Actress Nutan : सशक्त किरदारों से छोड़ी छाप

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ये वो दौर था, जब भारत में अंग्रेजों का कब्जा था। मुंबई के रहने वाले प्रभाकर शिलौत्री अमेरिका से इकोनॉमिक्स में पीएचडी करके भारत लौटे। उन्होंने अपना बैंक, शिलौत्री बैंक ऑफ कॉमर्स शुरू किया। कैश की सुरक्षा के लिए एक बंदूक की जरूरत पड़ी। जब कलेक्टर ने लाइसेंस नहीं दिया तो उन्होंने कलेक्टर को तमाचा मार दिया। तब अंग्रेजों ने दो साल के लिए जेल में डाल दिया। अब घर में कमाई करने वाला कोई न था। तंगी बढ़ी को पत्नी रतनबाई ने फिल्मों में भजन गाना शुरू कर किया। देखते ही देखते वो 30 के दशक की दिग्गज एक्ट्रेस और सिंगर बनी। रतनबाई की बेटी शोभना भी साल 1935 में फिल्मों में आईं। बतौर एक्टर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर साल 1985 तक किया। शोभना ने मराठी फिल्म डायरेक्टर कुमारसेन समर्थ से शादी की। शोभना के चार बच्चे हुए। इनमें से एक थीं बिंदास एक्ट्रेस तनूजा। लेकिन आज कहानी शोभना की दूसरी बेटी एक्ट्रेस नूतन की । जो अपने किरदार में जन फूंक देतीं थी। इनकी सादगी और खूबसूरती के शम्मी कपूर से लेकर अमिताभ बच्चन तक दिवाने थे। लेकिन लोग उन्हें बदसूरत कहते थे। इस वजह से जब वो दुखी होती मां शोभना ही उनको सहारा देतीं। मां ने फिल्म बनाई तो नूतन ने बॉलीवुड में कदम रखा। लेकिन, एक वो दौर भी आया जब प्रॉपर्टी की वजह से नूतन ने अपनी मां को कोर्ट में घसीटा। अपनी बहन नूतन से चिढ़ने लगी। लेकिन बाद में नूतन को इस बात का अफसोस हुआ। शायद इसी दुख के बाद एक बीमारी की गिरफ्त में आईं और अपनी मां के निधन के पहले दुनिया से चली गई।

4 जून, साल 1936 को जन्मी नूतन अक्सर अपनी मां शोभना के साथ शूटिंग देखने जाया करती। इस वजह से उनका भी रुझान फिल्मों की ओर गया और वो भी एक्ट्रेस बनने का ख्वाब देखने लगीं। बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट साल 1945 में रिलीज हुई फिल्म ‘नल दमयंती’ फिल्मी दुनिया में कदम रखा।

लेकिन वो इस दौरान काफी टूट सी गईं। दरअसल बचपन में उन्हें 'बदसूरत' कहा गया।

साल 1956 में एक इंटरव्यू में नूतन ने कहा था कि,

'जब मैं चार साल की थी, तो मेरी मां की एक दोस्त ने मुझे बहुत समय तक घूरने के बाद मेरी मां से कहा, सच कहूं। शोभना, तुम्हारी बच्ची कितनी बदसूरत है। मुझे उस समय साफ तौर पर ये समझ नहीं आया कि, मेरे बारे में क्या कहा गया। जब मैंने अपनी मां से पूछा कि आपकी दोस्त मेरे बारे में क्या कह रही थीं। मां ने मुझे जब बताया, तो मुझे बहुत ज्यादा दुख हुआ।'

नूतन ने कहा, तब मेरी मां ने मुझे समझाया। जिसके बाद मुझे हौंसला मिला। इसके बाद जब भी किसी ने लुक्स पर कमेंट किया, तो मैंने जवाब देते हुए कहा, जब मैं बड़ी होंगी, तो मैं बिल्कुल अपनी मां की तरह ही खूबसूरत हो जाऊंगी।’

ये बात सच भी साबित हुई। नूतन ने 15 साल की उम्र में ‘मिस इंडिया’ का खिताब जीता। इस टाइटल को पाने वालीं वो पहली एक्ट्रेस बनीं। साल 1950 में फिल्म 'हमारी बेटी' से नूतन ने बतौर हीरोइन बॉलीवुड में कदम रखा। ये फिल्म उनकी मां शोभना समर्थ ने डायरेक्ट की थी। फिर साल 1955 की 'सीमा’ की जिसके लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता। साल 1959 की ‘सुजाता’, साल 1963 की ‘बंदिनी’ और साल 1978 में 42 साल की उम्र में फिल्म ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ इस फिल्म के लिए सबसे ज्यादा उम्र में बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर का अवॉर्ड जीता। जो अब तक एक रिकॉर्ड है। नूतन ने 5 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड पाया और ये रिकॉर्ड भी 30 साल तक उनके नाम रहा।

नूतन ने अपनी फिल्मों में सशक्त किरदारों से छाप छोड़ी। वुमन सेंट्रिक रोल वाली फिल्में उनकी पहचान बनीं। उन्होंने एक्ट्रेसेज के महज शोपीस के तौर पर इस्तेमाल होने की परंपरा को बदला। उनकी खूबसूरती पर भी लोग मर मिटते थे। एक्टर शम्मी कपूर भी नूतन के दीवाने थे। दोनों एक दूसरे को डेट भी करते। पर शादी नहीं की। अमिताभ बच्चन ने भी नूतन की खूबसूरती की कई बार तारीफ की। एक्टर राजेंद्र कुमार भी नूतन को पसंद करते थे। नूतन की मां शोभना से उनका हाथ तक मांगा, लेकिन शोभना समर्थ ने इस रिश्ते से इंकार कर दिया। इनका नाम संजीव कुमार से भी जुड़ा। एक मैगजीन में नूतन ने अपने अफेयर संजीव कुमार के बारे में पढ़ा तो वो काफी गुस्सा हुईं और सेट पर ही संजीव कुमार को थप्पड़ जड़ दिया।

नूतन ने अपने कैरियर के टॉप पर पहुंचने के बाद साल 1959 में नेवी के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल से शादी कर ली। इनके बेटे मोहनीश बहल भी लंबे समय तक एक एक्टर रहे।

नूतन दिलीप कुमार के साथ काम करना चाहती थीं। साल 1953 में बन रही फिल्म ‘शिकवा’ में मौका भी मिला लेकिन फिल्म बंद हो गई। फिर जब सुभाष घई फिल्म ‘कर्मा’ बनाई तब जाकर नूतन ये अधूरी ख्वाहिश पूरी हुई।

नूतन का स्टारडम ऐसा था कि शादी के बाद भी फिल्ममेकर्स नूतन को अपनी फिल्मों में कास्ट करने को तैयार रहते। नूतन ने परदे पर साड़ी में लिपटी शांत, सरल और सुलझी हुई महिला का किरदार भी निभाया और स्क्रिप्ट की डिमांड पर बोल्ड कपड़ों में भी नजर आईं। शबाना और स्मिता पाटिल जैसी एक्ट्रेस भी उनसे इंस्पायर हुई।

राइटर ललिता तम्हाणे ने नूतन की बायोग्राफी लिखी है। किताब के मुताबिक, नूतन के फिल्मी करियर को संवारने में मां शोभना का बड़ा हाथ था, लेकिन इसी मां से एक वक्त ऐसी तल्खी हुई कि दोनों ने कई सालों एक दूसरे से बात नहीं की। दरअसल शोभना समर्थ ने अपने प्रोडक्शन हाउस ‘शोभना पिक्चर्स’ से बॉलीवुड में नूतन को लॉन्च किया। प्रोडक्शन हाउस में नूतन भी हिस्सेदार थीं। इसी प्रोडक्शन के पैसों के विवाद कोर्ट तक पहुंचा। इसी वजह से नूतन का अपनी बहन तनुजा से भी रिश्ता अच्छा नहीं रहा।

जिस मां ने बेटी को फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाई, उस मां के दिल पर तब कितनी गहरी चोट पहुंची होगी, जब उसकी अपनी बेटी ने उसे कोर्ट की चौखट पर ला खड़ा किया। हालांकि, जब ये विवाद सुलझा, तो एक बार फिर मां-बेटी का मिलन हुआ। दोनों के बीच सब कुछ ठीक तो हो गया। लेकिन, नूतन को अफसोस भी रहा। इसी बीच साल 1990 में नूतन को कैंसर डिटेक्ट हुआ और 21 फरवरी, साल 1991 में सिर्फ 54 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया से अलविदा कह दिया।

नूतन के गुजर जाने के बाद एक इंटरव्यू में शोभना समर्थ ने बेटी को याद करते हुए कहा था कि

जब नूतन गई, तो मुझे उसके जाने का अहसास तक नहीं हुआ। नूतन बहुत ही प्यारी थी। कहीं न कहीं, उसने जीने की इच्छा खो दी थी। वो जानती थी कि, ये उसके अंत की शुरुआत है। उसने अपनी बीमारी को प्रोत्साहित किया। लेकिन, उसने और ध्यान रखा होता, तो वो कुछ साल और जी लेती। वो कहती थीं- ‘मैं जागना चाहती हूं, मैं अभी सो रही हूं।’

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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