सकती हैं कि स्टूडियो में किस तरह की सुविधाएं हैं। इसलिए राज कपूर उनसे मिलने उनके घर पहुंचे, पर सामना हुआ 19 साल की उम्र तक 7-8 फिल्मों में काम कर चुकीं नरगीस से। रसोई में तलते हुए पकौड़े छोड़कर वो दरवाजा खोलने आईं। उनके हाथों में लगा बेसन बालों पर लग गया। ये देखते ही राजकपूर की नजर में नरगीस ऐसा बस गईं कि लगभग नौ सालों तक दोनों ने न सिर्फ एक साथ काम किया बल्कि दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई।

नरगिस ने की राजकपूर की मदद

नरगिस ने अपना दिलअपनी आत्मा और अपना पैसा भी राज कपूर की फिल्मों में लगाना शुरू कर दिया। फ्लॉप फिल्मों के दौर में जब राज कपूर को पैसों की तंगी हुई तो नरगिस ने अपने गहने तक बेचे। दूसरे प्रोड्यूसर के साथ काम किया ताकि वे राज कपूर की मदद कर सकें।

जब राज कपूर ने छोड़ा साथ

राज कपूर के साथ  ‘आह’,  ‘आग’,  ‘अंदाज’,  ‘आवारा’, ‘बरसात’, चोरी-चोरी’, ‘श्री 420’ जैसी फिल्में करने बाद नरगिस राज कपूर से शादी करना चाहती थीं। पहले से शादीशुदा राज कपूर की दूसरी पत्नी बनने के लिए भी वो तैयार थीं। लेकिनराजकपूर को ये मंजूर नहीं था उन्होंने इस रिश्ते से दूरी बनाकर अपने कदम पीछे हटा लिए।

सुनील दत्त और नरगिस की कैसे हुई मुलाकात?

इसके बाद प्यार में टूटा दिल लिए नरगिस के जिंदगी में एक्टर सुनील दत्त की एंट्री होती हैं। दरअसल सुनील दत्त सीलोन रेडियो में बतौर रेडियो जॉकी का काम किया करते थे। और तब नरगिस एक फेमस एक्ट्रेस थीं। एक बार नरगिस इंटरव्यू के लिए रेडियो स्टेशन आई। जब सुनील दत्त ने उन्हें देखा तो घबरा गए और एक भी सवाल नहीं पूछ पाए। पहली नजर में शायद सुनील उनको चाहने लगे थे। खैर वक्त गुजरा सुनील दत्त फिल्मों में काम मांगने के लिए 'दो बीघा जमीनके सेट पर आए। वहीं नरगिस भी किसी से मुलाकात करने आईं थी। तब नरगिस उन्हें देखकर पहचान गईं।

नरगिस को आग से बचाने पर खुद झुलसे सुनील दत्त

इसके बाद दोनों साल 1957 में रिलीज हुई डायरेक्टर महबूब खान की फिल्म 'मदर इंडियामें साथ नजर आए, जिसमें सुनील दत्त ने नरगिस के बेटे का रोल किया था। 'मदर इंडियाके एक सीन के लिए सेट पर आग लगाई गई थी, देखते ही देखते आग काबू से बाहर हो गई और एक्टिंग कर रहीं नरगिस उसमें फंस गई। तब सुनील दत्त ने उन्हें बचाया,  सुनील ने नरगिस को तो बचा लिया लेकिन खुद जल गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। जब नरगिस सुनील को अस्पताल में देखने गईं तभी सुनील दत्त ने नरगिस को अपने प्यार का इजहार कर दिया। नरगिस भी मान गईं।

गुपचुप तरीके से की शादी 

साल 1958 में दोनों ने गुपचुप तरीके से शादी की। इस शादी की खबर लोगों को एक साल बाद तब पता चली जब उन्होंने रिसेप्शन की पार्टी दी। शादी के बाद नरगिस ने फिल्मी दुनिया को लगभग-लगभग अलविदा कह दिया। वे तीन बच्चों प्रिया, नम्रता और संजय दत्त की मां बनीं।

नरगिस के नाम कई सारे रिकॉर्ड

नरगिस वो पहली एक्ट्रेस रहीं हैं जिन्हें साल 1958 में पद्मश्री सम्मान मिला। फिल्म ‘मदर इंडिया’ के लिए कार्लोवी वेरी इंटरनेशनल फेस्टिवल में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। ये अवॉर्ड पाने वाली वो पहली इंडियन एक्ट्रेस थीं। उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस का भी अवार्ड मिला है। साल 1970 में नरगिस द स्पास्टिक सोसाइटी ऑफ इंडिया की पहली संरक्षक भी बनीं। उसके बाद उन्होंने सोशल वर्कर के रूप में काम किया। साल 1980 में राज्यसभा में मनोनीत होने वाली पहली एक्ट्रेस भी नरगीस हीं थी।

जब हुआ कैंसर  

साल 1980 में ही पता चला की उन्हें कैंसर हैं वे अमेरिका से इलाज कराकर आई। लेकिन भारत लौटने परउनकी हालत बिगड़ गई। इस दौरान संजय दत्त अपनी पहली फिल्म रॉकी’ से बतौर हीरो इंडस्ट्री में लॉन्च होने वाले थे । नरगिस की ख्वाहिश थी कि वो अपने बेटे की फिल्म देखें। लेकिन उनकी ये ख्वाहिश अधूरी रह गई। संजय दत्त की फिल्म रिलीज होने से केवल पांच दिन पहले ही 3 मई साल 1981 को 52 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। 7 मई, साल 1981 को जब फिल्म 'रॉकी' का प्रीमियर हुआ तो नरगिस के लिए एक सीट खाली रखी गई। साल 1982 में सुनील दत्त ने नरगिस की याद में नरगिस दत्त मेमोरियल कैंसर फाउंडेशन की स्थापना की।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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