Actress Nirupa Roy : 'दुखों की रानी' की कहानी

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एक्ट्रेस निरूपा रॉय (Actress Nirupa Roy) ने सिर्फ 'मां' वाले ही किरदार नहीं किए। ये पहली एक्ट्रेस थीं जिन्होंने 'सुपरवुमन' का रोल किया। कई फिल्मों में स्टंट भी किए। 'देवी' के रोल किए तो लोग इन्हें सच में देवी मानकर इनके पैर छूते।

100 करोड़ की प्रॉपर्टी के झगड़े ने दिया सदमा

साल 1963साउथ मुंबई के नेपियन सी रोड पर एंबेसी अपार्टमेंट में 10 लाख रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी गई। इस प्रॉपर्टी में तीन हजार स्क्वायर फीट में फैला घर है और आठ हजार स्क्वायर फीट का गार्डन। ग्राउंड फ्लोर के तीन फ्लैट्स से मिलकर बने इस बड़े से घर के गार्डन में बैठकर समुद्र भी दिखाई देता है। गार्डन में लगी संगमरमर की मूर्तियां नजारे को और भी खूबसूरत बनातीं। मौजूदा वक्त में इस आलीशान घर की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है। इस प्रॉपर्टी को पाने के लालच में दो बेटे अपनी मां से झगड़ते उनसे मारपीट करते। क्योंकि मां इस पूरी प्रॉपर्टी मालिक थीं। उनकी बहू ने भी उन पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का मुकदमा किया। जेल जाने की नौबत तक आई। इस वजह से उस मां को गहरा सदमा लगा। ये सीकिसी फिल्म का नहीं बल्कि असल जिंदगी का है। संयोग ये है कि इस सीन में जो मां हैं। उन्हें हिंदी फिल्मों में 'दुखियारी मां' वाले किरदारों के लिए याद किया जाता है। इस तरह का सलूक तो उनके साथ किसी फिल्म में भी उनके बेटे ने नहीं किया था। आज कहानी निरूपा रॉय की... जिन्होंने सिर्फ मां वाले ही किरदार नहीं किए।

पिता ने जिंदगी भर नहीं देखा इनका मुंह

छह दशक के सफर में 250 से ज्यादा फिल्मों में अशोक कुमारबलराज साहनीभरत भूषण जैसे एक्टर्स की हीरोइन बनीं। ये पहली एक्ट्रेस थीं जिन्होंने 'सुपरवुमन' का रोल किया। कई फिल्मों में स्टंट भी किए। इन्होंने फिल्मों में देवी के रोल किए तो लोग इन्हें सच में देवी मानकर इनके पैर छूते। निरूपा रॉय जिनकी निजी जिंदगी भी बेहद दिलचस्प है। जब इन्होंने फिल्मों में काम किया तो पति ने इनका सपोर्ट किया पर पिता ने मरते दम तक इनका मुंह तक नहीं देखा।

चौथी में पढ़ने दौरान करा दी गई शादी

गुजरात के वलसाड में रहने वाले किशोर चंद्रजो एक परंपरावादी गुजराती चौहान फैमिली से ताल्लुक रखते थे और रेलवे में नौकरी करते थे। इन्हीं के घर 4 जनवरीसाल 1931 को एक बेटी का जन्म हुआ। नाम रखाकांता चौहान। ये माता-पिता की खूब लाडली थीं। वो इन्हें प्यार से 'छिबी' भी कहृते। इनकी एक छोटी बहन थी। कांता का पढ़ाई में मन नहीं लगताजब वो चौथी क्लास में पढ़ ही रही थीं तभी पिता ने इनकी शादी करा दी।

पति बनना चाहते थे एक्टर

साल 1945 में सिर्फ 14 साल की उम्र में कांता के पति बने कमल बलसारा। शादी के बाद कांता का नाम कोकिला बलसारा हो गया और वो मुंबई में रहने लगीं क्योंकि इनके पति कमल बलसारा मुंबई में राशनिंग इंस्पेक्टर की पोस्ट पर काम करते थे।  कमल बलसारा सरकारी नौकरी तो कर रहे थे लेकिन इस नौकरी में उनका मन नहीं लगता, वो एक एक्टर बनना चाहते थे।  अशोक कुमार से प्रभावित कमल बलसारा हमेशा इस मौके की तलाश में लगे रहते की किसी तरह उन्हें फिल्मों में काम मिल जाए। एक दिन अचानक उनकी नजर अखबार में निकले एक विज्ञापन पर पड़ी।

किस्मत से मिला हीरोइन बनने का ऑफर

फिल्म इतिहासकार और लेखक शिशिर कृष्ण शर्मा अपने एक लेख में लिखते हैं कि 'अभी शादी के तीन-चार महीने बीते ही थे कि कमल बलसारा की नजर 'सनराईज पिक्चर्स' के बैनर तले बन रही गुजराती फिल्म 'राणक देवी' के लिए नए चेहरों की तलाश से संबंधित एक विज्ञापन पर पड़ी। उन्होंने इसके लिए आवेदन कर दिया। इंटरव्यू के लिए बुलावा आया तो कमल बलसारा के साथ उनकी पत्नी कोकिला बलसारा भी स्टूडियो गईं।' 'कमल बलसारा जब ऑडिशन देने पहुंचे तो फिल्म प्रोड्यूसर वीएम व्यास उनसे बोले, ये मौका आपको नहीं मिल सकता। आपकी पर्सनालिटी में एक्टर वाली बात नहीं है। लेकिन अगर आपकी पत्नी कोकिला बलसारा फिल्म में काम करना चाहें तो मैं उन्हें फिल्म की हीरोइन बना सकता हूं।'

कोकिला बलसारा से बनीं निरूपा रॉय 

दरअसलफिल्म प्रोड्यूसर वीएम व्यास ने जब बेहद खूबसूरत कोकिला बलसारा को देखा तो अपनी फिल्म में कास्ट करने का मन बना लिया। पति कमल बलसारा ने भी सोचा कि 'मुझे तो मौका मिला नहींमैं अपनी पत्नी के जरिए ही अपने सपनों को पूरा कर लुंगा।' पति कमल बलसारा के कहने पर कोकिला बलसारा ने भी हामी भर दी। कोकिला बलसारा को 'सनराईज पिक्चर्स' के मालिक और फिल्म प्रोड्यूसर वीएम व्यास ने नया नाम भी दिया – निरूपा रॉय। अब कोकिला बलसारा 'निरूपा रॉय' हो गईं तो पति कमल बलसारा भी सरनेम 'बलसारा' की जगह 'रॉय' लिखने लगे।

मां से मिलती थीं छुप-छुपकर

निरूपा राय का फिल्मी सफर तो शुरू हो गया। पर उनका मायका छूट गया।दरअसलउस दौर में फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। ऊपर से एक महिला फिल्मों में काम करें तो हंगामा खड़ा होना लाजमी था। निरूपा रॉय ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 'पिताजी ने धमकी दे डाली कि अगर फिल्मों में काम कियातो हमेशा के लिए रिश्ता खत्म हो जाएगा। पिताजी अपनी बात पर जिंदगी भर अड़े रहे। उन्होंने आखिरी सांस तक मेरा मुंह नहीं देखा। पिताजी का खौफ ही था कि मैं अपनी मां से छुप छुपकर मिलती थीं।'

खूब पसंद की गई त्रिलोक कपूर और निरूपा रॉय की जोड़ी   

इसके बाद निरूपा रॉय के काम पर नजर आने लगी। हिंदी फिल्म प्रोड्यूसर होमी वाडिया की। होमी वाडिया ने इन्हें साल 1946 की 'अमर राज' में बतौर लीड हिरोइन कास्ट किया। इस फिल्म में त्रिलोक कपूर के साथ निरूपा रॉय की जोड़ी को खूब पसंद किया। साल 1953 की फिल्म 'दो बीघा जमीनमें बलराज साहनी के साथ काम करने का बाद निरूपा रॉय बतौर हीरोइन स्थापित हो गईं। साल 1948 की 'गुणसुंदरी', 1955 कीेेे 'तांगे-वाली', 'गरम कोटऔर साल 1957 की 'रानी रूपमती' इनकी यादगार फिल्में हैं।

आशीर्वाद लेने के लिए लगती लाइन

निरूपा रॉय ने कई माइथोलॉजिकल फिल्मों में काम किया। साल 1950 की फिल्म 'हर हर महादेवमें देवी पार्वती का रोल किया तो लोग सच में उन्हें देवी का रूप मानने लगे। इनके घर के सामने आशीर्वाद लेने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती।

किया 'सुपरवुमन' का रोल 

साल 1960 में निरुपा रॉय ने डायरेक्टर अनंत ठाकुर की फिल्म 'सुपरमैन' में एक सुपरवुमन का रोल किया। वो इस तरह का किरदार निभाने वाली पहली एक्ट्रेस थीं। साल 1955 की 'मुनीम जी', साल 1961 की 'छायाऔर साल 1964 की फिल्म 'शहनाईके लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता।

देखने वाले खुद को रोने से रोक न सकें

निरूपा रॉय जब 35 की उम्र के आसपास पहुंचीं तो डायरेक्टर इन्हें मां के रोल ऑफर करने लगे। वो परदे पर जब फटे-पुराने कपड़ों में एक गरीब मां का रोल करतीं किसी से तरह अपने बच्चों को पालतीं। इनकी एक्टिंग इतनी शानदार कि देखने वाले खुद को रोने से रोक न सकें। इस तरह के रोल के लिए उन्हें 'Queen of Misery' का टाइटल मिला। निरूपा रॉय.. देव आनंदराजेश खन्नाशशि कपूर, धर्मेंद्र से लेकर मिथुन और सनी देओल की मां बनीं।

अभिताभ बच्चन की ''लाल बादशाह आखिरी बार फिल्म बनीं मां

करीब 10 फिल्मों में अमिताभ बच्चन और निरूपा रॉय मां-बेटे के रोल में नजर आए। तो लोग सच में निरूपा रॉय को अमिताभ बच्चन की मां समझने लगे। साल 1999 की 'लाल बादशाह' में वो आखिरी बार अमिताभ बच्चन की मां बनीं। 'लाल बादशाह' फिल्म निरूपा रॉय की आखिरी फिल्म थी।

जब आई जेल जाने की नौबत 

साल 2004 में फिल्म फेयर के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित निरूपा रॉय के दो बेटे हुए - योगेश और किरन। साल 2001 में छोटे बेटे की पत्नी उना रॉय ने निरूपा रॉय पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। जेल जाने की नौबत भी आई। उन्हें किसी फिल्मी बेटे ने इतने दुख नहीं दिए जितने उनके बेटों ने दिए।

73 साल की उम्र में छोड़ी दुनिया 

दोनों बेटों में प्रॉपर्टी को लेकर अक्सर झगड़ा होता। कहा जाता है इन्हीं सब बातों से वो परेशान हो गईउन्हें सदमा लगा। 13 अक्टूबर साल 2004 को हार्ट अटैक आया और निरूपा रॉय 73 साल की उम्र में दुनिया छोड़कर चली गईं। साल 2010 में इनके पति कमल रॉय का भी निधन हो गया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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