Actress Waheeda Rehman : जब पहली नजर में ही आंखों में बस गईं...

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बला की खूबसूरत वहीदा रहमान (Actress Waheeda Rehman) ने दशकों तक दिलों में राज किया। इनकी जिंदगी कहानी भी बेहद दिलचस्प है।

 

'मिसिअम्मा' का रीमेक बनाने का किया फैसला

साल 1954 की 'आरपार' और साल 1955 की 'मिस्टर एंड मिसेज 55' जैसी सुपरहिट फिल्में देने के बाद महान फिल्मकार गुरु दत्त, अपनी अगली फिल्म बनाने के लिए एक स्टोरी की तलाश कर रहे थे। तभी उन्होंने साल 1955 की एक सुपरहिट तमिल फिल्म 'मिसिअम्मा' देखी। इस फिल्म को देखने के बाद तय किया कि इसका हिंदी रीमेक बनाया जाएगा। गुरु दत्त, अपनी टीम जिसमें स्क्रीनप्ले राइटर अबरार अल्वी और प्रोडक्शन कंट्रोलर गुरु स्वामी जैसे टैलेंटेड लोग थे, उनके साथ एक कार में बैठे और मुंबई से हैदराबाद की ओर निकल पड़े।

जब खूबसूरत लड़की को देखते रह गए गुरु दत्त

लेखिका सत्य सरन अपनी किताब 'टेन इयर्स विद गुरुदत्त' में स्क्रीनप्ले राइटर अबरार अल्वी के हवाले से लिखती हैं कि 'ड्राइविंग सीट पर बैठे थे अबरार अल्वी। कार चलाते हुए वो थोड़ा थक भी गए थे। अभी हैदराबाद पहुंचे ही थे कि कार की एक भैंस से टक्कर हो गई। भैंस को तो चोट आई ही, साथ में कार भी खराब हो गई। इस वजह से गुरु दत्त, जो अपना काम निपटा कर मुंबई लौटना चाहते थे, उन्हें मजबूरन हैदराबाद में कुछ दिनों तक रुकना पड़ा।'

पहली ही नजर में आंखों में बसीं

उन्हीं दिनों में से एक दिन गुरु दत्त एक फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर के ऑफिस में बैठे हुए थे। तभी उनकी नजर, एक लड़की पर पड़ी। जैसे पहली ही नजर में मानो वो लड़की उनकी आंखों में बस गई हो। साथ में बैठे फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर से पूछा, तो पता चला 'इस लड़की ने अभी-अभी साउथ इंडस्ट्री से अपना करियर शुरू किया है। दो-तीन फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए हैं। हां, इनका डांस बड़ा ही बेहतरीन है।' गुरु दत्त ने उस लड़की को अपने ऑफिस में मिलने बुलाया। साधारण कपड़े और बिना मेकअप के गुरुदत्त के ऑफिस पहुंची,  उस लड़की ने गुरु दत्त के हर सवाल का जवाब बेहद सरलता से दिया। करीब आधे घंटे की इस मुलाकात के बाद गुरु दत्त ने उसे साल 1956 की फिल्म 'सीआईडी' में देव आनंद के साथ साइन कर लिया था। 

भैंस का शुक्रिया...

लेखिका सत्य सरन अपनी किताब 'टेन इयर्स विद गुरुदत्त' में लिखती हैं कि 'स्क्रीनप्ले राइटर अबरार अल्वी कहते हैं कि, उस भैंस को धन्यवाद दिया जाना चाहिए, जिसके कारण हमें उस लड़की के रूप में बेहतरीन अदाकारा मिली।'

वहीदा-वहीदा ही रहीं

वो लड़की कोई और नहीं, बीते दौर की बला की खूबसूरती और अपने दामन में भरपूर टैलेंट समेटे लिजेंड्री एक्ट्रेस वहीदा रहमान थीं। जिन्होंने दशकों तक लोगों के दिलों में राज किया। हर कोई इनकी एक झलक पाने को तरसता। देव आनंद से लेकर दिलीप कुमार,  राज कपूर से लेकर राजकुमार तक, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ऐसा कोई बड़ा स्टार नहीं है, जिनके साथ इन्होंने काम न किया हो।  वचपन में ही पिता की मौत हो गई। मां बीमार रहने लगी। डॉक्टर बनने का ख्वाब अधूरा रह गया। मेहनत और संघर्ष से फिल्मों में आईं। कई लोगों ने कहा मधुबाला, नरगिस और मीना कुमारी की तरह अपना मूल नाम बदल लो पर वहीदा, वहीदा ही रहीं। वहीदा रहमान, जिनके प्यार में पहले से शादीशुदा गुरुदत्त पागल हो गए और इसी मोहब्बत ने गुरुदत्त का घर, परिवार, जिंदगी सब कुछ छीन लिया।

चार बहनों में सबसे छोटी थीं वहीदा

30 का दशक, ये वो वक्त था जब दक्कनी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोहम्मद अब्दुर रहमान मद्रास प्रेसीडेंसी में डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर थे। परिवार में पत्नी मुमताज बेगम और चार बेटियां। इन बेटियों में सबसे छोटी थीं, 03 फरवरी साल 1938 को जन्मीं - वहीदा रहमान। आठ साल की उम्र में वहीदा रहमान को स्कूल छोड़ना पड़ा। वजह थी, तबियत खराब होने से वो बेहद कमजोर हो गई। वहीदा रहमान भारतनाट्यम सीखना चाहती थीं। मुसलमान होते हुए भी पिता मोहम्मद अब्दुर रहमान ने बेटी की इच्छा का मान रखा और भारतनाट्यम सीखने की इजाजत दे दी। धीरे-धीरे तबीयत भी ठीक होने लगी और उन्होंने दोबारा से पढ़ाई भी शुरू की।

मुसलामन होते भी सीखा भरतनाट्यम

एक बार भारत के आखिरी गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का उनके शहर में आना हुआ। मोहम्मद अब्दुर रहमान अफसर थे उन्हें ही स्वागत सत्कार की जिम्मेदारी मिली। कल्चरल नाइट का प्रोग्राम भी होना था। जिसमें शर्त थी बाहर का नहीं, कोई लोकल आर्टिस्ट ही परफॉर्म करेगा। मोहम्मद अब्दुर रहमान टेंशन में थे। किसी ने वहीदा रहमान का नाम सुझाया। मोहम्मद अब्दुर रहमान मान भी सहमत हुए। जब वहीदा रहमान ने चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के सामने परफॉर्म किया तो वो भी उनकी सराहना किए बिना रह न पाए। उन्होंने कहाकि पहली बार किसी मुस्लिम को भरतनाट्यम करते देखा। पिता मोहम्मद अब्दुर रहमान भी बोले 'बेटी ने साबित कर दिया कि कला का कोई धर्म नहीं होता।' अगले दिन अखबारों में फोटो भी छपी।

डॉक्टर बनने का ख्वाब पीछे छोड़ा

साल 1951, 13 साल की उम्र में वहीदा रहमान की जिंदगी ने करवट ली। पिता मोहम्मद अब्दुर रहमान का अचानक इंतकाल हो गया। ये गम मां मुमताज बेगम को बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो बीमार रहने लगीं। वक्त गुजरा, जिम्मेदारियां बढ़ीं। भरतनाट्यम में पारंगत वहीदा रहमान को फिल्मों के ऑफर मिलते। वो एक डॉक्टर बनना चाहती थीं पर इस ख्वाब को पीछे छोड़ अपनी फैमिली के लिए साल 1955 की तमिल फिल्में 'रोजुलु मारायी' और 'जयसिम्हा' से अपने करियर की शुरुआत की। वहीदा रहमान को साउथ की फिल्मों से बॉलीवुड अपने दौर के दिग्गज डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, एक्टर, कोरियोग्राफर और राइटर गुरु दत्त लेकर आए। साल 1956 की देव आनंद की फिल्म 'सीआईडी' में काम दिया। 

जब प्यार में पड़े गुरु दत्त

फिल्म 'सीआईडी' को गुरु दत्त ने प्रोड्यूस किया था। लेकिन इसके बाद साल 1957 की 'प्यासा', साल 1959 की 'कागज़ के फूल'  और साल 1962 की 'साहब बीबी और गुलाम' जैसी सुपरहिट फिल्मों में गुरु दत्त वहीदा रहमान के हीरो बने। और इसी दौरान वो अपनी उम्र से 13 साल छोटी खूबसूरत वहीदा रहमान के इश्क में पड़े। इनके प्यार के अक्सर मीडिया में भी छपते। इस रिश्ते में दो दिक्कत थी। पहली – धर्म। सारस्वत ब्राह्मण गुरुदत्त, मुस्लिम वहीदा रहमान से शादी। पर प्यार के लिए गुरुदत्त मुसलमान बनने को तैयार थे। लेकिन, दूसरी दिक्कत ने गुरुदत्त जिंदगी में उथल पुथल मचा कर रखी हुई थी।

पहले से शादी-शुदा थे गुरु दत्त

दरअसल, गुरु दत्त पहले से शादीशुदा थे, और तीन बच्चों के पिता थे।  जिंदगी में वहीदा रहमान आतीं उसके दो साल पहले ही गुरु दत्त ने 26 मई, साल 1953 में अपने दौर की मशहूर सिंगर गीता दत्त से लव मैरिज कर ली थी। जब गीता दत्त को गुरुदत्त और वहीदा रहमान के इश्क की भनक लगी तो वो अपने बच्चों को लेsकर गुरु दत्त की जिंदगी से दूर चली गईं।

तन्हाई से उभरने के लिए शराब को सहारा बनाया 

ये वो वक्त था जब गुरुदत्त की एक फिल्म भी फ्लॉप हो गई। करोड़ों का घाटा हुआ। वहीं वहीदा रहमान ने भी गुरुदत्त से दूरी बना ली, पत्नी गीता दत्त भी पास नहीं थी। ऐसे में अपनी तन्हाई से उबरने के लिए शराब को सहारा बनाया और वो शराब के नशे में ऐसे डूबे की। 10 अक्टूबर, साल 1964 को सिर्फ 39 साल की उम्र में गुरुदत्त दुनिया छोड़कर चले गए।

वहीदा रहमान ने पाया ऊंचा मुकाम

वहीदा रहमान भी गुरु दत्त के जाने से गमज़दा थीं। ये ग़म गुजरते वक्त के साथ कम हुआ। अगले 10 सालों का वक्त गुजरा। इन सालों में 'गाइड', 'तीसरी कसम', 'राम और श्याम', 'नील कमल', 'खामोशी', 'रेशमा और शेरा' और 'फागुन' जैसी तमाम सुपरहिट फिल्में की। वहीदा रहमान ने एक ऊंचा मुकाम हासिल किया। अब वहीदा रहमान की जिंदगी में एक्टर कमलजीत उर्फ शशि रेखी आए। दोनों की मुलाकात एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी।

एक्टर कमलजीत ने किया वहीदा को प्रपोज

एकटर कमलजीत ने प्रपोज किया तो वहीदा रहमान भी मान गईं। 27 अप्रैल, साल 1974 में शादी की, ये साथ 26 सालों का रहा। साल 2000 में कमलजीत का निधन हो गया। वहीदा रहमान और कमलजीत के दो बच्चे हुए - एक बेटा – सोहेल रेखी और एक बेटी – काशवी रेखी। दोनों ही बच्चों ने बॉलीवुड में नहीं, बिजनेस में अपना करियर बनाया।

'दादा साहेब फाल्के' से नवाजी गई वहीदा रहमान

साल 1972 में 'पद्मश्री', साल 2011 में 'पद्म भूषण' और साल 2023 में सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान 'दादा साहेब फाल्के' से सम्मानित वहीदा रहमान साल 2005 की वॉटर, साल 2006 की 'रंग दे बसंती', साल 2009 की 'दिल्ली 6' और साल 2018 की 'विश्वरूपम 2' जैसी नए जमाने की फिल्मों में भी नजर आईं। साल 2021 की मराठी फिल्म 'स्केटर गर्ल' के बाद उन्होंने किसी फिल्म में काम नहीं किया है।

जिंदादिली से जी रहीं जिंदगी 

आज 86 साल की उम्र में वो कभी-कभी रियलिटी शोज में नजर आ जाती हैं। वो फोटोग्राफी का शौक रखती हैं। साल 2019 में अपनी विश लिस्ट में एक समंदर में डाइविंग भी की। उम्र के इस पड़ाव में भी बेहद जिंदादिली से जिंदगी जी रहीं वहीदा रहमान मानती हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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