वो अदाकारा, जिसने देश के लिए अपने पति को छोड़ा, बेटी के लिए एक्टिंग छोड़ दी

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वो खूबसूरत इतनी कि इन्हें पर्दे में रखा जाता। शाही शानो शौकत के बीच बचपन बीता। घरवालों ने लाख मना किया। फिर भी फिल्मों में एक्टिंग की। 30 और 40 के दशक में इंडस्ट्री पर राज किया। खिताब मिला, ब्यूटी क्वीन और पहली फीमेल सुपरस्टार का। फिर भी न जाने क्यों सी ग्रेड फिल्मों में काम किया। 1947 के बंटवारे में पति छीन गया। और फिर अपनी बेटी के लिए फिल्मों में काम करना भी बंद कर दिया। जिंदगी के आखिरी दिनों में इनकी बस छोटी सी दुनिया रह गई।

आज कहानी एक्ट्रेस नसीम बानो की। जो नहीं चाहती थीं गैर मजहब में बेटी की शादी हो। तो बेटी की शादी उम्र में 22 साल बड़े एक सुपरस्टार से करा दी।

14 अप्रैल, साल 1919 को जन्मी प्लेबैक सिंगर शमशाद बेगम से पहले एक और शमशाद बेगम थीं। छमियान बाई के नाम से मशहूर ये भी एक सिंगर थीं।

इनकी शादी नवाब अब्दुल वहीद खान से हुई। अब्दुल वहीद खान यूपी के अमरोहा के पास एक छोटी सी रियासत हसनपुर के नवाब थे। जिसके पास दौलत-शोहरत की कोई कमी नहीं थी।

इन्ही के घर 4 जुलाई, साल 1916 को बेटी ‘रोशन आरा बेगम’ का जन्म हुआ। जो बेहद खूबसूरत थी। किसी नजर न लगे इसलिए हमेशा पर्दे में रखा जाता।

दिल्ली के क्वीन मारी हाईस्कूल में पढ़ने पालकी से जाया करतीं। रोशन का बचपन शानो-शौकत से भरा था। और उनको शौक था फिल्में देखने का। वो एक्ट्रेस रूबी मेयर्स को एडमायर करतीं।

लेकिन, उनकी फैमिली को ये पसंद नहीं था। माता-पिता चाहते थे कि बेटी पढ़-लिखकर डॉक्टर बने।

एक बार स्कूल की छुट्टियों के दौरान रोशन आरा मुंबई घूमने गईं। वहां वो फिल्म की शूटिंग देखने के लिए जिद करने लगीं। तो माता पिता ले गए शूटिंग दिखाने। वहां जब एक डायरेक्टर ने खूबसूरत रोशन आरा को देखा तो फिल्म में काम करने का ऑफर दे दिया। लेकिन मां ने बच्ची कहकर बात टाल दी। एक बार फिल्म डायरेक्टर और एक्टर सोहराब मोदी ने रोशन आरा को देखा तो उन्होंने भी फिल्म में काम करने को कहा। फिर मां ने इनकार किया। लेकिन, इस बार रोशन आरा ने भूख हड़ताल कर दी। घरवालों को मानना पड़ा। 19 साल की उम्र में साल 1935 की फिल्म ‘खून का खून’ से डेब्यू किया और अपना नाम रखा नसीम बानो। साल 1939 की फिल्म ‘पुकार’ से पहचान मिली। साल 1950 की ‘शीश महल’ इनकी बेहतरीन फिल्म मानी जाती है।

सोहराब मोदी, चंद्र मोहन, पृथ्वीराज कपूर जैसे एक्टर्स के दौर में नसीम बानो बॉलीवुड की पहली सुपर-स्टार कहलाईं। खूबसूरत इतनी की ब्यूटी क्वीन का खिताब मिला। 40 के दशक में एक्ट्रेस सुरैया, नूरजहां, नरगिस, मधुबाला का दौर आ गया। लेकिन, नसीम की अहमियत कम नहीं हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, नसीम ने करियर के शुरुआती दौर में एक्टर सोहराब मोदी से कांट्रेक्ट कर लिया। जिसकी वजह से ये किसी बड़े बैनर के साथ काम नहीं कर पा रही थीं। इसी वजह से इन्होंने सी ग्रेड फिल्मों में काम किया जो उनकी पर्सनालिटी से बिल्कुल अलग था।

करियर के पीक में नसीम ने अपने बचपन के प्यार पेशे से आर्किटेक्ट मियां एहसान-उल हक से शादी कर ली। शादी के बाद दोनों ने ‘ताज महल पिक्चर्स’ प्रोडक्शन हाउस की शुरुआत की। इसके बैनर तले  ‘मुलाकात’, ‘चांदनी रात’ और ‘अजीब लड़की’ फिल्म का प्रोडक्शन किया।

जीवन गुजर ही रहा था कि तभी पति से बिछड़ना पड़ा। वजह थी, बंटवारा। साल 1947 के बंटवारे के बाद नसीम के पति एहसान उल हक पाकिस्तान चले गए। लेकिन, नसीम ने भारत में ही रहने का फैसला किया। पाकिस्तान जाने से मना कर दिया। एहसान उल हक दोबारा भारत नहीं आए। वो अपने साथ नसीम की कई फिल्मों के निगेटिव ले गए। जो उन्होंने पाकिस्तान में रिलीज किए। क्योंकि, नसीम पाकिस्तान में भी बेहद पॉपुलर थीं।

साल 1957 की एक्टर और डायरेक्टर गुरुदत्त की फिल्म ‘प्यासा’ और साल 1967 की डायरेक्टर एम सादिक की फिल्म ‘नूरजहां’ में काम करने के ऑफर मिले। पर नसीम ने मना कर दिया। साल 1952 की फिल्म ‘अजीब लड़की’ में काम करने के बाद नसीम ने एक्टिंग से दूरी बना ली। इसकी वजह थी उनकी बेटी। जो कोई और नहीं बल्कि अपने दौर की दिग्गज एक्ट्रेस ‘सायरा बानो’ थीं। नसीम ने रिटायरमेंट के बाद अपनी बेटी सायरा बानो को आगे बढ़ाने का फैसला लिया। डायरेक्टर और प्रोड्यूसर फिल्मों में साइन करने आते तो थे सायरा बानो के लिए लेकिन जब वो नसीम को देखते तो उन्हें भी फिल्म में काम करने का ऑफर दे देते। लेकिन, नसीम नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी सायरा और उनके बीच खूबसूरती और एक्टिंग को लेकर कोई तुलना हो। रिटायरमेंट के बाद नसीम ने खाली बैठने के बजाए अपनी बेहद खूबसूरत बेटी सायरा बानो की खूबसूरती में चांद लगाने का काम किया।

सायरा बानो के लिए वो कपड़े, गहने वगैरा डिजाइन करतीं। बात उसल दौर की जब सायरा बानो और एक्टर राजेंद्र कुमार के बीच अफेयर के किस्से सुनाई दिए। तब नसीम बानो ने 22 साल की सायरा की शादी पहले से शादीशुदा 44 साल के एक्टर दिलीप कुमार से सिर्फ इसलिए करवा दी क्योकि वो नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी की शादी किसी गैर मजहब लड़के से हो।

जिंदगी के आखिरी वक्त तक घर के फैसले लेने वालीं नसीम की मुंबई में अपने बंगले में रहतीं। उनकी छोटी से दुनिया थी। बेटी सायरा और बेटा सुल्तान अहमद। 85 साल की उम्र में 18 जून, 2002 में उन्होंने दुनिया से अलविदा कह दिया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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